ChandiGarh : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने के ऐलान के बाद पंजाब में नयी सियासी हलचल शुरू हो गयी है. लोगों की नजरें इस बात पर टिक गयी है कि क्या फिर से अकाली दल और भाजपा का गठबंधन होगा? बता दें कि पहले केंद्र सरकार में हरसिमरत बादल(अकाली दल) ने मंत्री पद छोड़ा, फिर सुखबीर बादल ने 24 साल चला रिश्ता तोड़ दिया. कृषि कानून वापस लिये जाने स यह वजह खत्म हो चुकी है. इसे भी पढ़ें : दिल्ली">https://lagatar.in/when-will-farmers-vacate-delhi-border-united-kisan-morcha-meeting-tomorrow-decision-will-be-taken/">दिल्ली
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अमरिंदर भाजपा के साथ सीट शेयरिंग की घोषणा कर चुके हैं
बदलते सियासी घटनाक्रम के बीच नयी सियासी चर्चा यह भी है कि क्या कैप्टन अमरिंदर सिंह भी साथ में जुड़ेंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि अमरिंदर खुले तौर पर भाजपा के साथ सीट शेयरिंग की घोषणा कर चुके हैं. जान लें कि उन्होंने कृषि कानून रद्द होने की घोषणा होते ही कहा कि भाजपा से पंजाब में विधानसभा चुनाव के लिए हर हाल में गठजोड़ होगा. माना जा रहा है कि अगर अकाली दल और भाजपा जुड़ते हैं तो फिर कैप्टन भी इस गठजोड़ में शामिल हो सकते हैं. पंजाब के सियासी हालात को लेकर जानकारों का कहना है कि अकाली दल, भाजपा और कैप्टन अमरिंदर सिंह एक-दूसरे की सियासी जरूरत हैं. अकाली दल सिखों की पंथक पार्टी मानी जाती है. ऐसे में हिंदू वोट बैंक में उनको मुश्किल होती है. उनके पास कोई बड़ा हिंदू चेहरा भी नहीं है. भाजपा की शहरी और खासकर हिंदू वोट बैंक में अच्छी पकड़ है, लेकिन सिख और खासकर ग्रामीण इलाकों में भाजपा की पैठ नहीं है. इसे भी पढ़ें : कृषि">https://lagatar.in/kangana-unhappy-on-the-return-of-agricultural-laws-said-the-decision-is-unfair-sad-shameful-and-utterly-wrong/">कृषिकानूनों की वापसी पर कंगना नाखुश, कहा, फैसला अनुचित, दुखद, शर्मनाक और सरासर गलत
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