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क्या है पीएफआई संगठन, जिसका नाम रांची और लोहरदगा में हिंसा भड़काने में आ रहा

Saurav Singh Ranchi : 10 को राजधानी रांची में जुमे की नमाज के बाद हिंसा भड़की थी.वहीं 10 अप्रैल को लोहरदगा में रामनवमी जुलूस के दौरान सांप्रदायिक दंगा भड़की थी. झारखंड के इन दोनों जिलों में भड़की संप्रदायिक हिंसा के पीछे पीएफआई संगठन का हाथ माना जा रहा है. आखिर कौन है पीएफआई संगठन, जो झारखंड में सांप्रदायिक दंगा करा रहा है. पढ़ें - नेशनल">https://lagatar.in/national-herald-case-rahul-gandhis-inquiry-in-ed-office-has-been-termed-as-black-chapter-by-congress/">नेशनल

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कैसे बना PFI

पीएफआई की स्थापना 1993 में बने नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट से ही हुई है. 1992 में बाबरी मस्जिद ढहाने के बाद नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट नाम से एक संगठन बना था. इसके बाद 2006 में नेशनल डेमाक्रेटिक फ्रंट का विलय पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) में हो गया. हालांकि, ऑफिशियल इस संगठन की शुरुआत 17 फरवरी, 2007 में हुई. यह संगठन केरल से संचालित होता है लेकिन पूरे देश में इसके लोग फैले हुए हैं. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के मुताबिक पीएफआई देश के 23 राज्यों में सक्रिय है. इसे भी पढ़ें - टीपीसी">https://lagatar.in/tpc-area-commander-arrested-one-country-made-pistol-and-two-live-bullets-recovered/">टीपीसी

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 साल 2018 में झारखंड में बैन हुआ था पीएफआई

राज्य सरकार ने पीएफआई को पहली बार 21 फरवरी 2018 को प्रतिबंधित किया था. इसके खिलाफ इस संगठन के सदस्य हाइकोर्ट गये थे. 27 अगस्त 2018 को प्रतिबंध हटा दिया गया था. झारखंड सरकार ने आतंकी कनेक्‍शन का हवाला देकर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआइ) को फिर से दुबारा 12 फरवरी 2019 को बैन कर दिया था. आतंकियों के स्लीपर सेल व आतंकी गतिविधियों के आरोप में पूर्व में प्रतिबंधित पीएफआइ को फिर से प्रतिबंधित करने के बारे में झारखंड सरकार के गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने कहा कि पाकुड़, साहिबगंज और जामताड़ा में इसकी गतिविधियां संदिग्‍ध हैं.पीएफआइ संगठन झारखंड में सबसे ज्यादा पाकुड़, साहिबगंज और जामताड़ा में सक्रिय है.इन तीनों जिलों में संगठन ने अपने हजारों सदस्य बनाये हैं. इसे भी पढ़ें - टीपीसी">https://lagatar.in/tpc-area-commander-arrested-one-country-made-pistol-and-two-live-bullets-recovered/">टीपीसी

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 लोहरदगा में रामनवमी जुलूस के दौरान भड़की थी हिंसा

लोहरदगा जिले में 10 अप्रैल 2022 रामनवमी जुलूस के दौरान हिंसा भड़की थी. जिसको नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन ने इंटरनेट सेवा बंद कर दिया था. घटना के 5 दिन के बाद 16 अप्रैल की आधी रात से इंटरनेट सेवा को बहाल कर दिया गया था. पहली बार ऐसा हुआ कि जिले में लगातार पांच दिनों तक इंटरनेट सेवा ठप रही थी. दरअसल, लोहरदगा के सदर थाना क्षेत्र के हिरही गांव में विगत 10 अप्रैल 2022 को रामनवमी जुलूस के दौरान कुछ उपद्रवियों ने पथराव और आगजनी की घटना को अंजाम दिया था और जिसके बाद हिंसा भड़क गई थी. इसमें 10 लोग घायल हो गये थे. हिंसा को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन ने लोहरदगा में धारा 144 लागू कर इंटरनेट सेवा को भी बंद कर दिया था. इसे भी पढ़ें - दिल्ली">https://lagatar.in/delhi-corona-uncontrollable-1118-new-patients-found-in-24-hours-two-people-died/">दिल्ली

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 रांची में ​​​​​​जुमे की नमाज के बाद हुई थी हिंसा

रांची में ​​​​​​जुमे की नमाज के बाद बीते दस जून को हिंसा हुई थी. जिसके बाद अस्थायी रूप से टेलीकॉम इंटरनेट सेवा बंद करने का आदेश जारी किया था. गृह, कारा और आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का की ओर से जारी इस आदेश में कहा गया था. जिसके बाद 11 जून की रात इंटरनेट सेवा बहाल कर दी गई थी. जारी आदेश में कहा गया है कि राजधानी रांची की घटना की वजह से राज्य के अन्य क्षेत्रों में कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति उत्पन्न न हो जाये, इसलिये टेलीकॉम इंटरनेट सेवा अस्थाई रूप से बंद करने का निर्णय लिया गया है. ताकि, असामाजिक तत्व अफवाह, झूठी जानकारी न फैला सकें. ऐसा होने पर कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.सरकार ने यह निर्णय आपात स्थिति को टालने और लोगों की सुरक्षा कायम रखने के उद्देश्य से लिया है. इसे भी पढ़ें - दो">https://lagatar.in/break-on-heavy-fall-of-two-days-sensex-up-63-points-nifty-close-to-16000/">दो

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