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विनय सिंह के प्रति नरमी की वजह क्या थी? अब तक सुस्त क्यों थी ACB?

हजारीबाग जिला में गैर मजरुआ खास किस्म जंगल (प्रकृति की जमीन यानी डीम्ड श्रेणी का भूखंड) की दाखिल-खारिज पत्नी के नाम पर कराया. यह घोटाला तब किया गया, जब विनय चौबे हजारीबाग के डीसी थे.
 

Vinit/ Saurav 

आरोप-एकः हजारीबाग जिला में गैर मजरुआ खास किस्म जंगल (प्रकृति की जमीन यानी डीम्ड श्रेणी का भूखंड) की दाखिल-खारिज पत्नी के नाम पर कराया. यह घोटाला तब किया गया, जब विनय चौबे हजारीबाग के डीसी थे.

 

आरोप-दोः विनय कुमार सिंह सहित अन्य के खिलाफ डोरंडा थाना में प्राथमिकी (192/2025) दर्ज हुई थी. इसमें आरोप लगाया गया है कि वह जमीन प्रभु तिर्की की थी और विनय सिंह ने अन्य लोगों के साथ मिलकर भूमि की ने रजिस्ट्री करा ली है. विनय कुमार सिंह पर प्रभु तिर्की ने उसके साथ दुर्व्यवहार करने और  धमकी देने का आरोप भी लगाया है. 

 

आरोप-तीनः शराब घोटाला में आईएएस विनय कुमार चौबे की नाम आने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया. इस सिलसिले में एसीबी ने जो प्राथमिकी दर्ज की, उसमें विनय सिंह भी आरोपी थे. 

 

इनमें से दो मामले काफी पहले दर्ज हुए. किसी भी मामले में एसीबी विनय सिंह को पकड़ नहीं सकी. विनय सिंह बड़े आराम से अपने पक्ष में अदालत पीड़क कार्रवाई पर रोक लगाने में सफल हो गए.

 

एक मामला 25 सितंबर को और उसी दिन एसीबी ने विनय सिंह को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया. तीन दिन बाद विनय सिंह के चार ठिकानों पर छापेमारी कर दी. 

 

देखा जाए तो विनय सिंह के खिलाफ कार्रवाई तेज तब हुई जब सरकार ने एसीबी के मुखिया को बदल दिया. डीजीपी अनुराग गुप्ता की जगह एडीजी प्रिया दुबे को एसीबी की जिम्मेदारी दी गई. जिसके तीन दिनों के भीतर विनय सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया. 

 

ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर विनय सिंह को पहले क्यों नहीं गिरफ्तार किया जा सका? शराब घोटाले से जुड़े दूसरे आरोपियों विनय चौबे, विधु गुप्ता, सिद्धार्थ सिंघानिया समेत कई को तो एसीबी ने तुरंत गिरफ्तार कर लिया, लेकिन विनय सिंह को इतना मौका कैसे मिल गया कि वह अदालत से पीड़क कार्रवाई पर रोक का फैसला ले पाने में सफल रहे? क्या जो छापेमारी हुई, वह दिखावे के लिए हुई? चर्चा कई तरह की हैं. मनोज और अनुज नाम की भी चर्चा है. सरकार की एजेंसियां अपनी तरफ से उन चर्चाओं की पुष्टि में जुटी हुई है. 

 

इस बीच एक और दिलचस्प घटना हुई. विनय सिंह की गिरफ्तारी के बाद एसीबी में काम कर रहे लोगों से स्पष्टीकरण पूछ लिया गया. अचानक स्पष्टीकरण पूछे जाने को लेकर भी पुलिस विभाग में सवाल उठ रहे हैं.

 

ब्यूरोक्रेसी में इस बात की चर्चा है कि विनय सिंह को खास कारणों से संरक्षण मिल रहा था. उसे छूट दी जा रही थी. अगर विनय सिंह को लेकर एसीबी ने नरमी बरती है, तो यह जानना बेहद दिलचस्प होगा कि किन कारणों से और क्यों उन्हें छूट दी जा रही थी?

 

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