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रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए झारखंड में कार्यशाला, MSME की भागीदारी पर जोर

Ranchi : झारखंड सरकार के उद्योग निदेशालय ने सोमवार को उद्योग निदेशालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में "रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता – राज्य इकोसिस्टम को प्रोत्साहन" विषय पर कार्यशाला आयोजित की. कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य में रक्षा विनिर्माण की संभावनाओं को बढ़ावा देना, उद्योगों, शिक्षण संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और स्थानीय उद्योगों, खासकर एमएसएमई को रक्षा क्षेत्र से जोड़ने की रणनीति तैयार करना था.
 

Ranchi : झारखंड सरकार के उद्योग निदेशालय ने सोमवार को उद्योग निदेशालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में "रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता – राज्य इकोसिस्टम को प्रोत्साहन" विषय पर कार्यशाला आयोजित की. कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य में रक्षा विनिर्माण की संभावनाओं को बढ़ावा देना, उद्योगों, शिक्षण संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और स्थानीय उद्योगों, खासकर एमएसएमई को रक्षा क्षेत्र से जोड़ने की रणनीति तैयार करना था.


कार्यशाला की अध्यक्षता उद्योग निदेशक विशाल सागर ने की. उन्होंने बताया कि रक्षा मंत्रालय की पहल के तहत झारखंड को परीक्षण, प्रमाणन, गुणवत्ता आश्वासन और मानक विषय के लिए सह-प्रधान राज्य की जिम्मेदारी मिली है. उन्होंने कहा कि रक्षा निर्माण के क्षेत्र में राज्य की क्षमताओं को विकसित करने और उद्योगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है.


कार्यशाला में फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (FJCCI) के अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा मुख्य रूप से मौजूद रहे. सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल), बीआईटी मेसरा और एनआईटी जमशेदपुर सहित विभिन्न संस्थानों ने रक्षा विनिर्माण, अनुसंधान, टेस्टिंग, गुणवत्ता मानकों और उद्योगों के लिए उपलब्ध अवसरों पर प्रस्तुति दी. इस दौरान एमएसएमई की भागीदारी, तकनीकी विकास, कौशल संवर्धन और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई.


चैंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा कि झारखंड के पास खनिज संसाधन, इंजीनियरिंग क्षमता, कुशल मानव संसाधन और मजबूत औद्योगिक आधार होने के कारण रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनने की पूरी क्षमता है. उन्होंने कहा कि झारखंड चैंबर राज्य के उद्योगों, विशेषकर एमएसएमई को रक्षा उत्पादन से जोड़ने और आवश्यक नीतिगत सहयोग के लिए लगातार काम करेगा.


कार्यशाला में उद्योग विभाग के अधिकारियों के अलावा विभिन्न औद्योगिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और उद्योग प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया और रक्षा क्षेत्र में झारखंड की संभावनाओं को लेकर अपने सुझाव साझा किए.

 

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