Ranchi/Jamshedpur: कुछ लोग हैं जो झारखंड के पूर्व मंत्री व जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय का “फोरम हंटिंग” (Forum Hunting) करना चाहते हैं. सरयू राय अभी जदयू से विधायक हैं. इसी क्षेत्र से वह साल 2014 में भाजपा से विधायक बने थे. रघुवर दास की सरकार में मंत्री बनें. साल 2019 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़ा. जमशेदपुर पूर्वी क्षेत्र में मुख्यमंत्री रघुवर दास को पराजित किया. साल 2024 में वह जदयू की टिकट पर जमशेदपुर पश्चिम से विधायक बनें.
“फोरम हंटिंग” को लेकर सरयू राय ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया है. पोस्ट में उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिया है, लेकिन तीन इशारे जरुर किए हैं. पहला यह कि वो पराजित मानसिकता और हीन भावना के हैं. दूसरा यह कि सरयू राय पहले जिस विभाग के मंत्री थे, बाद में वह उसी विभाग का मंत्री बन गया. तीसरा यह कि उनमें शामिल लोग जमशेदपुर पूर्वी व जमशेदपुर पश्चिमी के हैं और दोनों के बीच दुरभि संधि चल रही है.
उल्लेखनीय है कि सरयू राय एक ऐसे राजनेता है, जिन्होंने जमशेदपुर पूर्व व पश्चिमी दोनों विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. झारखंड में वह खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले के अलावा संसदीय कार्य मंत्री थे. बिहार-झारखंड में सरयू राय की पहचान भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होने वाले नेताओं में से है.
“फोरम हंटिंग” क्या होता है
फोरम हंटिंग (Forum Hunting) का मतलब होता है कानूनी प्रक्रिया में अपने पसंदीदा कोर्ट, बेंच या जज या जांच एजेंसी के पास केस ले जाने की कोशिश करना. कोई व्यक्ति या वकील जानबूझकर ऐसा कोर्ट, जांच एजेंसी चुनता है जहां उसे लगता है कि परिणाम उसके पक्ष में आएगा, तो इसे फोरम हंटिंग या फोरम शॉपिंग कहते हैं. उदाहरण के तौर पर एक ही मामले को अलग-अलग हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करना. एक ही मामले की शिकायत कभी थाना, कभी कोर्ट, तो कभी दूसरी जांच एजेंसियों के यहां करना.
अपने पोस्ट में सरयू राय ने लिखा है- जमशेदपुर में पराजित मानसिकता और हीन भावना से ग्रस्त पश्चिम और पूरब के चिन्हित भ्रष्ट समूह मेरे विरूद्ध संयुक्त “फोरम हंटिंग” करने में लगे हैं. वे मिलकर झूठे आरोप गढ़ते हैं. इसे लेकर इनमें से एक थाना में एफआईआर करवाता है. इसी आरोप में दूसरा निगरानी में शिकायत करता है.
पहला फिर हाईकोर्ट जाता है, वहां दाल नहीं गली तो फिर थाना में अर्जी लगाया. कोई फायदा नहीं हुआ तो उन्हीं आरोपों को लेकर लोअर कोर्ट में शिकायतवाद डाल दिया. शिकायतवाद खारिज हो गई तो मुसाबनी के किसी सुखो मुखी से कोर्ट में केस करा दिया. वह खारिज हुआ तो जमशेदपुर पूर्वी के अपने गुट के एक नेता जी कुमार से विजिलेंस में शिकायत डलवा दिया.
इस बीच इन्हीं में से एक उसी विभाग का मंत्री बन गया, जिस विभाग का मैं (सरयू राय) मंत्री था. मंत्री के रूप में एक और फोरम खोला, खूब कोशिश किया कि इन आरोपों में मुझे गिरफ्तार करवा दे. पर विभागीय अधिकारियों ने नकार दिया. मंत्री की सिट्टी-पिटी गुम हो गई. विगत दो वर्षों से यह कवायद पूर्व और पश्चिम की दुरभि संधि से चल रही है. ये अब किसी नई फोरम की तलाश में है.
सरयू राय का यह पोस्ट घुमावदार जरूर है. लेकिन जमशेदपुर की समझ रखने वालों और राजनीतिक सत्ता के आसपास घुमने वाले इसे आसानी से समझ सकते हैं. बहुत सारे तथ्य सार्वजनिक चर्चा में हैं.