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सीआइपी में ''ब्रेन हेल्थ फॉर ऑल'' थीम पर विश्व मस्तिष्क दिवस मनाया गया

Vijay Kumar Ranchi : कांके स्थित केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान में शुक्रवार को विश्व मस्तिष्क दिवस मनाया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) बासुदेव दास ने की. मुख्य अतिथि आईआईएम के निदेशक प्रो प्रदीप कुमार बाला और विशिष्ट अतिथि एक्सआईएसएस के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अनंत कुमार मौजूद रहे.

कला और संगीत की भूमिका पर चर्चा

इस वर्ष विश्व मस्तिष्क दिवस की थीम ``ब्रेन हेल्थ फॉर ऑल`` है और इसी थीम को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान ने कार्यक्रम में वैज्ञानिक और शैक्षणिक अभ्यासों के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों को जोड़ने का एक अनूठा निर्णय लिया है. इस कार्यक्रम में काजी नजरूल इस्लाम, बंगाल के बार्ड या बंगाली कला और संस्कृति के प्रतीक के साहित्यिक कार्यों और संगीत योगदान पर चर्चा की गई. संयोग से काजी नजरूल इस्लाम को उनकी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के लिए वर्ष 1952 में केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान में लाया गया था और तत्कालीन चिकित्सा अधीक्षक, मेजर (डॉ.) आरबी डेविस के नैदानिक पर्यवेक्षण में उनका इलाज इस संस्थान में किया गया था. इस महान व्यक्ति के प्रति सम्मान प्रकट करने के साथ-साथ मस्तिष्क के स्वास्थ्य की रक्षा और उसे बढ़ावा देने में कला और संगीत की भूमिका पर चर्चा करने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था.

मस्तिष्क तनाव के हानिकारक प्रभावों को दूर करता है संगीत और कला- निदेशक 

निदेशक प्रोफेसर बासुदेब दास ने मानव मस्तिष्क पर तनाव के हानिकारक प्रभावों को कम करने में संगीत और कला की लाभकारी भूमिका के बारे में बात की. उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान तनाव का स्तर बढ़ जाता है और तनाव से बचने के लिए संगीत और कला पर भरोसा करने का यह सही समय है. प्रोफेसर प्रदीप बाला ने भी मानव मन और आत्मा में संगीत के सुखदायक प्रभावों को दोहराया. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संगीत में मनुष्य की नकारात्मक भावनाओं और मन की सेटिंग को सुधारने की क्षमता है. कोलकाता स्थित सांस्कृतिक संगठन छायानत ने काजी नजरूल के गीतों और कविताओं से उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया है.

सोमेरिता मलिक ने सांस्कृतिक समारोह का नेतृत्व किया

संगठन की अध्यक्ष सोमेरिता मलिक ने सांस्कृतिक समारोह का नेतृत्व किया. कार्यक्रम के वैज्ञानिक खंड के वक्ता डॉ. उज्जवल रॉय और डॉ. उमेश थे. उज्जवल रॉय रांची के एक प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट हैं और एक प्रशंसित शास्त्रीय गायक भी हैं. उन्होंने काजी नजरूल के गीत गाकर भीड़ को मंत्रमुग्ध कर दिया. कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन डॉ अविनाश शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर ऑफ साइकियाट्री, सीआईपी के द्वारा किया गया और कार्यक्रम का संचालन मनोरोग सामाजिक कार्य विभाग द्वारा डॉ. दीपंजन भट्टाचार्जी, एसोसिएट प्रोफेसर और विभाग के प्रभारी के नेतृत्व में किया गया. इसे भी पढ़ें – चंगाई">https://lagatar.in/controversy-arose-over-the-installation-of-sarna-flag-in-the-healing-meeting-the-police-administration-resolved-the-dispute/">चंगाई

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