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क्यों लोगों को रास नहीं आ रही जिंदगी! 3 महीने में 28 लोगों ने दे दी जान

Pramod Upadhyay Hazaribagh : हजारीबाग जिले में तीन माह के अंदर 28 लोगों ने आत्महत्या कर ली. यह आंकड़ा शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पोस्टमार्टम रजिस्टर से मिला है. आत्महत्या करनेवालों में अधिकांश युवतियां और महिलाएं हैं. उनकी संख्या करीब 50 फीसदी है. इनमें किसी ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली, तो किसी ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली. पड़ताल करने पर पता चला कि आत्महत्या करने की मुख्य वजह मानसिक तनाव है. काफी कम केस में मेंटल डिस ऑर्डर में आत्महत्या की बात सामने आयी. अधिकतर मामले घरेलू विवाद और प्रेम प्रसंग से जुड़े हुए बताए गए. एक मामले में करियर को लेकर छात्र परेशान था और उसने आत्महत्या कर ली. इसे भी पढ़ें :गिरिडीह">https://lagatar.in/giridih-my-dream-is-to-develop-singhpur-like-singapore-governor/">गिरिडीह

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घरेलू विवाद में कर ली आत्महत्या

केस-1 : करीब दो माह पहले कटकमदाग में घरेलू विवाद में महिला ने आत्महत्या कर ली. उसका अपनी सास से कहासुनी हुई थी. उसके बाद उसने जहर खाकर खुदकुशी की.

प्रेम प्रसंग में की खुदकुशी

केस-2 : 31 मार्च को ओकनी की एक नाबालिग छात्रा ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली. यह प्रेम प्रसंग से जुड़ा मामला था. वह अपने प्रेमी से मोबाइल पर बात करती थी. अभिभावक ने उसे फटकार लगाई, तो उसने जहर खा ली. ऐसा ही मामला इचाक से भी जुड़ा था. प्रेम प्रसंग में एक लड़की ने फांसी लगाकर आत्महत्या की.

करियर को लेकर था परेशान, फांसी लगा दे दी जान

केस-3 : चार मार्च को बड़कागांव रोड स्थित मार्खम कॉलेज के पास अपने आवास में दिलीप कुमार ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. वह अपने करियर को लेकर काफी परेशान था. वह आर्थिक रूप से कमजोर था और तनाव में आकर ऐसा कदम उठा लिया.

स्कूल की प्रताड़ना सह नहीं पाया

केस-4 : 17 मार्च को बरही के एक निजी स्कूल के आठवीं क्लास का छात्र प्रताड़ना की वजह से फांसी लगा ली. वह परीक्षा देने गया था और बताया जाता है कि समय से पहले उसकी कॉपी छीन ली गई. उसने घर आकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. हालांकि स्कूल प्रबंधन ने खुद पर लगे आरोप को स्वीकार नहीं किया. इसे भी पढ़ें :धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-50-seats-in-ug-semester-one-will-be-enrolled-through-chancellor-portal/">धनबाद

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मानसिक तनाव से उबरने के लिए काउंसिलिंग की जरूरत : डॉ रूपा

शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ रूपा ने कहा कि मानसिक तनाव से उबरने के लिए काउंसिलिंग की जरूरत है. आत्महत्या करना उचित कदम नहीं है. महिलाएं भावनात्मक रूप से काफी गंभीर रहती हैं. टूटने पर ऐसी कदम उठाती हैं. मानसिक तनाव के कई फैक्टर होते हैं. वह परिस्थितियों पर निर्भर करता है. शादी के बाद महिलाओं का दायित्व बोझ बढ़ जाता है. ऐसे में पुरुषों को सहयोग करने की जरूरत है. वैसे पहले वाली स्थिति अब नहीं है. पुरुष भी महिलाओं को हर क्षेत्र में सहयोग करते हैं. उसके बाद भी कई बार ऐसी परिस्थितियां बन जाती हैं, जहां लोग अपना आपा खो देते हैं. मन में पनपने वाले नकारात्मक बोध से उबरने की जरुरत है. निराशा के भाव आने पर उन्होंने कई बार लोगों को उससे उबरने की सलाह देती रही हैं. ऐसी स्थिति आने पर मनोचिकित्सक से सलाह लेना चाहिए. मेंटल डिस ऑर्डर का इलाज दवाओं से भी संभव है. [wpse_comments_template]

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