डब्ल्यूएचओ की है रिपोर्ट
गौरतलब है कि डब्ल्यूएचओ के तहत वैज्ञानिकों को जनवरी 2020 और पिछले साल के अंत तक मौत की वास्तविक संख्या का आकलन करने की जिम्मेदारी दी गई थी. इस रिपोर्ट के मुताबिक 1.33 करोड़ से लेकर 1.66 करोड़ लोगों की मौत या तो कोरोना वायरस या स्वास्थ्य सेवा पर पड़े इसके प्रभाव के कारण हुई. यह आंकड़ा देशों की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों और सांख्यिकी मॉडलिंग पर आधारित है. डब्ल्यूएचओ ने कोविड-19 से सीधे तौर पर मौत का विवरण नहीं मुहैया कराया है.भारत ने आकलन की पद्धति को लेकर सवाल उठाया
वहीं, भारत ने कोविड-19 से हुई मौतों के आकलन की पद्धति को लेकर सवाल उठाया है. भारत सरकार ने इस सप्ताह की शुरुआत में कोरोना से मौत को लेकर नए आंकड़े जारी किए हैं. इस काल में भारत में आधिकारिक मौतों का आंकड़ा 5.2 लाख मौत का है. भारत ने गुरुवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा प्रामाणिक डेटा की उपलब्धता के मद्देनजर कोरोनोवायरस महामारी से जुड़े अतिरिक्त मृत्यु अनुमानों को पेश करने के लिए गणितीय मॉडल के उपयोग पर कड़ी आपत्ति जताई है. भारत ने कहा कि इस्तेमाल किए गए मॉडलों की वैधता और मजबूती और डेटा की कार्यप्रणाली संग्रह संदिग्ध हैं.गणितीय मॉडल के उपयोग पर भारत की कड़ी आपत्ति
भारत ने कहा है कि अधिक मृत्यु दर अनुमान को पेश करने के लिए गणितीय मॉडल के उपयोग पर भारत की कड़ी आपत्ति के बावजूद डब्ल्यूएचओ ने भारत की चिंताओं को पर्याप्त रूप से संबोधित किए बिना ही अतिरिक्त मृत्यु दर अनुमान जारी किया है. डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 47 लाख लोगों की मौत कोविड या स्वास्थ्य सेवाओं पर उसके असर के कारण हुई है. नई दिल्ली के सूत्रों के अनुसार, भारत इस मुद्दे को विश्व स्वास्थ्य सभा और अन्य आवश्यक बहुपक्षीय मंचों पर उठा सकता है.सटीक संख्या का पता कभी नहीं चल सकेगा
येल स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में संक्रामक रोग विशेषज्ञ अल्बर्ट कू ने आंकड़ों को लेकर कहा कि किसी संख्या के बारे में निष्कर्ष पर पहुंचना जटिल काम है, लेकिन डब्ल्यूएचओ के ये आंकड़े यह समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है कि हमें भविष्य में इस महामारी या अन्य का मुकाबला कैसे करना चाहिए. इसके लिए किस तरह की तैयारी रखनी चाहिए. ब्रिटेन के एक्सेटर विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. भरत पंखानिया ने कहा कि खासकर गरीब देशों में कोविड-19 से हुई मौतों के बारे में सटीक संख्या का पता कभी नहीं चल सकेगा. उन्होंने कहा कि लंबी अवधि में कोविड-19 से अधिक नुकसान हो सकता है. इसे भी पढ़ें – जेडीयू">https://lagatar.in/jdu-national-general-secretary-praveen-singh-resigns/">जेडीयूके राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण सिंह ने दिया इस्तीफा [wpse_comments_template]

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