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घोषणा कर सरकार ने नहीं दिया, तो आंगनबाड़ी केंद्रों ने चंदा कर बांटा अंडा

सरकार पूरा करे वादा
  • -अप्रैल 2019 से नहीं मिला है आंगनबाड़ी केंद्रों में अंडा, हुई राज्यव्यापी गूंज हर दिन बच्चों को मिले अंडा
  • -आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों-महिलाओं को लेकर सरकार की अन्य घोषणाएं और योजनाएं भी नहीं हुईं पूरी
Pravin Kumar/ Kaushal Anand Ranchi: झारखंड में सरकार गठन के बाद से ही राज्य सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों और सरकारी स्कूलों में बच्चों को अंडा देने की घोषणा की जाती रही है. मगर अप्रैल 2019 के बाद से अंडा वितरण का काम बंद है. सरकार ने यह घोषणा की थी कि हमारे ग्रामीण ही अंडा उत्पादन करेंगे. उसे सरकार खरीदकर आंगनबाड़ी केंद्रों और सरकारी स्कूलों में वितरित करेगी. मगर घोषणा, घोषणा ही रह गई. चार साल गुजर जाने के बाद भी यह घोषणा धरातल पर नहीं उतर सकी. इसको लेकर भोजन का अधिकार अभियान के तहत राज्य के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में सामाजिक संगठनों के लोगों ने चंदा करके बच्चों को अंडा वितरण का काम किया. मांग उठी, आंगनबाड़ी केंद्र में हर दिन अंडा देने की घोषणा झारखंड सरकार पूरा करे. अभियान 15 ज़िलों के लगभग 75 आंगनबाड़ी केंद्रों में चलाया गया. करीब 2000 बच्चों को अंडा खिलाया गया. इस स्थानीय कार्यक्रम में ग्राम प्रधान, जन प्रतिनिधि, सेविका, बच्चों के अभिभावक व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया.

राज्य में 5 वर्ष से कम के 40 प्रतिशत बच्चे कुपोषित

राज्य में बच्चों के बीच कुपोषण बड़ी समस्या है. इसको लेकर सरकार ने अंडा देने की घोषणा की थी. 2019-21 के सरकारी आंकड़ों (एनएफएचएस-5) के अनुसार राज्य के पांच वर्ष के कम उम्र के 40 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं. जिनका उम्र के अनुसार वजन कम है. राज्य की एक-चौथाई महिलाओं का बीएमआई सामान्य से कम है. विभिन्न सरकारी सर्वेक्षणों में यह भी बार-बार पाया जाता है कि राज्य के आदिवासी-दलित बच्चे अन्य समुदायों की तुलना में ज़्यादा कुपोषित हैं.

अंडा बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए जरूरी

बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए अंडा एक पौष्टिक खाद्य है. इसमें विटामिन सी के अलावा अन्य आवश्यक पोशक तत्व हैं. अंडे न केवल पौष्टिक हैं, बल्कि स्वादिष्ट और किफायती भी है. इससे न केवल पोषण के लिए फायदा है, बल्कि आंगनबाड़ी व मध्याह्न भोजन में रोज़ अंडा देने से आंगनबाड़ी व स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति भी सुधरेगी. झारखंड में कुपोषण की स्थिति केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के अधिकांश क्षेत्रों से बदतर है.

यह है देरी का कारण

जानकारी के अनुसार आंगनबाड़ी में अंडे देने के लिए निजी ठेकेदारों के लिए केंद्रीकृत ठेके की व्यवस्था की जा रही है, जिसके कारण अंडा देने में देरी हो रही. केंद्रीकृत ठेके में भ्रष्टाचार और देरी होनी ही है, जिसका सीधा प्रभाव बच्चों के कुपोषण पर पड़ रहा है. इसमें ठेकेदारी की जरूरत ही नहीं है. स्थानीय स्तर पर ही अंडा खरीद की जा सकती है. स्कूलों में मिड डे मील में सप्ताह में दो अंडे मिलते हैं. अगर स्कूलों में यह व्यवस्था चल रही है, तो आंगनबाड़ी में भी चलेगी.

आंगनबाड़ी को लेकर सरकार की यह घोषणाएं जो पूरी नहीं हुईं

-हर आंगनबाड़ी केंद्र में मेडिसिन किट होंगे, इसके लिए 1500 रुपए तक का प्रति केंद्र बजटीय प्रवाधान होगा. -आंगनबाड़ी केंद्रों को स्कूल पूर्व शिक्षा किट्स जैसे किताब-कॉपी, ड्रेस, बेंच-डेस्क आदि दिए जाएंगे. -हर आंगनबाड़ी के ताजा खाना खिलाने के लिए एलपीजी सिलिंडर करके दिए जाएंगे. सिर्फ एक बार मिला. -आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चे को अंडे और अन्य पौष्टिक आहार दिए जाएंगे, इसके लिए 6 से 36 माह के 8 रुपए प्रति बच्चा, 6 से 72 माह के बच्चे के लिए 12 रुपए, कुपोषित बच्चों के लिए 8 रुपए प्रति बच्चा प्रावधान किया जाएगा. -आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती महिलाओं और धातृ महिलाओं के लिए टेक होम राशन के लिए 8 रुपए प्रति महिला प्रावधान किया गया. मगर इन्हें केवल रेडी टू ईट योजना के तहत दलिया दी जाती है.

एक नजर में

आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या : 38,400 आंगनबाड़ी सेविका की संख्या : 38,400 आंगनबाड़ी सहायिका की संख्या : 38,400 आंगनबाड़ी में पढ़ने वाले बच्चे : 15,36,000 कितने साल के बच्चे आते हैं : 3 से 6 साल
बच्चों को आंगनबाड़ी और स्कूलों में मिड डे मील के साथ अंडा रोज नहीं देने का कोई बहाना नहीं हो सकता है. अंडा बहुत पौष्टिक है और बढ़ते बच्चों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है. स्कूल में उपस्थिति बढ़ाने में भी मददगार है, जो झारखंड में बहुत कम है. -ज्या द्रेज, सामाजिक कार्यकर्ता)
  महिला, बाल कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्री जोबा मांझी ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है कि सरकार घोषणा करके भूल गयी है. कुछ तकनीकी समस्या आई है. जिसे दूर किया जा रहा है. जल्द ही आंगनबाड़ी केंद्रों में अंंडे का वितरण किया जाएगा.  

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