Search

 
 
 

BIT मेसरा में जेंडर संवेदीकरण पर कार्यशाला, लैंगिक समानता व समावेशी वातावरण पर हुई चर्चा

Ranchi News: कार्यशाला में लिंग और जेंडर के बीच अंतर, सामाजिक रूप से निर्धारित लैंगिक भूमिकाओं, अचेतन पूर्वाग्रह और सूक्ष्म भेदभाव, तथा दैनिक व्यवहार और पेशेवर निर्णयों में मौजूद रूढ़िवादिता पर चर्चा हुई. प्रतिभागियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि किस प्रकार अनजाने पूर्वाग्रह कार्यस्थल और शैक्षणिक संस्थानों में असमानता को बढ़ावा दे सकते हैं.
 
लैंगिक समानता पर कार्यशाला

Ranchi News: बीरला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी), मेसरा के प्रबंधन अध्ययन विभाग की ओर से मंगलवार को कैट हॉल में ‘जेंडर संवेदीकरण’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया. सुबह 11 बजे आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों के बीच समावेशी, समानतापूर्ण और संवेदनशील शैक्षणिक वातावरण को बढ़ावा देना था.

इसे भी पढ़ें: 

कार्यशाला की अध्यक्षता प्रबंधन अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कुमार संजय सावर्णि ने की. मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. श्रद्धा शिवानी उपस्थित रहीं. वहीं, विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. सुजाता प्रियंवदा दास ने कार्यक्रम समन्वयक की भूमिका निभाई.

 

कार्यशाला के मुख्य वक्ता रांची स्थित देवनेट एनजीओ के सह-संस्थापक एवं निदेशक श्याम कुमार थे. उन्होंने सामुदायिक विकास और सामाजिक नीतियों के क्षेत्र में अपने अनुभव के आधार पर लैंगिक समानता, सामाजिक दृष्टिकोण और संस्थागत जवाबदेही जैसे विषयों पर संवादात्मक सत्र आयोजित किया.

 

कार्यशाला में लिंग और जेंडर के बीच अंतर, सामाजिक रूप से निर्धारित लैंगिक भूमिकाओं, अचेतन पूर्वाग्रह और सूक्ष्म भेदभाव, तथा दैनिक व्यवहार और पेशेवर निर्णयों में मौजूद रूढ़िवादिता पर चर्चा हुई. प्रतिभागियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि किस प्रकार अनजाने पूर्वाग्रह कार्यस्थल और शैक्षणिक संस्थानों में असमानता को बढ़ावा दे सकते हैं.

 

इसके अलावा कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम संबंधी पॉश अधिनियम, 2013, आंतरिक शिकायत समिति की भूमिका और शिकायत निवारण प्रक्रिया की जानकारी दी गई. कार्यस्थल पर विविधता, समानता और समावेशन, समान अवसर, करियर में निष्पक्ष प्रगति और ‘ग्लास सीलिंग’ जैसी चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श हुआ.

 

सत्र में जेंडर-तटस्थ एवं समावेशी भाषा, भेदभाव या उत्पीड़न की स्थिति में सक्रिय हस्तक्षेप, पीड़ित व्यक्ति को सहयोग देने और गलत व्यवहार के खिलाफ सुरक्षित तरीके से आवाज उठाने जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई. वक्ता ने लैंगिक रूढ़िवादिता के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण पर पड़ने वाले प्रभावों को रेखांकित करते हुए आपसी सम्मान और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा को जरूरी बताया.

 

कार्यशाला का समापन संवादात्मक प्रश्नोत्तरी सत्र के साथ हुआ. इसमें प्रतिभागियों ने विभिन्न व्यावहारिक केस स्टडी पर अपने विचार साझा किए. अंत में कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुजाता प्रियंवदा दास ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया. 

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही