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पलामू : पत्नी और बेटी का हत्यारोपी साक्ष्य के अभाव में बरी

Medininagar : पलामू जिला कोर्ट ने पत्नी और बेटी के हत्यारोपी रामअवतार मेहता उर्फ रामाधार मेहता को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है. अभिमन्यु कुमार की अदालत में मामले की सुनवाई हुई. अदालत में इस मामले में अभियोजन की ओर से नौ गवाहों की गवाही कराई गई, मगर अभियोजन घटना को साबित करने में असफल रहा. बचाव पक्ष की ओर से एलएडीसी के चीफ अमिताभ चन्द सिंह व डिप्टी चीफ संतोष कुमार पांडेय ने बहस की. दोनों ने रामअवतार मेहता को निर्दोष बताया और कोर्ट से बरी करने की मांग की. कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद साक्ष्य के अभाव में रामअवतार मेहता को बरी कर दिया. बता दें कि रामाधार मेहता 6 जून 2016 से जेल में बंद था. फिलवक्त वह बोकारो के चास जेल में बंद था. इसे भी पढ़ें : बेंगलुरु">https://lagatar.in/ed-raids-3-locations-of-byjus-in-bengaluru-seizes-digital-data/">बेंगलुरु

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क्या है पूरा मामला

इस मामले में औरंगाबाद जिला के माली थाना के सिमरा निवासी राजेंद्र मेहता ने रामअवतार मेहता के विरुद्ध हरिहरगंज थाना में 4 जून 2012 को नामजद प्राथमिकी दर्ज करायी थी. उसपर आरोप था कि रामअवतार मेहता ने अपनी पत्नी सुशीला देवी और बेटी की हत्या कर साक्ष्य छुपाने के नीयत से नदी के किनारे फेंक दिया था. रामअवतार मेहता पर आरोप था कि वह बेटा नहीं होने के कारण सुशीला देवी को हमेशा प्रताड़ित करते रहता था. 3 जून 2012 की शाम में वह अपनी पत्नी सुशीला देवी और बेटी बेबी कुमारी को अपने पुराने घर लेकर आया और दोनों की टांगी से हत्या कर बटेर नदी के किनारे लाश फेंक दिया था. घटनास्थल पर उसका चप्पल व गमछा पाया गया था. घटना के बाद रामअवतार मेहता घर से भाग गया था. अदालत में इस मामले में अभियोजन की ओर से नौ गवाहों की गवाही कराई गई. मगर अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर पाया. इसके बाद कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में उसे बरी कर दिया. इसे भी पढ़ें : बाहुबली">https://lagatar.in/bahubali-mukhtar-ansari-sentenced-to-10-years-fined-5-lakhs/">बाहुबली

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