सबके लिए समान नियम होना चाहिए
दरअसल स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव के रवि कुमार ने 24 मई को एक आदेश जारी किया था. कहा था कि झारखंड में चल रहे गैर मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2005 के नियमों को पालन करना अनिवार्य होगा. इस आदेश का विरोध करते हुए पासवा अध्यक्ष ने कहा कि जिन नियमों की बात सचिव के आदेश में है, वह नियम सरकारी स्कूलों पर भी लगना चाहिए. सरकारी और निजी विद्यालयों के लिए अलग अलग नियम क्यों? सबके लिए समान नियम होना चाहिए.स्व जगरनाथ महतो इस मामले को लेकर काफी गंभीर थे
पासवा अध्यक्ष ने कहा कि गांव- घर में इसी प्रकार के प्राइवेट स्कूल होते हैं, जिसमें गरीब बच्चे पढ़ते हैं. आज भी सरकारी स्कूल कोई जाना नहीं चाहता है. भाजपा की सरकार ने संशोधन कर निजी विद्यालयों के लिए कठिन शर्तें रखी थीं, जिसके कारण 5000 हजार स्कूल बंद हो गए. गठबंधन की सरकार आयी, तो इन शर्तों को निरस्त किया. इस समस्या को लेकर पासवा ने उस वक्त शिक्षा मंत्री स्व जगरनाथ महतो से मिल कर अपनी बात रखी थी. मुख्यमंत्री से भी मिले थे. उन्होंने कहा था कि यह अध्यादेश नहीं चलेगा. जगरनाथ महतो इस मामले को लेकर काफी गंभीर थे. वहीं पासवा के लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि शिक्षा सचिव का जो आदेश आया है, इसे ले कर काफी दिनों से मंथन चल रहा था. पासवा का डेलिगेशन सरकार के पास अपनी बातें रख चुका है. इसे भी पढ़ें – बरही:">https://lagatar.in/barhi-a-youth-injured-in-a-road-accident-died-during-treatment/">बरही:सड़क दुर्घटना में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत [wpse_comments_template]
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