रूपेश हत्याकांड के सभी आरोपियों को मिली जमानत
कभी योगेंद्र प्रसाद भी आजूस में ही थे
दरअसल विधायक बनने से पहले श्री महतो रामगढ़ से आजसू विधायक सह मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के आप्त सचिव थे. और उस समय पूर्व विधायक योगेंद्र प्रसाद भी आजसू में ही थे. आजसू के टिकट पर योगेंद्र प्रसाद 2009 में गोमिया से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए थे. वर्ष 2014 में जब आजसू और भाजपा का गठबंधन हो गया, उस समय समझौता के कारण योगेंद्र प्रसाद को गोमिया से टिकट नहीं मिला. तब वे आजसू छोड़कर झामुमो में शामिल हो गए और विधानसभा का चुनाव लड़े और भारी मत से विजय हुए. इसके बाद योगेंद्र प्रसाद का आजसू से अदावत है. 2018 फरवरी में श्री प्रसाद की एक केस में सदस्यता चली गई, तब 2018 में ही 6 माह बाद गोमिया विधानसभा में मध्यावती चुनाव हुई. लंबोदर महतो नौकरी छोड़कर आजसू के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन योगेंद्र प्रसाद की पत्नी बबीता देवी से चुनाव हार गए. 2019 में 5 झारखंड विधानसभा के आम चुनाव में लंबोदर महतो विधायक निर्वाचित हुए. समय गुजरता गया और दूरी बढ़ती गई. क्षेत्र में दोनों ही सक्रिय हैं, लेकिन राज्य में झामुमो की सरकार है. नतीजतन योगेंद्र प्रसाद की मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ नजदीकी है. इस कारण शासन और प्रशासन में पैठ है. कहते हैं कि श्री प्रसाद को अधिकारी नजरअंदाज कर नहीं चल सकते हैं. लिहाजा पब्लिक में इस बात की चर्चा है कि अभी भी काम कराने में सक्षम हैं.सरकारी कार्यक्रम से लेकर प्रेस कांफ्रेंस तक : दोनों आग उगल रहे
अभी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम चल रहा है. विधायक प्रोटोकॉल के तहत मंच पर होते हैं, तो वहीं हर कार्यक्रम में पूर्व विधायक हेल्प डेस्क के माध्यम से मौजूद रहते हैं. सरकारी पदाधिकारी उनके लिए अलग से हेल्प डेस्क में बैठने की व्यवस्था मुहैया करा रही है, इस बात की भी चर्चा है. 17 अक्टूबर को बोकारो में सरकार आपके द्वार कार्यक्रम था. मुख्यमंत्री के मंच पर शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो भी आसीन थे. विधायक लंबोदर महतो के संबोधन के बाद जब जगरनाथ महतो माइक पकड़े तो 1932 के खतियान आधारित स्थानीय नीति पर सवाल खड़े किए जाने के मामले पर लंबोदर महतो की चुटीले अंदाज में आलोचना की. इस भाषण के वीडियो को झामुमो कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया में वायरल कर दिया. इधर पूर्व विधायक भी बिजली पानी की समस्या को लेकर सवाल खड़े करते रहते हैं. तमिलनाडु में 7 लड़कियों के फंसे होने के मामले को भी तूल दिया गया. शिक्षा मंत्री और पूर्व विधायक की टिप्पणी से आहत विधायक लंबोदर महतो ने 20 अक्टूबर को प्रेस कांफ्रेंस कर शिक्षा मंत्री और पूर्व विधायक पर जमकर बरसे. इसे भी पढ़ें–जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-on-the-eve-of-deepawali-the-sun-temple-dham-lit-up-with-the-aura-of-lamps-and-colorful-lights/">जमशेदपुर: दीपावली की पूर्व संध्या पर दीपों की आभा व रंगबिरंगी लाइट से जगमगाया सूर्य मंदिर धाम
विधायक लंबोदर महतो ने कहा, ‘उल्लू को अपनी बड़ी आंख नहीं दिखती है’
विधायक लंबोदर महतो ने कहा कि योगेंद्र प्रसाद को किसी भी तरह का संज्ञा और सर्वनाम लगाया जाए वह कम पड़ जाएगा. कहा कि पूर्व विधायक अपनी ईमानदारी की बात करते हैं तो कोयला चोरी के आरोप में उनकी सदस्यता क्यों चली गई थी. दूसरे को पाठ पढ़ाने चले हैं. ये ऐसे नेता है, जब तक आजसू पार्टी का नाम नहीं लेते, तब तक इनके पेट में दर्द होता रहता है. 2019 मे हराया हूं और 2024 में भी हराऊंगा. ऐसे नेता को बोरिया बिस्तर समेत मूरबन्दा (रामगढ़) भेजने का काम गोमिया की जनता करेगी. इतना ही मर्द है तो अपने गृह जिला रामगढ़ से चुनाव लड़कर दिखाएं. वहां चंद्र प्रकाश चौधरी से डर लगता हैं. विधायक ने पूर्व विधायक को उल्लू तक कहते हुए कहा कि उल्लू को अपनी बड़ी आंख नहीं दिखती है, दूसरे की आंख ही उसे दिखाई देता हैं. काला चश्मा लगाए रहता है, इस लिए सभी जगह अंधेरा ही अंधेरा दिखाई पड़ता है. टीटीपीएस ललपनिया में 41 प्रतिशत कमीशन का खेल होता है. पूर्व विधायक ने उक्त परियोजना में अपने संबंधियों के नाम से वेंडर कोड़ ले रखा हैं, जिससे स्थानीय संवेदकों को वहां काम नहीं मिल रहा है. इसी तरह धवैया में भी अपने संबंधियों के नाम से कई एकड़ जमीन ले रखा है. आरोपों की झड़ी लगा दी. वहीं पूर्व विधायक ने भी अपनी तरकश से तीर निकाले और दे दे मारी. इसे भी पढ़ें–रामगढ़">https://lagatar.in/ramgarh-dc-inspected-the-treasury-instructed-to-arrange-the-maintained-registers/">रामगढ़: डीसी ने कोषागार का किया निरीक्षण, संधारित पंजियों को व्यवस्थित करने का निर्देश

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