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गुस्से में क्यों है युवा-एक :  11 साल, 1.45 लाख आत्महत्या

देश के युवा (जेन जी) गुस्से में हैं. हताश हैं. सरकार से नाराज हैं. सिर्फ एक आंदोलन या एक इस्तीफे से उनका गुस्सा, आक्रोश खत्म नहीं होगा. उन्हें अब पुलिस के डंडे से डर नहीं लगता. वह गुस्से में क्यों हैं? इसके कारणों को जानना जरुरी है. इसके लिए हमने एक सीरिज शुरु की है. आप भी कमेंट बॉक्स में लिख कर अन्य कारणों को गिना सकते हैं. बेरोजगार युवक अपनी कहानी लिख सकते हैं.
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जंतर मंतर पर प्रदर्शन के बाद संसद का घेराव के वक्त की एक तस्वीर.

क्या आपको पता है कि पिछले 11 सालों में भारत में 1.45 लाख युवाओं ने बेरोजगारी की वजह से आत्महत्या कर ली. यानी हर दिन दिन 36 से अधिक बेरोजगार युवक ने आत्महत्या कर ली. उन्होंने पढ़ाई की, उनके पास सर्टिफिकेट था, डिग्री थी, हाथ में हुनर था, कुछ करने का जज्बा था, सपना था, लेकिन रोजगार उपलब्ध नहीं मिला, उनके सपने बिखर गये, इसलिए जिंदगी खत्म कर ली. परिवार के सपने टूटे, मां-बाप के बुढ़ापे का सहारा छूट गया. 

 

एनसीआरबी के आंकड़े के मुताबिक साल 2014 में 9918 युवाओं ने बेरोजगारी के कारण आत्महत्या की थी. साल 2024 में यह संख्या बढ़ कर 14,855 हो गई है.  आंकड़े पर गौर करें तो पता चलता है कि साल 2014 में हर दिन 27 बेरोजगार युवकों ने आत्महत्या की थी. दस साल बाद 2024 में प्रति दिन आत्महत्या करने वाले बेरोजगारों की संख्या 40 से अधिक हो गई.

 

ऐसा क्यों हुआ? बेरोजगारी की वजह से आत्महत्या करने वाले छात्रों की संख्या क्यों बढ़ रही है. तब जबकि हमारी सरकार हमें बता रही है कि देश मजबूत हुआ है. नौकरी के अवसर बढ़े हैं. गरीबी कम हुई है. चौथी-पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था का ढ़ोल पीटा जा रहा है. विश्व गुरु का डंका बज रहा है. फिर बेरोजगार युवकों को रोजगार क्यों नहीं मिल रहा? 

 

हालात क्या हैं. देश में करीब 38 करोड़ युवा हैं. इनमें से 12 करोड़ को रोजगार चाहिए और सात करोड़ युवाओं के लिए रोजगार है ही नहीं. उनके सामने जिंदगी जीने की समस्या है. रोजी रोटी की समस्या है. परिवार पालने का संकट है.

 

यह सवाल आज के युवा के सामने मुंह बाये खड़ा है. सरकारों के पास इसका जवाब नहीं है. क्योंकि सरकार अपनी मस्ती में है. उसे अपनी ऐश की चिंता है. रोजगार कैसे बढ़े, इसके लिए कुछ भी नहीं किया जा रहा है. उल्टे सरकारी नौकरियों के अवसर कम कर दिये गए. पेपर लीक, परीक्षा रद्द के बहाने सरकारें नौकरी देने से बच रही है. सरकारों की तरफ से उन्हें मिलता है सिर्फ भाषण व घोषणाएं. 

 

वर्ष  आत्महत्या का आंकड़ा
2014  9918
2015 10912
2016  11173
2017  12241
2018  12936
2019  14019
2020  15652
2021  13714
2022  15714
2023 14234
2024  14855
कुल  1,45,368 

नोटः आंकड़े का आधार नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा जारी रिपोर्ट है.

 

देश के युवा (जेन जी) गुस्से में हैं. हताश हैं. सरकार से नाराज हैं. सिर्फ एक आंदोलन या एक इस्तीफे से उनका गुस्सा, आक्रोश खत्म नहीं होगा. उन्हें अब पुलिस के डंडे से डर नहीं लगता. वह गुस्से में क्यों हैं? इसके कारणों को जानना जरुरी है. इसके लिए हमने एक सीरिज शुरु की है. आप भी कमेंट बॉक्स में लिख कर अन्य कारणों को गिना सकते हैं. बेरोजगार युवक अपनी कहानी लिख सकते हैं.

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