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भागेंगे नहीं, यहीं रहेंगे, अब संघर्ष होगा: प्रशांत किशोर

Lagatar Desk :   बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम आने के चार दिन बाद जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने  मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस की. उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों से हम लोगों को सलाह दे रहे थे, अब सरकार से संघर्ष होगा. उन्होंने एक नंबर जारी करते हुए कहा कि सरकार ने अगले छह माह में दो-दो लाख रुपये देने का वायदा कर जीत दर्ज की है, जिन्हें पैसा नहीं मिलता है, वह हमें बतायें. हम इस मांग को लेकर उनके साथ संघर्ष करेंगे. 

 


उन्होंने आगे कहा कि हम व्यवस्था परिवर्तन के संकल्प के साथ आये थे. प्रयास किया. सफलता बिल्कुल  नहीं मिली.  लेकिन बिहार की राजनीति को बदलने में कुछ भूमिका जरूर बनी है हमारी. हमारे प्रयास में जरूर कमी रही है, इसलिए जनता ने नहीं चुना. इसके लिए हम जिम्मेदारी लेते हैं. यह जिम्मेदारी लेते हैं कि हम बिहार की जनता को समझा नहीं सके. उनका विश्वास नहीं जीत सके. हम चिंतन कर रहे हैं और आगे भी करेंगे.

 

प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि जो जीत कर आयेंगे, उन्हें बधाई. नीतीश जी और भाजपा के लोगों पर जिम्मेदारी है कि बिहार की तरक्की करें, भ्रष्टाचार को खत्म करें, पलायन ना हो, रोजगार मिले. हमलोगों ने जो सपना देखा था, वह बिहार में नई व्यवस्था बनाने के लिए था. लोगों को नहीं समझा सका. जो नहीं हो सका. हम उस पर खरे नहीं उतर सके. हम प्रायश्चित करेंगे. हम गांधी आश्रम में एक दिन का मौन उपवास रखेंगे. जन सुराज के तमाम नेता व कार्यकर्ता भी अगर जिम्मेदारी मानते हैं तो उपवास करें.

 

प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि गलती हम लोगों से हुई होगी. लेकिन हमने कोई गुनाह नहीं किया. हमें वोट नहीं मिला, यह गुनाह नहीं है. यह मैं सिर उठा करके कह सकता हूं. बिहार में तीस-पैतीस साल से जाति की राजनीति हुई है. हमलोगों ने यह नहीं किया. ना धर्म के आधार पर काम किया और ना ही पैसा देकर वोट खरीदा. जिन्होंने यह सब किया है, उन्हें इसका हिसाब भविष्य में देना होगा.

 

हम धर्म युद्ध की बात करते हैं. पांडवों के साथ भगवान कृष्ण थे, फिर भी अभिमन्यू को घेरकर मार दिया गया. लेकिन बाद में ऐसा करने वाले नष्ट हो गये. उसी तरह जीत जन सुराज की ही होगी. किसी को यह लगता है कि मैं बिहार छोड़ दूंगा, तो वह जान लें, हम नहीं भागेंगे. बिहार को सुधारने की जो जिद है, उसे पूरी ईमानदारी के साथ लड़ेंगे. पीछे हटने का सवाल नहीं है. अपने संकल्प को पूरा जरूर करेंगे.


चुनाव परिणामों का बहुत विश्लेषण हो रहा है. कोई पैसा, तो कोई लालू के डर तो कुछ जातियों की बात कर रहे हैं. हम इसके लिए नहीं आये हैं. पर एक बात स्पष्ट है कि पहली बार यह हुआ है कि सरकार ने चालीस हजार करोड़ रुपये जनता को देने का काम किया है. इसी कारण एनडीए को बहुमत मिला. सिर्फ 10 हजार रुपये देने की वजह से वोट नहीं मिला, सिर्फ इतने रुपये के लिए बिहार के लोग वोट नहीं बेच सकते. हर विधानसभा क्षेत्र में 60-62 हजार लोगों को 10 हजार रुपया दिया और वादा किया गया कि यह दो लाख ही पहली किस्त है.

 

उन्हें भरोसा दिया गया कि अगले छह माह में दो लाख रुपया मिलेगा. सरकारी अफसरों, जीविका दीदी, सहायिका को इस बारे में समझाया गया. उन्हें अलग से पैसा दिया गया है. कपड़े के नाम पर, रोजगार के नाम पर रुपये बांटे गये हैं. लेकिन हम यह भी मानते हैं कि सिर्फ इसकी वजह से मैं चुनाव नहीं हारा.

 

अब सरकार से यही मांग है कि जिन 1.50 करोड़ महिलाओं को 10-10 हजार रुपया दिया गया है, उन्हें अगले छह माह के भीतर दो-दो लाख रुपया दें. अगर नहीं देते हैं, तो माना जायेगा कि योजना के तहत नहीं बल्कि वोट खरीदने के लिए पैसे दिये गये. 

 

हम अब भी इस बात पर कायम है कि नीतीश कुमार को 25 सीटें ही आएंगी. अगर ऐसा नहीं है, तो सरकार सबको दो-दो लाख रुपया दे दे. हम राजनीति से संन्यास ले लेंगे. मैं मान लूंगा कि हमारे आकलन में गलती थी. अगर बिहार से बेरोजगारी, गरीबी दूर हो जाये तो हमें राजनीति करने की जरुरत ही नहीं है.

 

हमने सरकार के भ्रष्टाचार को लेकर कई खुलासे किये. नीतीश कुमार पर कभी आरोप नहीं लगाया. नीतीश कुमार बीमार लग रहे थे, अब स्वस्थ लग रहे हैं. अब हमारी अपेक्षा है कि वह ऐसा मंत्रिमंडल बनाये, जिसमें भ्रष्टाचारी-लुटेरा ना हो. एनडीए को सत्ता में आने के लिए वोट मिला है, लूटने के लिए नहीं.

 

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