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समाज में बदलाव की बाहक बन रही है महिलाएं : अमिताभ चन्द सिंह

महिलाओं को कानून में इतना अधिकार दिए गए हैं कि किसी की जिंदगी खराब कर सकती हैं : डिप्टी चीफ Palamu : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर हुसैनाबाद ब्लॉक परिसर में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के द्वारा विधिक जागरुकता शिविर का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन एलएडीसी के चीफ अमिताभ चन्द सिंह, डिप्टी चीफ संतोष कुमार पांडेय, बीडीओ रतन कुमार सिंह, उत्तम कुमार, पुष्कर राज, वीर विक्रम सिंह, नीतू सिंह संयुक्त रूप से किया. इस मौके पर एलएडीसी के चीफ अमिताभ चन्द सिंह ने कहा कि महिलाएं अब बदलाव की बाहक बन रही है. आधी आबादी को नजरअंदाज कर कोई भी समाज आगे नहीं बढ़ सकता है. उन्होंने महिलाओं को डालसा से मिलने वाले मुफ्त कानूनी अधिकार के अलावे संपत्ति का अधिकार, दहेज उत्पीड़न के खिलाफ अधिकार, मातृत्व संबंधी लाभ का अधिकार, घरेलू हिंसा के खिलाफ अधिकार के बारे में विस्तार से चर्चा की. इसे भी पढ़ें : लालू">https://lagatar.in/nitish-broke-silence-on-ed-cbi-raid-on-lalu-family-said-if-we-come-together-again-then-investigation-started/">लालू

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इस मौके पर लिगल एंड डिफेंस काउंसिल के डिप्टी चीफ संतोष कुमार पांडेय ने कहा कि आज की महिलाओं को कानून में इतना अधिकार है कि पुरुषों का जिंदगी खराब कर सकती है. परंतु महिलाएं लोक लाज व गरीबी के कारण अत्याचार सहते रहती है. यही वजह है कि बलात्कार, शोषण, मारपीट, घरेलू हिंसा, बाल-विवाह, दहेज प्रताड़ना जैसी कुरीतियां लंबे समय से चली आ रही है. हालांकि इन सबके निवारण के लिए बहुत सारे कानून बनाकर दूर करने का प्रयास किए जा रहे हैं. परंतु जागरुकता से ही और महिला साक्षरता से ही इन कुरीतियों पर लगाम लगाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि महिलाएं उपभोग की वस्तु नहीं, बल्कि समाज के लिए उपयोगी है. उन्होंने कहा कि अज्ञानता के कारण ही महिलाएं मानसिक और शारीरिक शोषण का शिकार होती है. महिला उत्पीड़न सुरक्षा और शिकायत के लिए विशाखा गाइडलाइन की जानकारी सभी कामकाजी महिलाओं को होना जरूरी है. उन्होंने कहा कि मातृत्व लाभ कामकाजी महिलाओं के लिए सिर्फ सुविधा ही नहीं है, बल्कि यह उनका अधिकार भी है. मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत एक नई मां के लिए प्रसव के बाद मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह तक कर दिया गया है. इस अवधि में महिला के वेतन में कोई कटौती नहीं की जा सकती और वह फिर से काम शुरू कर सकती है. इस मौक पर बीडीओ रतन कुमार सिंह ने कहा कि अब महिलाएं अपनी शक्ति, सुरक्षा और सशक्तिकरण को विकसित कर रही है. महिलाएं भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो गई है. घर और समाज की बेहतरी के लिए पुरुष व महिलाएं दोनों समान रूप से योगदान दे रहे हैं. इस मौके पर उत्तम कुमार ने कहा कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में महिला मजबूती से खड़ी है. तथा आत्मबल बढ़ा है. उन्होंने कहा कि महिलाएं आत्मविश्वास एवं स्वावलंबन से अपनी सभी जिम्मेदारी निभा रही है. उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षा में बढ़ावा, उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहन, खेल एवं कैरियर के क्षेत्र में नए अवसर सहित निराश्रित महिलाओं के भरण-पोषण के लिए सरकार के द्वारा कई योजनाएं संचालित की जा रही है. नीतू सिंह ने कहा कि महिलाओं में अपार क्षमता छिपी हुई है. इस क्षमता को चिन्हित कर महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए रचनात्मक कार्य करने होंगे. उन्होंने कहा कि यह दुःखद है कि बड़ी संख्या में पुरुष व महिलाएं अभी भी लिंग आधारित हिंसा को समान मानते हैं. उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा हिंसा की शिकार महिलाएं होती है. कन्या भ्रूण हत्या, बाल विवाह, दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा, बलात्कार, जबरन शादी, लैंगिग प्रताड़ना, शिक्षा से वंचित रखना, जेंडर आधारित भेदभाव किया जाता है. इस मौके पर वीर विक्रम सिंह ने भी दहेज हत्या, एसिड अटैक, पीएनडीटी आदि के बारे में तथा महिलाओं से जुड़े कानून पर विचार रखा. मौके पीएलभी भोलानाथ शर्मा, जयंती देवी, उषा देवी, शारदा कुमारी, प्रमिला देवी, रामावती देवी, गीता देवी, सुषमा देवी, सुनीता देवी, अनीता देवी, मंजू देवी, उषा देवी, बेबी देवी, पूनम कुमारी सिंह, गोविंदा देवी शांति देवी, सुमन देवी, सावित्री देवी, गायत्री देवी, फरजाना खातून, शमा परवीन, इंदु देवी, चंद्रावती देवी समेत सैकडों लोग उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें : जमीन">https://lagatar.in/land-for-job-case-cbi-summons-tejashwi-yadav-asked-to-appear-today/">जमीन

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