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सौर जलमीनार के निर्माण में व्यापक गड़बड़ी, कागजों पर ही हो गया मेंटेनेंस!

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Vijay kumar Ranchi : ग्रामीण इलाकों में शुद्ध और साफ पेयजल लोगों को मिल सके, इसको लेकर 14वें वित्त आयोग और 15 वें वित्त आयोग से सौर जलमीनार ग्रामीण इलाके के प्रत्येक पंचायतों में बनाए गए हैं, लेकिन इस योजना में राजधानी रांची से सटे ग्रामीण इलाकों में व्यापक अनियमितता सामने आई है. कई जगहों पर खानापूर्ति के लिए जलमीनार बनकर तैयार है, लेकिन पानी का एक बूंद भी लोगों को नसीब नहीं हो रहा है. वहीं कहीं-कहीं ना तो सिंटेक्स है और ना ही सौर पैनल, बावजूद इसके योजना का पास हो जाना सवालों के घेरे में है? इसे भी पढ़ें : रांची">https://lagatar.in/ranchi-violence-pil-hc-seeks-report-on-temple-attack-firing-on-miscreants-intelligence-department-report-also-summoned/">रांची

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32 पंचायतों में जलमीनार का यही है हाल

सौर ऊर्जा जल मीनार में हुए व्यापक गड़बड़ी को लेकर लगातार की टीम ने कांके प्रखंड के पंचायतों का मुआयना किया. 32 पंचायतों वाले कांके प्रखंड में 102 गांव है. यहां 14वें वित्त आयोग के तहत लगभग 400 सौर जलमीनार का निर्माण किया गया है, जिसमें व्यापक अनियमितता देखने को मिली. कहीं पर सोलर प्लेट और सिंटेक्स लगे हुए हैं, लेकिन पानी का एक बूंद भी ग्रामीणों को नसीब नहीं हो रहा है. क्योंकि बोरिंग के समय पानी निकला ही नहीं और मशीन लगा दिया गया. तो कहीं पर सिर्फ खानापूर्ति के लिए मीनार बनकर तैयार है, लेकिन ना तो बोरिंग के अंदर मशीन है और ना ही सिंटेक्स लगे हैं. कमोबेश कांके प्रखंड के लगभग पंचायतों में यही हाल है.

पानी की एक बूंद भी ग्रामीणों को नसीब नहीं

ग्रामीण रामदेव सोनी ने बताया कि सौर जलमीनार जब बन रहा था, तो हमलोगों काफी खुश थे. उम्मीद थी कि अब नल खोलने और बटन दबाने के साथ ही पानी मिल जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इंजीनियर, ठेकेदार और मुखिया की मिलीभगत से योजना में व्यापक अनियमितता बरती गई. उन्होंने कहा कि इससे अच्छा पहले ही था. चापाकल में हाथ मारने से कम से कम पानी आता था. मगर जब से जल मीनार लगा है, तब से पानी की एक बूंद भी लोगों को नसीब नहीं हो रही है.

3.84 लाख 691 रुपये की लागत से बना है एक जलमीनार

सौर जलमीनार में हुई गड़बड़ी को लेकर आरटीआई एक्टिविस्ट सरफराज अंसारी ने बताया कि इस योजना के तहत सिर्फ सरकारी पैसों का बंदरबांट किया गया है. एक सौर जलमीनार 3.84 लाख 691 रुपये की लागत से बना है. इसके मेंटेनेंस के लिए 64 हजार 384 रुपये पास किया गया. दुर्भाग्य कि बात है कि जैसे-तैसे जलमीनार बनाकर पैसे की तो निकासी कर ही ली गई. मेंटेनेंस के पैसे की भी बंदरबांट हो गई. कागजों में मेंटेनेंस दिखा पैसे की निकासी कर ली गई. इस संबंध में शिकायत भी की गई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.

टीम बनाकर किया जाएगा जांच बीडीओ

वहीं सौर जलमीनार में व्यापक गड़बड़ी और मेंटेनेंस के अभाव में धूल फांक रहे जनमीनार को लेकर कांके बीडीओ शीलवंत भट्ट से बात की गई। बीडीओ ने कहा कि अगर गड़बड़ी हुई है तो एक टीम तैयार कर तमाम तत्वों की जांच कराई जाएगी, ताकि लोगों को शुद्ध और स्वच्छ पानी मिल सके. इसे भी पढ़ें – शेल">https://lagatar.in/shell-company-pil-jharkhand-high-court-will-hear-on-june-23-know-what-happened-in-court-today/">शेल

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