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धनबाद में जब एक सिरफिरे आशिक ने परिवार के 9 लोगों को जला डाला था

Niraj Kumar Dhanbad: धनबाद (Dhanbad) 22 अगस्त को दुमका जिले के जरुआडीह में एक सिरफिरे आशिक शाहरुख हुसैन ने एकतरफा प्यार में पड़ोस की 12वीं की छात्रा अंकिता को पेट्रोल डाल कर जला दिया. युवती की स्थिति अभी गंभीर बनी हुई है. समाज में ऐसी हरकतें बार बार होती रही हैं. धनबाद जिले में भी सनकी किस्म के कुछ युवकों ओछी व दहशत भरी हरकतों ने कई परिवारों को बर्बाद कर दिया. उनमें कुछ घटनाओं को याद कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं. केस 1

शादी के लिए निकल रहे थे, पूरे परिवार को जला डाला

धनबाद जिले के कतरास थाना से मात्र 500 गज की दूरी पर गांजा गली में 15 दिसंबर 2004 को एक सिरफिरे आशिक ने एक तरफा प्रेम में पागल होकर आरती नामक लड़की पर पेट्रोल डाल कर आग लगा दी. उस समय परिजन व रिश्तेदार शादी के लिए लिलोरी स्थान मंदिर जाने की तैयारी कर रहे थे. घर रिश्तेदारों से भरा था. सिरफिरा आशिक लक्ष्मी सिंह राजपूत पास ही मिठाई दुकान में काम करता था. उस दिन अहले सुबह वह गैलन में पेट्रोल लेकर पहुंचा और आरती पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने की कोशिश की. घर छोटा होने की वजह से पलक झपकते ही पूरा घर धधकने लगा जिसमें आरती और उसकी मां की तत्काल मृत्यु हो गई. परिजन और शादी में भाग लेने आए कुल नौ रिश्तेदारों ने अगले तीन-चार दिनों के अंदर सदर अस्पताल और केंद्रीय अस्पताल में एक-एक कर दम तोड़ दिया. पड़ोस में रहने वाले झारखंड प्रदेश कांग्रेस के युवा नेता सह राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के अशोक प्रकाश लाल बताते हैं कि वह अपनी गाड़ी से घायलों को लेकर अस्पताल पहुंचे थे. इस हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया था. घटना के पांच-छह दिन बाद इलाज के क्रम में सिरफिरे आशिक की भी मृत्यु हो गई थी. युवक के परिजनों ने उसकी लाश लेने से भी इनकार कर दिया था. केस 2

  प्रेम नहीं कबूल किया तो फेंका चेहरे पर तेजाब

वर्ष 2003 में भी एकतरफा प्रेमी तापस मित्रा, उसके दो दोस्त संजय पासवान और ब्रह्मदेव हाजरा ने रात के अंधेरे में भेलाटांड़ गांव की सोनाली मुखर्जी पर तेजाब फेंक दिया था. छत पर सोई अवस्था में सोनाली मुखर्जी चिल्लाती हुई जागी. उसका चेहरा पूरी तरह जल गया था. वर्षों तक इलाज में और दोषियों को सजा दिलाने के लिए पूरे परिवार ने काफी परेशानी झेली थी. आरोपियों को 7 साल की सजा हुई. परंतु नाबालिग होने के कारण प्रेमी तापस मित्रा 3 वर्ष के बाद जेल से छूट गया था. आर्थिक संकट से जूझते हुए सोनाली मुखर्जी ने सरकार से इच्छा मृत्यु की भी मांग की थी. इसके बाद झारखंड सरकार ने उसे नौकरी दी थी. फ़िलहाल वह बोकारो में रहती है. उसे कौन बनेगा करोड़पति से भी बुलावा आया था, जहां अमिताभ बच्चन के माध्यम से पूरे देश को उसके दर्द भरी कहानी सुनने को मिली थी.   केस तीन

   सनकी जीजा ने साली व तीन बहनों को जलाया

7  दिसम्बर 2010 को धनबाद सदर थाना क्षेत्र के झाड़ूडीह में एक सनकी आशिक जीजा ने अपनी छोटी साली के प्रेम में पत्नी, छोटी साली और उसकी बहन को जला कर मार डाला था. इसके पहले उसने कमरे में बाहर से ताला लगा दिया था. कमरे में ही तड़प-तड़प कर तीनों बहनें बड़ी बहन व प्रेमी जीजा की पत्नी उषा, मंझली साली रीमा और छोटी साली रीना ने दम तोड़ दिया था. प्रेमी जीजा का नाम सोनू कुमार था. उसकी शादी उषा से हुई थी. लेकिन वह छोटी साली रीना से एकतरफा प्रेम करता था. रीना को जब जीजा के गलत इरादों का पता चला तो उसने उससे बात करना बंद कर दिया. सोनू बहुत गुस्सा आया. वह सोनू बनारस से बिना किसी को बताए धनबाद पहुंचा. धैया स्थित पेट्रोल पंप से पांच लीटर पेट्रोल खरीदा और घटना को अंजाम दिया. लड़कियों के पिता शिव शंकर प्रसाद ने पुलिस को दिए बयान में बताया था कि सोनू रीना से शादी करना चाहता था, पूरा परिवार इसके खिलाफ था. आरोप साबित होने के बाद सोनू को उम्रकैद की सजा हो गई. वह अभी जेल में है.

          लेवल ऑफ एक्सप्रेशन और इमोशनल

         स्टेबिलिटी का परिणाम : डॉ दिगंबर

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alt="" width="169" height="300" /> डॉ दिगम्बर[/caption] बीएसएस कॉलेज में मनोविज्ञान के असिस्टेंट प्रो डॉ दिगंबर प्रसाद सिंह बताते हैं कि आज के समय में अभिभावक बच्चों को सारी सुख-सुविधा उपलब्ध कराने पर ध्यान देते हैं. लेकिन उन्हें अनावश्यक आजादी भी उपलब्ध कराते हैं. सही ढंग से उनकी देखभाल नहीं करते, जिससे बच्चे एकांतता के शिकार हो जाते हैं और दूसरे की फीलिंग को समझने में नाकामयाब रहते हैं. अकेलेपन का शिकार बच्चे एक्साइटेड मूवीज देखते हैं, जिससे उनका लेवल ऑफ एक्सप्रेशन और इमोशनल स्टेबिलिटी (भावनात्मक स्थिरता) गड़बड़ हो जाता है. इससे उनमें संवेगात्मक उत्तेजना बढ़ जाती है. जिसका परिणाम ऐसी घटनाओं को लेकर सामने आता है. ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए अभिभावकों को शुरू से ही बच्चों पर ध्यान देना चाहिए. अभिभावकों समय निकालकर बच्चों के साथ समय गुजारने और एक दूसरे की भावना को समझने का प्रयास करना चाहिए. इंटरनेट के माध्यम से बच्चे क्या शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है. यह भी पढ़ें: धनबाद">https://lagatar.in/more-than-a-hundred-autos-seized-in-dhanbad-were-running-without-license-and-route-permit/">धनबाद

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