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गुजरात में क्यों चल रहा “गांव चलो” आंदोलन, क्यों लौट रहे झारखंड, बिहार व यूपी के मजदूर

वही मजदूर जिन्हें बिहार चुनाव में ट्रेनों में भरकर वोट देने के लिए गांव लाया गया था. लेकिन अब वह लौट रहें हैं दूसरी वजहों से. यह सब तक हो रहा है जब देश का टेक्साटाइल मिनिस्टर गिरिराज सिंह हैं. गिरिराज सिंह बिहार के बेगुसराय से ही सांसद हैं. बिहारियों के हित की बात करते रहते हैं. आज कल टेक्सटाइल्स मीलों में बने सूट पहने भी देखे जाते हैं.
 

Lagatar Desk

गुजरात मॉडल. याद है ना. गुजरात के सूरत में एक आंदोलन चल रहा है. नाम है “गांव चलो”. आंदोलन में शामिल हैं झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के मजदूर. अधिकांश उत्तर प्रदेश व बिहार के. झारखंड के मिलाकर करीब 10 लाख से अधिक मजदूर. सूरत समेत अन्य जिलों के टेक्सटाइल्स मिलों में काम करने वाले. 

 

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टेक्सटाइल मिनिस्टर गिरिराज सिंह, बिहार के बेगुसराय से सांसद हैं.

 

वही मजदूर जिन्हें बिहार चुनाव में ट्रेनों में भरकर वोट देने के लिए गांव लाया गया था. लेकिन अब वह लौट रहें हैं दूसरी वजहों से. यह सब तक हो रहा है जब देश का टेक्साटाइल मिनिस्टर गिरिराज सिंह हैं. गिरिराज सिंह बिहार के बेगुसराय से ही सांसद हैं. बिहारियों के हित की बात करते रहते हैं. आज कल टेक्सटाइल्स मीलों में बने सूट पहने भी देखे जाते हैं. 

 

जो वजह है 

  • वेतन कम 
  • वेतन देर से
  • साप्ताहिक अवकाश नहीं
  • 12-14 घंटे काम
  • मालिकों का व्यवहार
  • वेतन कटौती
  • छुट्टी देने में आना-कानी

 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह आंदोलन इसी माह शुरु हुआ है. शुरुआत गुजरात के सूरत के टेक्सटाइल्स मिलों से हुआ है. एक रिपोर्ट के अनुसार आंदोलन में शामिल होने वाले और गांव लौटने के मुहिम में करीब 10 लाख मजदूर जुड़ चुके हैं. इस कारण गुजरात से झारखंड, बिहार व उत्तर प्रदेश के लिए खुलने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ देखी जा रही है.

 

मजदूरों का कहना है कि उन्हें समय पर वेतन नहीं मिलता है. जब वह छुट्टी मांगते हैं, तो वेतन रोक दिया जाता है. वेतन की रकम रखकर छुट्टी दी जाती है. हर दिन 12 घंटे से अधिक काम कराया जाता है, लेकिन सप्ताह में एक दिन की छुट्टी (साप्ताहिक अवकाश) नहीं दी जाती. अगर वह बीमार पड़ते हैं, तो उनकी सैलरी काट ली जाती है. किसी तरह की मजबूरी बताने पर काम से निकाल दिया जाता है. उनका उत्पीड़न किया जाता है और मैनेजरों का व्यवहार गाली-गलौज वाला रहता है.

 

अक अन्य रिपोर्ट मुताबिक मजदूरों के “गांव चलो आंदोलन” शुरु होने से पहले मजदूरों ने पूरे मामले की शिकायत गुजरात व सूरत के श्रम विभाग से की थी. जिसके बाद श्रम विभाग के अधिकारियों और कपड़ा मीलों के प्रबंधन के बीच बैठकें हुई. मजदूरों के हक में कई फैसले लिए गए. लेकिन प्रबंधन ने फैसलों को लागू नहीं किया. इससे मजदूरों में आक्रोश बढ़ा है.

 

दूसरी बड़ी वजह जो बतायी जा रही है, वह यह कि महंगाई तेजी से बढ़ी है. रहने, खाने-पीने, इलाज व कपड़ों का खर्च पिछले दो सालों में लगभग डेढ़ गुणा बढ़ गया है. गैस की कीमत बढ़ गई है. लेकिन टेक्सटाइल्स कंपनियां वेतन बढ़ा नहीं रही हैं. इस कारण 12-14 घंटा काम करने के बाद भी मजदूरों को घर भेजने के लिए या तो कुछ बचता नहीं है, या बहुत कम बचता है.

 

डिस्क्लेमरः इस रिपोर्ट को तैयार करने में दैनिक भास्कर, गुजरात समाचार और लोक्तेज अखबार की खबरों की मदद ली गई है.

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