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बैठा कर देंगे 22 लाख

 
  •  26 उप समाहर्ताओं को लगभग तीन माह बाद भी नहीं मिली पोस्टिंग
  • विभाग के सचिव अमिताभ कौशल और मुख्य सचिव सुखदेव सिंह से लगा चुके हैं गुहार
Pravin Kumar Ranchi : झारखंड लोक सेवा आयोग (छठी जेपीएससी) के तहत चयनित 26 उपसमाहर्ताओं को लगभग तीन माह बाद भी पोस्टिंग नहीं दी गई है. ये सभी उप समाहर्ता कार्मिक विभाग की ओर से भू राजस्व विभाग की सेवा के लिए भेजे गए हैं. इनकी सेवा भू-राजस्व विभाग को फरवरी में ही भेज दी गई थी. ये सभी अधिकारी फिलहाल वेटिंग फॉर पोस्टिंग में रखे गए हैं. इन 26 अधिकारियों को अंचलाधिकारी के रूप में प्रखंडों में तैनात किया जाना था. इन अधिकारियों को फिलहाल वेतन नहीं दिया जा रहा है लेकिन जैसे ही इन्हें पदस्थापित किया जाएगा, इन्हें फरवरी 2023 से लेकर पदस्थापन की तिथि तक का वेतन एरियर के तौर पर दिया जाएगा. एक अफसर का वेतन लगभग 85 हजार रुपये है. ऐसे में 26 अधिकारियों का कुल वेतन प्रतिमाह लगभग 22 लाख रुपये से भी अधिक बनता है. पदस्थापन के बाद इन्हें एरियर के तौर पर यही राशि दी जाएगी. यानि सरकार इन अधिकारियों को बिना काम किए ही वेतन के रूप में लाखों रुपये देगी. यह राशि जनता से वसूली गई कर की ही राशि है. सीधे शब्दों में कहें तो एक तरह से यह जनता के धन की बर्बादी है. वहीं, नव चयनित अफसर भी पोस्टिंग न मिलने से परेशान हैं. वे विभाग के सचिव अमिताभ कौशल और प्रदेश के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह से भी पदस्थापन की गुहार लगा चुके हैं लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है. सचिवालय के एक अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि मामले की फाइल सरकार के पास लंबित पड़ी है. पोस्टिंग के लिए सरकार के पास तीन बार फाइलें भेजी गई हैं मगर हर बार फाइल लौटा दी जाती है. ऐसा क्यों हो रहा है, यह बताने वाला कोई नहीं है. बता दें कि उक्त अधिकारियों की ज्वाइनिंग जुलाई 2020 में हुई थी. इसके बाद उक्त अधिकारियों ने संस्थागत एवं फील्ड प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया है.

15 दिन में पदस्थापन देना है अनिवार्य

झारखंड सरकार के वित्त विभाग की ओर से जारी संकल्प संख्या 15/एस03 (से.वि.) 01/2014.. 1337 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वित्त विभागीय पत्र संख्या 3622/वि. दिनांक 17.6.1998 में कहा गया है कि बिना कोई काम या सेवा लिए वेतन आदि के मद में भुगतान करना गंभीर वित्तीय अनियमितता है. इस पर पूर्णत: पाबंदी लगाना अत्यंत आवश्यक है. किसी भी कीमत पर यह अवधि 15 दिनों से अधिक नहीं होनी चाहिए. इससे अधिक होने की स्थिति में जिम्मेवारी निर्धारण कर दोषी व्यक्ति के वेतन से भुगतान राशि काटी जानी है.

प्रमोशन के बाद पदस्थापन का इंतजार कर रहे 190 अफसर

राज्य प्रशासनिक सेवा के करीब 190 अधिकारियों को लगभग डेढ़ साल पहले प्रमोशन दिया गया था लेकिन इन्हें अब तक प्रोन्नति वाले पद पर पदस्थापित नहीं किया गया है. कई जिलों में स्थिति यह है कि इन अधिकारियों को सीनियर होने के बावजूद जूनियर अधिकारी के मातहत सेवाएं देनी पड़ रही हैं. किसी भी राज्य में प्रशासनिक सिस्टम का प्रमुख मुख्य सचिव होते हैं.

ये अफसर वेटिंग फॉर पोस्टिंग में हैं

सारस जैन, धर्मेंद्र कुमार दूबे, संतोष कुमार, शिवपूजन तिवारी, मनोज कुमार मिश्र, राजकुमार सिंह, किशोर यादव, नीलम कुमारी, नित्यानंद दास, घनश्याम कुमार, अनिल रविदास, प्रमोद कुमार, अविनाश कुजूर, कुमारी शीला उरांव, गिरेंद्र टुटी, दीपक मिंज, सुषमा सोरेन, चंचला कुमारी, अमित किस्कू, अविनाश रंजन, नवीन चंद्र झा, नईमुद्दीन अंसारी, अमर कुमार, अबीश्वर मुर्मू, हलधर कुमार सेठी, राजेंद्र कुमार दास. [wpse_comments_template]
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