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कोडरमा : दो मॉडल स्कूल, विज्ञान रसायन व वाणिज्य के शिक्षक नहीं
alt="" width="415" height="739" /> स्कू लों में छात्रों को बेहतर शिक्षा को लेकर सरकार ने जिलों में मॉडल स्कूल बनाए, लेकिन इन मॉडल स्कूलों में ना शिक्षक हैं, ना ही जरूरी संसाधन. कोडरमा जिला में तीन मॉडल स्कूल हैं. डोमचांच प्रखंड, कोडरमा प्रखंड और तीसरा झुमरीतिलैया मे मॉडल स्कूल बनाए गए हैं. सभी में शिक्षकों की कमी है. जानकारी के मुताबिक मैट्रिक की परीक्षा में हिंदी, अंग्रेजी व संस्कृत दोनों अनिवार्य विषय हैं, लेकिन दो स्कूलों में संस्कृत के शिक्षक नहीं है. वहीं उर्दू के भी शिक्षक नहीं हैं.
सीएच प्लस टू हाई स्कूल
इस स्कूल में कुल 1100 छात्र हैं. जबकि इंटरमीडिएट में 880 छात्र हैं. इस विद्यालय में संस्कृत, रसायन शास्त्र, इतिहास व वाणिज्य के शिक्षक नहीं हैं. स्कूल में कई सुविधाओं का अभाव है और बताते चलें कि जिले का सबसे पुराना स्कूल होने का गौरव प्राप्त है.देवघर : दर्जा मॉडल स्कूल का,भवन जर्जर, शिक्षकों की भी भारी कमी
दे वघर हिंदी विद्यापीठ में स्थापित गोवर्धन साहित्य उच्च विद्यालय में संसाधन और विषयवार शिक्षकों की कमी है. इस स्कूल की स्थापना 1952 में की गई थी. वर्ष 2018-19 में इसे मॉडल स्कूल का दर्जा दिया गया. स्कूल के प्राचार्य नितेश कुमार ने बताया कि मॉडल स्कूल का दर्जा हासिल होने के बाद भी स्कूल की दशा में सुधार नहीं हुआ. स्कूल में इंग्लिश, फिजिकल और इकोनॉमिक्स के शिक्षक नहीं है. शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए हर तीन महीने के अंतराल पर शिक्षा विभाग को पत्र भेजा जाता है. इसके बाद भी शिक्षकों की कमी दूर नहीं की जाती. स्कूल कैंपस में जर्जर पुरानी बिल्डिंग के जीर्णोद्धार को लेकर शिक्षा विभाग को पत्र भेजा जा चुका है. स्कूल का शौचालय भी जर्जर हालत में है.दुमका : चिह्नित विद्यालय में विद्यार्थी ज्यादा और शिक्षक कम
alt="" width="1024" height="768" /> उ प राजधानी दुमका में दो स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में चिह्नित किया गया है. एक स्कूल शहर के बीचोबीच स्थित है, जिसका नाम राजकीय शास्त्री स्मारक मध्य विद्यालय है. वर्ग 1 से 8 तक की पढ़ाई इस स्कूल में होती है. कुल 359 बच्चे इस स्कूल में नामांकित हैं. शिक्षकों की कुल संख्या सात है. वर्ग 1 से 5 में 4 शिक्षक तथा 6 से 8 तक 3 शिक्षक पदस्थापित हैं. स्कूल प्राचार्या गायत्री कुमारी ने बताया कि मॉडल स्कूल के रूप में चिन्हित किए जाने के बाद स्मार्ट क्लास बनाया जा रहा है. आने वाले दिनों में इसे अपग्रेड कर हाई स्कूल बना दिया जाएगा. स्कूल में नामांकित बच्चों की तुलना में शिक्षक की अनुपात कम है.
धनबाद : पढ़ाई का अनोखा ‘मॉडल’ पेश कर रहे हैं जिले के ये मॉडल विद्यालय
नवोदय विद्यालय के कांसेप्ट पर प्रत्येक जिले में मॉडल स्कूलों की स्थापना की गई. परंतु सरकार का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट विपन्नता का शिकार हो कर रह गया है. कहीं शिक्षक नहीं तो कहीं भवन ही नहीं. मॉडल स्कूल पढ़ाई का ऐसा मॉडल पेश करेंगे, यह कल्पना किसी ने नहीं की होगी. टुंडी हाई स्कूल के उधार के चार कमरों में संचालित मॉडल स्कूल वर्ष 2011 में अस्तित्व में आया. तब से स्कूल का भवन निर्माणाधीन है. गोविंदपुर मॉडल स्कूल के पास अपना भवन तो है, लेकिन बेंच-डेस्क ही नहीं. हालत यह कि एक रूम में दो कक्षाएं चलती रहती हैं. दोनों मॉडल स्कूलों में शिक्षक और बच्चों की संख्या तय मानक से काफी कम है.कहीं भवन तो कहीं बैठने को बेंच-डेस्क ही नहीं दो कक्षाएं चल रहीं साथ-साथ
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हाई स्कूल के 4 कमरों में मॉडल स्कूल
मॉडल स्कूल टुंडी का संचालन हाई स्कूल टुंडी उधार के चार कमरों में हो रहा है. भवन 11 वर्षों बाद भी लोधरिया में निर्माणाधीन है. एक डेपुटेशन पर है. उन्हें मिलाकर तीन स्थायी (मॉडल स्कूल के लिए अनुबंधित) शिक्षक हैं. बायोलॉजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री, हिस्ट्री, पॉलिटिकल साइंस सहित कई प्रमुख विषयों के शिक्षक ही नहीं हैं. कक्षा 6 से 12 तक केवल 85 विद्यार्थी हैं, जबकि क्षमता प्रति कक्षा 40 छात्र के हिसाब से 280 विद्यार्थियों की है. स्कूल प्रभारी प्राचार्य संजय कमल किशोर जायसवाल हैं.80 विद्यार्थी, बेंच-डेस्क 11
मॉडल स्कूल गोविंदपुर में मात्र 11 बेंच-डेस्क उपलब्ध हैं. इन 11 बेंच-डेस्क पर बैठकर 80 विद्यार्थी कक्षा 6 से 10 तक की पढ़ाई करते हैं. शिक्षक और बेंच-डेस्क की कमी के कारण कक्षा 6 और 7 का संचालन एक साथ होता है. स्कूल में मात्र 3 शिक्षक हैं. इनमें दो शिक्षक डेपुटेशन पर दूसरे स्कूल से मिले हैं. यहां लैब व लाइब्रेरी भी खानापूर्ति की तरह है. स्कूल के प्रभारी परमेश्वर प्रसाद महतो हैं. संसाधन के अभाव में छात्रों को परेशानी हो रही है.वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में उठाएंगे मुद्दे: भूतनाथ रजवार
प्रभारी जिला शिक्षा पदाधिकारी सह जिला शिक्षा अधीक्षक भूतनाथ रजवार कहते हैं कि डेपुटेशन पर शिक्षकों की नियुक्ति कर दोनों मॉडल स्कूल में शिक्षकों की कमी पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं. विभाग के राज्य स्तरीय अधिकारियों, डीएसई, डीईओ और मॉडल स्कूल के प्राचार्यों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग है, जिसमें मॉडल स्कूल के सभी मुद्दे रखे जाएंगे.बहरागोड़ा : खंडहर में तब्दील हो रहा है "2.98 करोड़ का मॉडल स्कूल भवन
alt="" width="1600" height="739" /> बहरागोड़ा प्रखंड में पांच साल पूर्व शिक्षा विभाग के तहत निर्मित 2.98 करोड़ की लागत का मॉडल स्कूल भवन खंडहर में तब्दील हो रहा है. वहीं वर्ष 2012 में स्थापित मॉडल स्कूल उधार के जर्जर भवन में चल रहा है. फिलहाल मॉडल स्कूल प्रखंड मुख्यालय हिंदी मध्य विद्यालय के एक जर्जर भवन में संचालित है. इस भवन में कमरों का अभाव है. वर्ष 2015-16 में स्वीकृत मॉडल विद्यालय भवन का निर्माण 2017 में पूर्ण हो गया था. परंतु किन्हीं कारणों से इसमें विद्यालय का संचालन नहीं हो सका. विशाल विद्यालय भवन रखरखाव के अभाव में जर्जर होकर खंडहर होने की ओर अग्रसर है. विद्यालय भवन झाड़ियों से घिरा पड़ा है.
उधार के जर्जर भवन में चलता है स्कूल एक कमरे में चलती हैं तीन कक्षाएं
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कक्षा 6 से 12वीं तक 141 विद्यार्थी पढ़ते हैं स्कूल में
alt="" width="1156" height="534" /> इधर, वर्ष 2012 में स्थापित मॉडल स्कूल प्रखंड मुख्यालय हिंदी मध्य विद्यालय के एक जर्जर भवन में संचालित है. वर्षों पूर्व बने इस भवन की छत से प्लास्टर टूट कर गिरता है और छत के रड दिखाई पड़ रहे हैं. इस विद्यालय में कक्षा छह से 12वीं तक 141 विद्यार्थी नामांकित हैं. विद्यालय के प्रधानाध्यापक जलघर पात्र ने बताया कि कमरों के अभाव में एक ही कमरा में तीन- तीन कक्षाएं चलती हैं. ऐसे में पठन-पाठन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. विद्यालय में 13 शिक्षकों की जगह सिर्फ पांच ही हैं. कई विषयों के शिक्षक नहीं हैं. प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी लखींद्र सोरेन अवकाश पर होने के कारण उनसे बात नहीं हो सकी.
हजारीबाग : प्रतिनियुक्त शिक्षकों के भरोसे हजारीबाग जिले के पांच मॉडल स्कूल
राष्ट्रीय शिक्षा माध्यमिक अभियान के तहत जिस उद्देश्य से हजारीबाग जिले में तीन-तीन करोड़ की लागत से वर्ष 2010 में पांच मॉडल स्कूल भवन बनाए गए, उसका मकसद पूरा होने में कई अड़चनें आ रही हैं. कक्षा छह से 12वीं तक अंग्रेजी माध्यम से ग्रामीण बच्चों को तालीम देने के लिए खुले मॉडल स्कूलों में पिछले 12 वर्षों से आवासीय सुविधाएं शुरू नहीं हो पायी हैं. वहीं बच्चों को विषयवार शिक्षक भी नसीब नहीं हैं. लेकिन तारीफ इस बात की है कि यहां 10वीं और 12वीं के करीब सौ फीसदी बच्चे अबतक प्रथम श्रेणी में ही उत्तीर्ण हुए हैं. सभी स्कूलों में चार से पांच शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए हैं. वही मिलकर सभी विषयों को पढ़ाते हैं.मॉडल स्कूल बरकट्ठा
alt="" width="1600" height="1200" /> यहां विद्यालय का अपना भवन है. इस स्कूल में कक्षा छह से 12वीं तक 137 बच्चे नामांकित हैं. यहां भी आवासीय सुविधा नहीं है. प्रधानाचार्य राहुल कुमार ने बताया कि यहां विभिन्न विषयों के छह शिक्षक हैं. इनमें संविदा पर तीन और प्रतिनियुक्ति पर तीन शिक्षक हैं. यहां एसएसटी, गणित, साइंस और अंग्रेजी के शिक्षक हैं.
मॉडल स्कूल चौपारण
alt="" width="1040" height="780" /> झारखंड शिक्षा परियोजना और स्कूल से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार यहां कक्षा छह से 12वीं तक 261 बच्चे हैं. प्राचार्य राजकुमार सिंह बताते हैं कि इस स्कूल में पांच शिक्षक प्रतिनियुक्त हैं. इनमें एक शिक्षक सप्ताह में तीन दिन ही आते हैं. गणित, भौतिकी, राजनीतिशास्त्र, भूगोल और अर्थशास्त्र के शिक्षक नहीं हैं.
मॉडल स्कूल बरही
alt="" width="1599" height="722" /> मॉडल स्कूल बरही फिलहाल प्लस टू हाई स्कूल भवन में ही चलता है. चूंकि मॉडल स्कूल बरही का चयन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के लिए हुआ है. यहां भवन का विस्तार किया जा रहा है. काम पूरा होते ही मॉडल स्कूल अपने भवन में शिफ्ट हो जाएगा. यहां 68 बच्चे पढ़ते हैं. यहां एसएसटी, गणित, साइंस और अंग्रेजी के शिक्षक हैं.
मॉडल स्कूल विष्णुगढ़
alt="" width="750" height="383" /> इस स्कूल में 142 बच्चे पढ़ते हैं. स्कूल का अपना भवन है, पर आवासीय सुविधाएं नहीं हैं. चार शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर हैं. यहां भी एसएसटी, गणित, साइंस और अंग्रेजी के शिक्षक हैं. अन्य विषयों की पढ़ाई यही शिक्षक मिलकर कराते हैं.
मॉडल स्कूल इचाक
इस स्कूल में 89 बच्चे पढ़ते हैं. स्कूल का अपना भवन है, पर आवासीय सुविधाएं नहीं हैं. चार शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर हैं. यहां भी एसएसटी, गणित, साइंस और अंग्रेजी के शिक्षक हैं. अन्य विषयों की पढ़ाई यही शिक्षक मिलकर कराते हैं.जल्द होगी शिक्षकों की बहाली : डीईओ
alt="" width="960" height="1280" /> डीईओ उपेंद्र नारायण ने बताया कि सरकार की हरी झंडी मिल चुकी है. केंद्रीय विद्यालय की तर्ज पर जल्द शिक्षकों की बहाली होगी. सालभर के लिए संविदा आधारित विषयवार शिक्षकों की बहाली होगी. जिले से रोस्टर बनाकर विभाग को भेजा जा चुका है. सरकार की योजना को सफलता से लागू करने का प्रयास जारी है. विभाग को सारी जानकारी हमारी ओर से दे दी गई है. वहां से आदेश जारी होते ही आगे कार्य होगा.
लातेहार : जिले में हैं तीन मॉडल स्कूल शिक्षकों की है कमी, लचर है व्यवस्था
लातेहार जिले में सरकारी स्तर पर तीन मॉडल स्कूल की स्थापना प्रतिभावान छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के उद्देश्य से की गई है. बालूमाथ, बरवाडीह व मनिका प्रखंड में एक-एक मॉडल स्कूल हैं. सरकार ने इन स्कूलों को अप-टू-डेट करने के इरादे से कई घोषणाएं की. शुरुआत में योजना को साकार करने के प्रयास भी हुए. लेकिन स्कूल में बुनियादी व्यवस्था ही ध्वस्त थीं. इसके कारण सारे प्रयास फेल हो गए. जिले में शुरू हुए इन स्कूलों में प्लस टू स्तर की पढ़ाई की जा रही है, लेकिन कही हिंदी, कहीं इतिहास तो कहीं भाषा के शिक्षकों की नियुक्ति नहीं है. पढ़ें हमारे संवाददाता की रिपोर्ट...यह हाल है मॉडल स्कूलों का गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का प्रयास फेल
alt="" width="1600" height="721" /> बालूमाथ इस विद्यालय में कुल 55 छात्र नामांकित हैं, जिसमें कक्षा छह में 37, कक्षा सात में 10, कक्षा नौ में 2, कक्षा दस में 6 छात्र है. लेकिन कक्षा आठ, 11 और 12वीं में कोई छात्र नामांकित नहीं हैं. इस विद्यालय में वाणिज्य, रसायन शास्त्र, हिंदी, अंग्रेजी व इतिहास के अध्यापक नहीं हैं. प्रयोगशाला में संसाधन नहीं हैं. वहीं, डेमोंस्ट्रेटर का पद रिक्त है. मनिका यहां कुल 47 छात्र नामांकित हैं, जिसमें कक्षा छह में 12, कक्षा सात में 4, कक्षा आठ में 1, एवं कक्षा नौ में 19 छात्र हैं. कक्षा 11 व 12 में कोई भी नामांकन नहीं है. इस विद्यालय में आाधारभूत संरचनाओं का घोर आभाव है. वहीं अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत, वाणिज्य, रसायन शास्त्र व इतिहास के अध्यापकों के पद रिक्त हैं. बरवाडीह यहां कुल 146 छात्र नामांकित है, जिसमें कक्षा छह में 20, कक्षा सात में 16, कक्षा आठ में 15 कक्षा, नौ में 15, कक्षा दस में 31, कक्षा 11 में 25 व कक्षा 12वीं में कुल 24 छात्र अध्ययनरत है. विडंबना यह है कि सभी कक्षों में छात्र नामांकित है लेकिन स्कूल की अपनी बिल्डिंग नहीं है. हालांकि मंगरा पंचायत के डोरामी ग्राम में भवन निमार्णाधीन है. इस विद्यालय में भी संस्कृत, हिंदी, वाणिज्य, इतिहास व रसायनशास्त्र की शिक्षकों की नियुक्ति नहीं है.
जमशेदपुर : मॉडल विद्यालयों में प्रमुख विषयों के शिक्षकों के पद पड़े हैं खाली
पूर्वी सिंहभूम जिले में कुल 19 मॉडल स्कूल हैं. इसमें प्रत्येक प्रखंड में एक प्लस टू हाई स्कूल व अन्य मध्य स्कूल को मॉडल स्कूल बनाया गया है. लेकिन सच्चाई यह है कि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में पिछड़ रहे स्कूलों की सूची जारी की गई है. इसमें पूर्वी सिंहभूम जिला में जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा गोद लिए गए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी मध्य विद्यालय का नाम भी शुमार है. शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा के स्तर में सुधार के उद्देश्य से मॉडल स्कूल तो बनाए गए, लेकिन शिक्षक और संसाधन के अभाव में शिक्षा के स्तर में अपेक्षा अनुरूप सुधार नहीं हो पाया. ऐसे में सरकारी की योजना सुचारू रूप से लागू नहीं हो पा रही है.आदिवासी प्लस टू हाई स्कूल 881 छात्रों के लिए सिर्फ 11 शिक्षक
alt="" width="1280" height="577" /> केमेस्ट्री के शिक्षक नहीं शिक्षा विभाग द्वारा आदिवासी प्लस टू हाई स्कूल सीतारामडेरा को मॉडल स्कूल बनाया गया है, लेकिन स्कूल में भवन के अभाव में किसी तरह शिक्षण कार्य चल रहा है. स्कूल के प्राचार्य छेटन लोहार ने बताया कि स्कूल में कुल 881 विद्यार्थी अध्य्यनरत है, जिसमें 11वीं व 12वीं में कुल 524,उच्च विद्यालय में 192 और मध्य विद्यालय में 165 विद्यार्थी है. शिक्षकों की बात करे तो कुल 11 शिक्षक के भरोसे यह मॉडल स्कूल चल रहा है. विद्यालय में रसायन विज्ञान के शिक्षक नहीं है. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी मध्य विद्यालय मॉडल स्कूल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी मध्य विद्यालय मानगो के प्रभारी प्रधानाध्यापक फिरदौस बानो ने बताया कि स्कूल में कुल 384 स्टूडेंट हैं. वहीं 9 नियमित व 4 सहायक शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को शिक्षा दी जा रही है. स्कूल का भवन तो ठीक है, लेकिन चहारदीवारी नहीं होने के कारण परेशानी होती है. उन्होंने बताया कि संसाधनों के अभाव में शिक्षण कार्य बाधित होता रहता है. शिक्षण के अतिरिक्त शिक्षकों पर कार्यालय के फाइल के काम ज्यादा रहते हैं.

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