Sanjay Singh Ranchi : संथाल के एंग्री ओल्ड मैन लोबिन हेंब्रम इन दिनों गायब हैं. या यू कहें, मीडिया से गायब हैं. अपने बयानों के कारण मीडिया की सुर्खियों में रहनेवाले लोबिन पिछले कुछ दिनों से सीन से गायब हैं. झामुमो के टिकट पर बोरियो से विधायक बने लोबिन अपनी ही पार्टी व सरकार की बखिया उधेड़ते रहे. हेमंत सोरेन को कोसने से भी पीछे नहीं रहे. पार्टी नेतृत्व की खुलेआम मुखालफत करते रहे. लोकसभा चुनाव के दौरान राजमहल सीट से टिकट की चाहत रखते थे. लेकिन पार्टी की ओर से विजय हांसदा को प्रत्याशी बनाया गया, तो न सिर्फ खुल्लमखुल्ला विरोध करते रहे, बल्कि बगावत कर चुनावी समर में कूद पड़े. जमानत जब्त हुई, तो होश ठिकाने आ गये. फिर उनकी भाजपा में शामिल होने की खबरें सोशल मीडिया पर फैलती रहीं.
भाजपा में शामिल होंगे या अपनी पार्टी बनायेंगे या फिर एकला चलो रे
इस बीच कोल्हान टाइगर चंपाई सोरेन ने बगावती तेवर अपनाये, तो लगा शायद एंग्री ओल्डमैन लोबिन भी उनके साथ सुर में सुर मिलायेंगे. तीर-धनुष छोड़ कमल खिलायेंगे. लेकिन न जाने लोबिन अचानक कहां लुप्त हो गये. कमल खिलाने के चक्कर में चंपाई सोरेन जहां लगातार एक सप्ताह से सुर्खियां बटोरते रहे, वहीं लोबिन सीन से ही गायब हो गये. अब उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगायी जा रही हैं. कयास लगाया जा रहा है कि क्या लोबिन भी भाजपा में शामिल होंगे या अलग से पार्टी बनायेंगे या फिर एकला चलो रे की नीति पर काम करेंगे. बागी एंग्री ओल्डमैन को झामुमो ने दिखाया बाहर का रास्ता
राजनीतिक गलियारे में पहले चर्चा थी कि बागी कोल्हान टाइगर चंपाई के साथ ही संथाल के एंग्री ओल्डमैन लोबिन हेंब्रम भी कमल खिलायेंगे, लेकिन इस एपिसोड से भी परदा उठ गया. चंपाई कमल खिलाने लगे, लेकिन लोबिन पुराने विधानसभा परिसर स्थित सरकारी आवास में ही हैं और गुमकी साध रखी है. फिलहाल उन्होंने भाजपा में शामिल होने की संभावना से इनकार किया है. लेकिन खुलकर कुछ बोलने से कतरा रहे हैं. लेकिन झामुमो से खिसियाये हुए हैं, क्योंकि बगावत की वजह से पार्टी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया है. लोबिन ने गुरुजी के साथ मिलकर जिस पार्टी को संथाल में खड़ा करने में पूरी जवानी बिता दी और अब बुजुर्गावस्था में बगावत करने के कारण उस पार्टी ने लात मारी, तो बेचारे बिलबिला गये. कोर्ट भी गये, लेकिन बात नहीं बनी, तो फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं. लोबिन को लेकर कयासों का दौर हुआ शुरू
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो के कद्दावर नेता रहे कोल्हान टाइगर चंपाई सोरेन विधिवत तामझाम के साथ भाजपा में शामिल हो गये. लेकिन लोबिन दूर-दूर रहे. जबकि सबसे पहले लोबिन हेंब्रम ने ही चंपाई सोरेन के भाजपा में जाने के संकेत दिये थे. लेकिन अबतक वे खुद भाजपा से दूरी क्यों बनाये हुए हैं, जबकि उन्होंने खुद ही घोषणा की थी कि वे भाजपा का दामन थामेंगे. लेकिन मिलन समारोह में लोबिन के भाजपा में शामिल नहीं होने की खबर से कयासों का दौर शुरू हो गया है. आखिर किस दुविधा में फंसे हैं एंग्री ओल्ड मैन
बताया जाता है कि लोबिन हेंब्रम की तबीयत पिछले कुछ दिनों से खराब चल रही है. शायद इसी वजह से उन्होंने राजनीति से दूरी बना ली है. या यह भी हो सकता है कि लोबिन हेंब्रम उधेड़बुन और दुविधा में फंसे हों. वैसे भी संथाल का कोई भी झामुमो नेता तीर-धनुष यानी झामुमो छोड़ कर राजनीति में अबतक बहुत सफल नहीं हो सका है. हेमलाल मुर्मू जैसे कद्दावर नेता लगभग 10 साल तक भाजपा में रहे, संथाल में कमल खिलाने का प्रयास करते रहे, लेकिन हर बार हबकुनिए गिरे, तो फिर उठियो नहीं पाये. मजबूरन घर वापस होना पड़ा. स्टीफन मरांडी, साइमन मरांडी जैसे बड़े कद्दावर नेता भी झामुमो को ठेंगा दिखा भागे थे, लेकिन चल न सके, तीर-धनुष थामना पड़ा. हां, झामुमो से नाता तोड़ सुनील सोरेन कमल खिलाने गये, कमल खिलाया भी, लेकिन अब कमलवालों ने उन्हें झामुमो से तौबा कर आयीं सीता सोरेन के चक्कर में किनारे लगा दिया. इन सब दृष्टांतों की वजह से हो सकता है कि एंग्री ओल्ड मैन दुविधा में हों. एक संभावना यह भी...लोबिन के लिए हो सकता है संथाल में मिलन समारोह
राजनीति के जानकार बताते हैं कि एंग्री ओल्ड मैन लोबिन हेंब्रम को लेकर भाजपा कोई नई रणनीति के तहत काम कर रही हो. चूंकि कोल्हान व संथाल परगना में भाजपा कमजोर है, इसलिए हो सकता है कि संथाल में लोबिन के लिए भाजपा के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में ही मिलन समारोह का आयोजन किया जाये. [wpse_comments_template]
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