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वर्ल्ड लेप्रोसी डे: टीबी चैंपियन की तर्ज पर अब लेप्रोसी चैंपियन

Ranchi: इस साल फाइट लेप्रोसी मेक हिस्ट्री की थीम पर वर्ल्ड लेप्रोसी दिवस मनाया जा रहा है. लेप्रोसी से निपटने के लिए टीबी चैंपिनयंस की तर्ज पर अब सरकार कुष्ठ रोग उन्मुलन के लिए लेप्रोसी चैंपियन की मदद लेगी. लेप्रोसी से ठीक हो चुके लोगों को लेप्रोसी चैंपियंन बनाया जाएगा, और उनके माध्यम से ही लेप्रोसी के मरीजों के बीच जागरुकता फैलायी जाएगी. इसके लिए सभी प्रखंडों में लेप्रोसी चैंपियन तैयार किए जाएंगे. मरीजों को यह बताया जाएगा कि यह बीमारी लाइलाज नहीं है. छह से 12 महीने की अवधि तक मरीजों को दवा खिलाकर उन्हें ठीक किया जा सकता है. इसके अलावा उनके मानसिक स्थिति को बेहतर करने के लिए काउंसलिंग भी किया जाएगा. राज्य के लेप्रोसी के नोडल पदाधिकारी डॉ कृष्ण कुमार ने बताया कि 30 जनवरी से लेकर 13 फरवरी तक राज्य लेप्रोसी जागरुकता प्रोग्राम चलाया जाएगा. इस दौरान घर-घर जाकर मरीजों को चिन्हित भी किया जाएगा. चिन्हित मरीजों को दवा भी उपलब्ध करायी जाएगी.

नौ से 12 महीने तक की दवा से पूरी तरह ठीक हो सकते हैं मरीज

डॉ कृष्ण कुमार ने बताया कि लेप्रोसी दो प्रकार के हाते हैं. ऑक्टीबेसिलरी लेप्रोसी और मल्टी बेसिलरी. दोनों को मल्टी ड्रग थेरेपी से ठीक किया जा सकता है. मल्टी ड्रग थेरेपी के तहत ऑक्टी बेसिलरी में छह महीने की दवा से मरीज पूर्णतः ठीक हो सकते हैं,  वहीं मल्टी बेसिलरी में नौ महीने से लेकर 12 महीने तक मरीज की डॉक्टरों के देखरेख में दवा चलाई जाती है. उससे मरीजों को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि एंटी बायोटिक दवा के सही मात्रा से मरीजों को ठीक किया जा सकता है.

बैक्टेरियल बीमारी है लेप्रोसी, कुरीतियों को दूर करने की जरुरत

डॉ कृष्ण कुमार ने बताया कि लेप्रोसी बैक्टेरियल बीमारी है. इसे लेकर कुरीतियों को दूर करने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि लेप्रोसी का किसी भी पुराने जन्म के पाप जैसे कहावत से कोई लेना देना नहीं है, यह पूरी तरह से बेकार की बात है. यह माइक्रो बैक्टेरियल लेप्री के कारण होता है. उन्होंने बताया कि यह छुआछुत से नहीं फैलता. उन्होंने बताया कि लेप्रोसी किसी पीड़ित के छींकने और उसके लार से फैल सकता है. हालांकि तीन डोज के बाद संक्रमित से किसी अन्य में फैलने का खतरा बहुत कम हो जाता है.

राज्य के छह केंद्रों में निशुल्क ऑपरेशन की भी सुविधा

लेप्रोसी मरीजों के रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के लिए निशुल्क ऑपरेशन की भी सुविधा सरकारी स्तर पर दी जाती है. राज्य के छह केंद्रों में निशुल्क ऑपरेशन किए जा रहे हैं. पिछले साल मार्च के बाद से अब तक कुल 90 मरीजों की रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की जा चुकी है. राज्य में एमजीएम, रिम्स, रांची सदर, धनबाद मेडिकल कॉलेज, सरायकेला सदर में मरीजों की ऑपरेशन की जा रही है.बता दें कि पिछले साल सिर्फ सदर रांची में 20 के करीब सर्जरी की गई थी. [wpse_comments_template]

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