Jayanti Ranchi: राजधानी रांची में बड़ी संख्या में मिस्त्री, लेबर और रेजा पहुंचते हैं. ये प्रायः सभी प्रमुख चौक-चौराहों पर खड़े नजर आते हैं. कांटाटोली, लालपुर, बिरसा चौक, पिस्का मोड़, हरमू चौक समेत कई स्थानों पर कुल्हाड़ी और पट्टा लिए मिस्त्री लेबर दिख जाते हैं. ज्यादातर लोग तो ऐसे हैं जो 50 से 100 रुपये भाड़ा खर्च कर रांची पहुंचते हैं. काम मिला तो ठीक नहीं तो सुबह 11 बजे तक वे वापस लौट जाते हैं. ऐसा उनकी दर दिन की दिनचर्या है. बात करने पर श्रमिकों ने बताया कि गांव में काम का दाम नहीं मिलता. ठेकेदार महीनों काम करा पैसे नहीं देता. ऐसे में रांची आना उनकी मजबूरी है. यहां काम मिल जाये तो दिनभर काम के बाद शाम को पैसे मिल जाते हैं. इससे उनका गुजर-बसर हो जाता है. इसे पढ़ें- शाम">https://lagatar.in/evening-news-diary-20-sept-2023-jharkhand-news-updates/">शाम
की न्यूज डायरी।।20 SEPT।।कुड़मी आंदोलनः लाठीचार्ज के विरोध में पथराव।।91 इनामी नक्सलियों का होगा खात्मा।।हत्यारोपी कस्टडी से फरार, 6 सस्पेंड।।सीबीआई कोर्ट में पेश हुए लालू।।महिला आरक्षण बिल पर महाबहस।।समेत कई खबरें और वीडियो।।
का हालः जूनियर बन गए एसपी, सीनियर कर रहे डीएसपी के पद पर काम रेजा का काम करने आयी विमला देवी का कहना है कि सुबह घर का सारा काम करने के बाद 7 बजे रांची निकल जाती हूं. रांची में एक दिहाड़ी रेजा को प्रतिदिन का दर 400 रुपये दिया जाता है. गांव में सरकार रोजगार तो देती हैं पर प्रतिदिन का दर बहुत कम है. गांव में 130 रुपये दर हैं. जिससे गुजर बसर नहीं हो सकता. इस महंगाई में 130 रुपये में राशन लेना असंभव है. [wpse_comments_template]
की न्यूज डायरी।।20 SEPT।।कुड़मी आंदोलनः लाठीचार्ज के विरोध में पथराव।।91 इनामी नक्सलियों का होगा खात्मा।।हत्यारोपी कस्टडी से फरार, 6 सस्पेंड।।सीबीआई कोर्ट में पेश हुए लालू।।महिला आरक्षण बिल पर महाबहस।।समेत कई खबरें और वीडियो।।
बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचती हैं रेजा का काम करने
वहीं बात करें महिला मजदूरों की, रांची के विभिन्न प्रमुख चौक चौराहों पर बड़ी संख्या में रेजा भी पहुंचती हैं. ढलाई समेत अन्य जरूरी कामों के लिए लोग इन्हें अपने साथ ले जाते हैं. जोंहा से आए ललित उरांव पेशे से राजमिस्त्री हैं, वो बताते हैं कि सुबह 6 बजे ही घर से निकल जाते हैं और 8:30 तक रांची पहुंच जाते हैं. यहां 10 से 11 बजे तक काम मिला तो ठीक नहीं तो खाली हाथ वापस लौटना पड़ता हैं. उनसे पूछा गया कि गांव में रोजगार है, फिर इतनी दूर क्यों आते हैं, उन्होंने जवाब दिया कि गांव में राजमिस्त्री को 550 रुपये दिया जाता है. इतनी महंगाई में 550 में क्या होगा. ठेकेदारों द्वारा भी 1 से 2 महीने का पैसा रोका जाता हैं. इसलिए हर दिन निकल पड़ते हैं काम की तलाश में. इसे भी पढ़ें- एसीबी">https://lagatar.in/condition-of-acb-junior-became-sp-senior-is-working-on-the-post-of-dsp/">एसीबीका हालः जूनियर बन गए एसपी, सीनियर कर रहे डीएसपी के पद पर काम रेजा का काम करने आयी विमला देवी का कहना है कि सुबह घर का सारा काम करने के बाद 7 बजे रांची निकल जाती हूं. रांची में एक दिहाड़ी रेजा को प्रतिदिन का दर 400 रुपये दिया जाता है. गांव में सरकार रोजगार तो देती हैं पर प्रतिदिन का दर बहुत कम है. गांव में 130 रुपये दर हैं. जिससे गुजर बसर नहीं हो सकता. इस महंगाई में 130 रुपये में राशन लेना असंभव है. [wpse_comments_template]
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