LagatarDesk : दुनियाभर में आज 1 दिसंबर को एड्स डे (एक्वायर्ड इम्यूलनो डेफिसिएंशी सिंड्रोम दिवस) मनाया जाता है. इस दिन को मनाने के पीछे का उद्देश्य लोगों को एचआईवी और एड्स के प्रति जागरुक करना है. इस साल वर्ल्ड एड्स डे की थीम सही मार्ग अपनाएं : मेरी सेहत, मेरा अधिकार (टेक द राइट पाथ : माई हेल्थ, माई राइट) है. इस थीम का मतलब है कि एचआईवी से पीड़ित इंसान का अधिकार है कि उसे सही ट्रीटमेंट, केयर, सर्विस और बचाव का तरीका मिले. इस थीम के जरिये 2030 तक दुनियाभर में एड्स को खत्म करने की कोशिश की जा रही है.
1988 में पहली बार मनाया गया था वर्ल्ड एड्स डे
वर्ल्ड एड्स डे पहली बार 1988 में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) और जॉइंट यूनाइटेड नेशनल प्रोग्राम ऑन एचआईवी एंड एड्स (UNAIDS) की मदद से मनाया गया था. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के दो पब्लिक इनफॉर्मेशन ऑफिसर जेम्स डब्ल्यू बन और थॉमस नेटर ने इस दिन को मनाने कॉन्सेप्ट दिया था. ताकि एचआईवी और एड्स के प्रति लोगों को जागरूक किया जा सके. इस बीमारी से मर रहे लोगों के सम्मान में भी वर्ल्ड एड्स डे मनाने की शुरुआत की गयी थी. 2020 तक एड्स से 47.8 मिलयन लोगों की जा चुकी है जान
बता दें कि एड्स दुनियाभर की सबसे ज्यादा खतरनाक और गंभीर बीमारी है. यह एचआईवी वायरस के कारण होता है. यह वायरस ह्यूमन इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है. इससे न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रभावित होती है. संक्रमित व्यक्ति को कई बार समाज में भेदभाव और कलंक का भी सामना करना पड़ता है. एड्स की वजह से दुनियाभर में 2020 तक 47.8 मिलयन लोगों की जान जा चुकी है. वहीं लगभग 37.7 लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं. एड्स से संक्रमित होने पर लगभग हर व्यक्ति में अलग-अलग लक्षण दिखते हैं. हालांकि बुखार, गले में खराश, सिर दर्द, लिम्फ नोड्स में सूजन सामान्य लक्षण है. एड्स होने पर मरीज को डायरिया, वेट लॉस, रात में पसीना आना, सांस लेने में तकलीफ, टीबी, हर्पीज, निमोनिया जैसी समस्याएं भी होती है. होने लगती है।
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