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क्यों उठने लगे हैं भूमि स्वामित्व योजना के विरोध में स्वर, खूंटी में पायलट प्रोजेक्ट पूरा होने पर राज्यभर में किया जायेगा लागू

Pravin kumar Ranchi : मुंडा अंचल के खूंटी जिला को पायलट प्रोजेक्ट के तहत भूमि स्वामित्व योजना लागू करने के लिए चयन किया गया है. योजना की शुरुआत खूंटी जिला के कर्रा अंचल से किया गया है. राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव एल ख्यांगते ने नवंबर 2021 में कर्रा प्रखंड के कुदा ग्राम से स्वामित्व योजना की ऑनलाइन शुरुआत की गयी. कर्रा प्रखंड में कार्य पूरा होने के बाद जिला के अन्य अंचल में भूमि स्वामित्व योजना के तहत जमीन का डिजिटली रिकॉर्ड बनाने के लिए भूमि का ड्रोन सर्वे के माध्यम से मैपिंग और सर्वेक्षण होगा. खूंटी जिला में यह कार्य पूरा होने के बाद राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग झारखंड सरकार इसे अन्य जिलों में लागू करेगा. वहीं विभागीय अधिकारी भी मानते हैं कि जिन राज्यों में भूमि संबंधी कानून मौजूद है, जैसे कि झारखंड में सीएनटी- एसपीटी एक्ट के रहते कई कानूनी अड़चनों को दूर करना होगा. मौजूदा समय में इस योजना को लेकर खूंटी जिला में विरोध भी देखे जा रहे हैं. योजना के विरोध में अड़की, तोरपा, मुरहू, रनिया, कर्रा, तमाड़ प्रखंडों के ग्रामसभा में चर्चा होने लगी है.

राज्य सरकार और सर्वे ऑफ इंडिया के बीच हुआ है एमओयू

झारखंड में केंद्र प्रायोजित स्वामित्व योजना शुरू करने के लिए सर्वे ऑफ इंडिया से एमओयू साइन किया गया है. राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग इस दिशा में काम कर रहा है. सर्वे ऑफ इंडिया पहले चरण में ग्रामीण क्षेत्र में सर्वे करने के लिए ड्रोन सहित अन्य उपकरण उपलब्ध करा दिया है. खूंटी जिले के सभी अंचलों की घनी आबादी में ड्रोन से सर्वे का काम किया जायेगा. जमीन के कागजातों को डिजिटल किया जायेगा. इस एमओयू में स्पस्ट कहा गया है खूंटी जिला में सर्वे के नतीजे का मूल्याकांन करने के बाद राज्य के दूसरे जिलों में यह कार्य शुरू होगा.

खूंटी में योजना सफल होने के बाद दूसरे जिलों में लागू होगा

राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग झरखंड सरकार के निदेशक उमा शंकर सिंह कहते हैं कि योजना के तहत भूमि रिकॉर्ड जैसे रजिस्टर टू, खतियान को देखकर ही भूमिस्वामी कार्ड जारी किया जायेगा. खूंटी जिले में योजना सफल होने के बाद राज्य के अन्य जिलों में स्वामित्व योजना लागू की जायेगी. इसे भी पढ़ें – LAGATAR">https://lagatar.in/lagatar-impact-rims-first-year-exam-will-now-be-online/">LAGATAR

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ग्रामसभा की बैठकों में ग्रामीण कर रहे चर्चा

केंद्र प्रायोजित स्वामित्व योजना को लागू करने की दिशा में उठाये गये कदम से मुंडा अंचल में कई तरह की चर्चा हो रही है. आदिवासी नेता दयामनी बरला कहती हैं, खतियान को ऑनलाइन किये जाने का खमियाजा झारखंड का आदिवासी समाज आज भी उठा रहा है. आदिवासियों को वन अधिकार पट्टा, लैंड बैंक आदि के मामले में उलझा कर रख दिया गया है. भूमि स्वामित्व योजना आदिवासियों, खतियान धारियों को उलझाने का प्रयास सरकार द्वारा किया जा रहा है. झारखंड का अधिकांश हिस्सा पांचवीं अनुसूची क्षेत्र, CNT-SPT एक्ट और विल्किनशन रुल के अंतर्गत आता है. जिसमें जल, जंगल, जमीन पर ग्रामसभा का स्वामित्व है. ग्रामीणों की जानकारी के बिना ही ड्रोन सर्वे के माध्यम से गांव में सर्वे किया जा रहा है. सरकार इस मामले में स्टैंड साफ करे.
  • तोरपा के तुरतन तोपनो कहते हैं- सरकार इस योजना को लागू कर खूंटकटृी अधिकारों को समाप्त कर देगी. अदिवासी जमीन पर गैरकानूनी तरीके से कब्जाधारियों को भूमि का मालिक बनाया जायेगा. झारखंड सरकार को पूरे मामले में अपनी नीति स्पस्ट करनी चाहिए.
  • मुरहू के युवा राम तोपनो कहते हैं- हमें स्वामित्व कार्ड की आवश्यकता नहीं है. जल, जंगल, जमीन हमारा है. हम अपने घर के लिए स्वामित्व कार्ड सरकार से क्यों लेंगे. सरकार द्वारा स्वामित्व योजना के नाम पर आदिवासी जमीन पर गैरकानूनी रूप से कब्जाधारियों को मान्यता देने की साजिश की जा रही है. केंद्र और राज्य सरकार इसके माध्यम से सीएनटी- एसपीटी कानून को कमजोर करने का प्रयास कर रही है. इसको लेकर सरकार के प्रति जिला में आक्रोश भड़क रहा है. सरकार इस पर पुनर्विचार करे. आदिवासी जमीन पर अवैध कब्जा बैध बनाने का काम न करे.
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क्या है योजना का मकसद

योजना से देश के गांवों में लोगों को उनकी आवासीय जमीन का मालिकाना हक दिलाना है. इस योजना का मकसद संपत्ति का मालिकाना हक तय करना है. केंद्र सरकार का दावा है कि यह योजना ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बेहद मदद करेगी. अगर किसी संपत्ति पर विवाद होता है, तो सारा रिकॉर्ड डिजिटली रिकॉर्ड होने की वजह से उसका जल्द समाधान संभव होगा. 1 फरवरी 2021 को बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की थी.

आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी

इस योजना के तहत प्रॉपर्टी कार्ड के लिए आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी. जैसे-जैसे मैपिंग, सर्वे का काम पूरा होगा, सरकार खुद ही सभी लोगों को उनकी प्रॉपर्टी का कार्ड देती जायेगी. गांव का सर्वे पूरा होने के बाद प्राप्‍त डेटा को पंचायती राज मंत्रालय के ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड किया जायेगा. इसके बाद प्रॉपर्टी कार्ड बनना शुरू हो जायेगा. इसके बाद जमीन मालिकों को संपत्ति कार्ड जिला स्तर पर कैंप लगा कर सौंपें जायेंगे. इसे भी पढ़ें – सदर">https://lagatar.in/13-corona-infected-patients-admitted-in-sadar-hospital-three-recovered-and-returned-home/">सदर

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इस कार्य के लिए जिला के उपायुक्तों को दिये गये दिशानिर्देश में ड्रोन मैपिंग सर्वे कार्य पूरा करा लिया जायेगा, तब उन जमीनों पर काबिज लोगों से संपत्ति के प्रूफ मांगे जायेंगे. जिनके पास प्रूफ है, वह तुरंत इसकी फोटोकॉपी जमा कर सकते हैं, लेकिन कागजात न होने की स्थिति में भूमि पर काबिज व्यक्तियों को घरौनी नामक दस्तावेज बना कर दिया जायेगा.

जानिए स्वामित्व योजना के बारे में

गांव के ज्यादातर लोगों के पास अपनी जमीन का कोई रिकॉर्ड नहीं है. मालिकाना हक साबित करने के लिए लोगों के पास कोई कागजात भी नहीं हैं. इस योजना का मकसद ग्रामीण इलाकों की आवासीय जमीन का मालिकाना हक तय करना और उसका रिकॉर्ड बनाना है. इस योजना के जरिए ग्रामीण इलाकों में लोगों को आवासीय जमीन की संपत्ति का अधिकार मिल सकेगा. जमीन की पैमाइश के लिए ड्रोन की मदद ली जायेगी. जमीन की पैमाइश के लिए गूगल मैपिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जायेगा.

संपत्ति का पूरा ब्यौरा ऑनलाइन देख सकेंगे

ग्रामीण इलाकों में आवासीय संपत्ति का रिकॉर्ड बन जाने के बाद संपत्ति के मालिकों से टैक्स की वसूली भी की जा सकेगी. गांवों से आने वाले इस टैक्स से गांवों के इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास लिए इसस्तेमाल किया जा सकेगा. स्वामित्व योजना से सभी ग्राम समाज के काम ऑनलाइन हो जायेंगे. ऑनलाइन होने की वजह से लोग अपनी संपत्ति का पूरा ब्यौरा ऑनलाइन देख सकेंगे. ई ग्राम स्वराज पोर्टल पर जमीन का ब्यौरा दर्ज रहेगा. ई-पोर्टल लोगों को उनकी जमीन के मालिकाना हक का सर्टिफिकेट भी देगा. [wpse_comments_template]

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