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मनरेगा को खत्म करने की मोदी सरकार की साजिश और जन विरोधी नीतियों के खिलाफ मजदूरों ने बिगुल फूंका

Ranchi : राज्य के विभिन्न जिलों से खासकर 5वीं अनुसूची जिलों से सैकड़ों मनरेगा मजदूर, पारंपरिक ग्राम प्रधान, पंचायत जनप्रतिनिधि व मज़दूर संगठन से जुड़े लोग राजभवन के समक्ष झारखंड नरेगा वॉच के बैनर तले आयोजित एक दिवसीय धरने में शामिल हुए. धरने में शामिल सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आयुक्त के सलाहकार बलराम ने कहा कि हम राजभवन के समक्ष धरना देकर मांग कर रहे हैं कि राज्यपाल इस मामले में हस्तक्षेप करें.                                                             ">https://lagatar.in/jharkhand-news/">

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77% लोगों को पता ही नहीं था कि उनका जॉबकार्ड रद्द किया गया है

वक्ताओं ने कहा कि 23 फ़रवरी 2023 से 2 मई 2023 के बीच राज्य में 2.23 लाख जॉबकार्ड डिलीट किये गये हैं . केवल 51,783 नये कार्ड बने हैं. यह स्पष्ट हो गया है कि आधार से नहीं जुड़े / ABPS न हुए कार्ड को डिलीट किया जा रहा है. नरेगा वॉच द्वारा किये गये 237 ऐसे परिवारों के सर्वेक्षण से पता चला कि उनमें से 77% को तो पता ही नहीं था कि उनका जॉबकार्ड रद्द किया गया है. लोहरदगा से आयी साबित एक्का ने कहा कि कार्ड रद्द करने के कारणों में कहा गया कि मज़दूर काम करने के इच्छुक नहीं है, जबकि गांवों में मजदूर काम के इंतजार में बैठे हैं.

हेमंत सोरेन सरकार भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है

नरेगा वॉच के राज्य संयोजक जेम्स हेरेंज ने कहा कि यह दुःख की बात है कि राज्य की हेमंत सोरेन सरकार भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है, इस कारण मजदूरों, दलितों, आदिवासियों एवं कमजोर वर्गों का सरकार के उदासीन रवैये से मोह भंग होना लाजिमी है . कहा कि 2019 लोकसभा चुनाव के पहले वर्तमान सत्तारूढ़ दले बढ़चढ़ कर मनरेगा मज़दूरों के अधिकारों की बात करता था, लेकिन अब चुप्पी साधे हुए है. जेम्स हेरेंज ने कहा कि अभी मज़दूरों को काम की जरूरत है, लेकिन राज्य के कई गावों में कई माह से एक भी कच्ची योजना का कार्यान्वयन नहीं किया जा रहा है.

केन्द्रीय बजट में सिर्फ 60 हजार करोड़ रुपये आवंटित किये गये

नरेगा वॉच के लातेहार के मनोज भुइयां ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2023 - 24 के लिए केन्द्रीय बजट में सिर्फ 60 हजार करोड़ रुपये आवंटित किये गये. इसने मनरेगा मजदूरों, दलितों, आदिवासियों के अधिकारों सहित ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर चोट की है . यह पिछले साल की तुलना में 33% कम है. इस साल ऑनलाइन मोबाइल हाजिरी प्रणाली (NMMS) और आधार आधारित भुगतान प्रणाली (ABPS) को अनिवार्य कर दिया गया है. इन दोनों तकनीक के कारण बड़े पैमाने पर मज़दूर काम व अपने मज़दूरी से वंचित हो रहे हैं.

NMMS के कारण मज़दूरों की परेशानियां और बढ़ गयी है.

अरकोसा पंचायत, लोहरदगा से आयी मनरेगा मेट शीला कुमारी ने बताया कि NMMS के कारण मज़दूरों की परेशानियां और बढ़ गयी है. अब काम ख़तम होने के बाद भी फोटो के लिए मज़दूरों को सुबह और दोपहर में कार्यस्थल पर रहना पड़ता है. NMMS में विभिन्न तकनीकि समस्याओं व नेटवर्क की अनुपलब्धता के कारण कई बार न हाजिरी चढ़ पाती है और न फोटो. इस कारण मज़दूरों द्वारा की गयी मेहनत पानी में चली जाती है. और वे अपनी मज़दूरी से वंचित हो जाते हैं. पश्चिमी सिंहभूम के संदीप प्रधान ने मज़दूरों की समस्याओं को साझा करते हुए कहा कि एक ओर मोदी सरकार आधार से हो रहे फायदा के फर्जी प्रचार में व्यस्त है और दूसरी ओर ABPS के कारण मज़दूर अपने काम व मज़दूरी से वंचित हो रहे हैं. अगर मस्टर रोल में कुल मज़दूरों में से केवल एक भी ABPS लिंक्ड नहीं है, तो सभी मज़दूरों का भुगतान रोक दिया जा रहा है. राज्य के लगभग 1 करोड़ मज़दूरों में केवल आधे ही ABPS लिंक्ड हैं.

धरने के बाद राज्यपाल को सौंपा गया मांग पत्र

-ऑनलाइन मोबाइल हाजिरी व्यवस्था व आधार आधारित भुगतान प्रणाली तुरंत रद्द की जाये. -मनरेगा बजट को बजट बढ़ाने के साथ-साथ मनरेगा मज़दूरी दर को कम-से-कम 600 रु प्रति दिन किया जाये. -किसी भी परिस्थिति में काम के 15 दिनों के अन्दर भुगतान सुनिश्चित किया जाये. -ठेकेदारी और भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़ी कार्र्वाई किया जाये एवं दोषी कर्मियों व पदाधिकारियों पर एक्शन सुनिश्चित की जाये. शिकायतों होने पर कार्र्वाई सुनिश्चित की जाये. -जॉबकार्ड रद्द करने की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाये. बिना भौतिक सत्यापन व ग्राम सभा की सहमति के किसी भी परिस्थिति में जॉबकार्ड न रद्द किया जाये. -पिछले दो सालों से मनरेगा कानून के अनुसार अनिवार्य सामाजिक अंकेक्षण बंद हो गया है. तुरंत निष्पक्ष सामाजिक अंकेक्षण सुनिश्चित की जाये [wpse_comments_template]

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