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आखिर क्यों बना झारखंड देश के सबसे चर्चित राज्यसभा चुनाव का केंद्र?

Ranchi : राज्य सभा चुनाव-2026 में अगर किसी राज्य ने सबसे ज्यादा राजनीतिक सुर्खियां बटोरी हैं, तो वह झारखंड है. मतदान से पहले जिस तरह की राजनीतिक गतिविधियां, रणनीतिक बैठकें, आरोप-प्रत्यारोप, दावे-प्रतिदावे और क्रॉस-वोटिंग की चर्चाएं सामने आईं, उसने झारखंड को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बना दिया.
 
AI की मदद से तैयार सांकेतिक तस्वीर.

Ranchi : राज्य सभा चुनाव-2026 में अगर किसी राज्य ने सबसे ज्यादा राजनीतिक सुर्खियां बटोरी हैं, तो वह झारखंड है. मतदान से पहले जिस तरह की राजनीतिक गतिविधियां, रणनीतिक बैठकें, आरोप-प्रत्यारोप, दावे-प्रतिदावे और क्रॉस-वोटिंग की चर्चाएं सामने आईं, उसने झारखंड को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बना दिया.

 

इस चुनाव में संख्या बल के समीकरणों ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया. सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे रहे. होटल राजनीति, बंद कमरों में बैठकों और लगातार निगरानी की खबरों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया.

 

जहां महागठबंधन ने एकजुटता का प्रदर्शन किया, वहीं एनडीए खेमे में भी जीत सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक प्रयास जारी रहे. वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झारखंड का यह चुनाव केवल एक राज्यसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रबंधन, संगठनात्मक मजबूती और विधायकों की निष्ठा की भी परीक्षा बन गया.

 

हालांकि, राज्यसभा चुनाव को लेकर अन्य राज्यों में भी राजनीतिक हलचल देखने को मिली. मार्च में बिहार और ओडिशा के चुनावों में क्रॉस-वोटिंग और अनुपस्थिति ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए थे, जिसके चलते एनडीए को अपेक्षा से अधिक सफलता मिली थी. हरियाणा में भी मुकाबला काफी चर्चा में रहा और विपक्षी एकजुटता पर सवाल उठे थे.

 

लेकिन झारखंड का मामला अलग रहा. यहां सिर्फ चुनावी गणित नहीं, बल्कि संभावित क्रॉस-वोटिंग, विधायकों की निगरानी, होटल राजनीति, गठबंधन की एकजुटता और लगातार चल रही रणनीतिक बैठकों ने चुनाव को हाई-प्रोफाइल बना दिया. मतदान से पहले एनडीए ने अपने विधायकों को होटल में रखा, जबकि इंडिया गठबंधन ने मुख्यमंत्री आवास पर बैठकें कर एकजुटता का संदेश दिया.

 

यही वजह है कि बिहार, ओडिशा और अन्य राज्यों की तुलना में झारखंड का राज्यसभा चुनाव सबसे अधिक चर्चा में रहा. अब सभी की निगाहें नतीजों पर टिकी हैं. सवाल सिर्फ जीत-हार का नहीं, बल्कि इस बात का भी है कि क्या झारखंड ने इस चुनाव में देश का सबसे चर्चित राजनीतिक रणक्षेत्र होने का दर्जा हासिल कर लिया है.

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