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कौन तैयार करता है आतंकी फसल

Anand Singh बिहार पुलिस ने पटना के फुलवारी शरीफ इलाके से पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के साथ संबंधों के आरोप में जिन दो लोगों को गिरफ्तार किय़ा, वे सामान्य अपराधी नहीं हैं. ये वे लोग हैं, जो देश में रह कर देश को तोड़ने का काम कर रहे थे. हैरत करने वाली बात यह कि झारखंड पुलिस में दारोगा रहे मोहम्मद जलालुद्दीन जैसे कानून के रक्षक भी इस देशद्रोही कार्रवाई में बराबर के भागीदार रहे. यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि इन्होंने कितनों का ब्रेन वॉश किया, कितनों को कौन सा पाठ पढ़ाया है, लेकिन जो इन लोगों ने किया है, वह देश के लिए घातक है. पता नहीं, इतने बड़े देश में और कहां-कहां आग लगाने की कोशिशें अभी भी चल रही हों. हाल के दिनों में आपने भी महसूस किया होगा कि अपने देश में धार्मिक भावनाएं भड़कायी जाने लगी हैं. यह बीते छह माह की बात कह रहा हूं. कुछ भी होता है, उसका धार्मिक एंगिल निकालने में लोग लग जाते हैं या यूं कहें कि वह एंगिल आ ही जाता है. विमर्श में अब यह आम हो चला है कि अब देश में धीरे-धीरे गंगा-जमुनी तहजीब की तिलांजलि दी जा रही है. एक दौर था, जब बनारस में मंदिर के प्रांगण में बैठ कर मशहूर शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान घंटों रियाज किया करते थे. एक दौर आज का है, जब ज्ञानवापी के मसले पर हैदराबाद के सांसद घूम-घूम कर जो न बोलना चाहिए, वह भी बोल रहे हैं. सीधे-सीधे कहें तो वह भी सांप्रदायिक बात कर रहे हैं. हिंदू-मुसलमान के बीच के संबंधों में मट्ठा डालने का काम कर रहे हैं. आप हिंदू हों या मुसलमान या फिर किसी भी अन्य धर्म के हों, आपका धर्म क्या होना चाहिए? मुझे लगता है, आपका पहला धर्म भारतीयता होनी चाहिए. अगर आप पक्के भारतीय नहीं, अगर आपके जेहन में भारत सबसे पहले नहीं तो आप जो भी हैं, आपको मुबारक. आप अच्छे भारतीय नहीं, अगर आप भारतीयता को जीते नहीं. पटना में जिन दो लोगों को पकड़ा गया है, वे देश को तोड़ने का काम कर रहे थे. मार्शल आर्ट्स के बहाने वे पुलिस और सेना से लड़ने की ट्रेनिंग दे रहे थे. संभव है, हथियार चलाने की भी ट्रेनिंग दी गई हो. यह तो आने वाले वक्त में जांच के बाद पता लग ही जाएगा. लेकिन आप ही सोचें, जिनके घरों से भारत विरोधी लिटरेचर मिले हों, जिनके मन में 2047 तक देश में इस्लाम का शासन करने की बात बाकायदा लिखित में हो, उन पर कैसे कोई यकीन कर ले? क्या वे जो कर रहे थे, वे देश के हित में था? इसी देश में ऐसे कई प्रयास किये गए. 2047 तक भारत विभाजन कराने वालों की आप पूजा करेंगे क्या? इस मिट्टी में पैदा हुए नहीं, मुट्ठी भर लोग जब गजवा-ए-हिंद की बात करते हैं तो उन्हें क्यों बख्श देना चाहिए, यह मेरी समझ में नहीं आता. आप जिस मिट्टी में पैदा हुए, पले-बढ़े, दो टके की हैसियत बनी, आप उसी को ध्वस्त करना चाहते हैं? कौन देगा इसकी इजाजत? शुक्र है अभी इन्हें गिरफ्तार किया गया . इन्हें इनका पक्ष रखने का पर्याप्त मौका मिलेगा. सऊदी और इजरायल में ये व्यवस्था नहीं है. इस्लाम मिट्टी से मोहब्बत करने को कहता है. जिस मिट्टी में आप पैदा हुए, उसी के साथ दगाबाजी कर रहे हैं. क्या यह इस्लाम की सिखलाई है? सवाल ही नहीं पैदा होता. इस्लाम की सिखलाई को सही तरीके से समझा था कलाम ने, मौलाना खुदा बख्श खां ने. इस्लाम को समझा था अशफाकउल्ला खां ने. मादरे वतन को अंग्रेजों के चंगुल से बाहर निकालना था. पकड़े गए. फांसी हुई. गिड़गिड़ाए नहीं. हंसते-हंसते फांसी के तख्ते पर चढ़ गए. सूली को चूम लिया. उन्हें पता था कि उनका रास्ता सही है. फुलवारीशरीफ वालों का रास्ता पूरी तरह गलत था. एक वर्दीवाला कैसे देश को तोड़ने का काम कर सकता है, यह समझना होगा. खास कर तब, जब वह रिटायरमेंट को इन्जॉय कर रहा हो. यह गंभीर चिंता का विषय है. मैं मानता हूं कि इस देश में एक से बढ़ कर एक लोग हैं जो इस्लाम को कायदे से समझते हैं. जिस तरीके से इस्लाम को हर जगह मुसलमान ही बदनाम कर रहे हैं, उनकी शिक्षा-दीक्षा सही तरीके से हुई ही नहीं. ये फ्रॉड और क्रिमिनल मानसिकता वाले लोग हैं, जो चंद पैसों की खातिर गजवा-ए-हिंद की बात करते हैं. ये वे लोग हैं, जो अपनी मां (मातृभूमि) को भी बेच दें. ये वे लोग हैं, जो देश में हिंदू-मुसलमानों के बीच फसाद कराने की सोचते हैं. ये इतने ज्यादा भटके हुए लोग हैं जो चाहते हैं कि किसी भी तरीके से देश में सिर्फ उनकी ही चले. ये लोकतंत्र में यकीन नहीं करते. ये मूलतः जाहिल किस्म के लोग हैं जो खुद पर भरोसा नहीं करते हुए अपने फर्जी आकाओं के कहने पर चलते हैं. किसी धर्म में यकीन करने वाले तो हो ही नहीं सकते. सच्चा मुसलमान कभी भी गजवा-ए-हिंद की बात नहीं करेगा. एक सच्चा मुसलमान कभी नहीं कहेगा कि 2047 तक भारत में इस्लाम की हुकूमत हो. लेकिन जब यह सब हो रहा है तो हमें सतर्क रहना होगा. ऐसे लोगों को पहचानना होगा. ऐसे लोगों की कुंडली खुद ही तैयार करनी होगी. फिर देश की कानून-व्यवस्था, न्यायपालिका तो है ही. (लेखक समाचार संपादक हैं)

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