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लातेहार: जब 6 बार के विधायक यमुना सिंह को निर्दलीय लड़ना पड़ा था

Ashish Tagore Latehar: राजनीति के खेल भी निराले हैं. यह कब किस करवट बैठेगी किसी को पता नहीं चलता. अगर ऐसा नहीं होता तो छह बार के विधायक यमुना सिंह को मनिका विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव नहीं लड़ना पड़ता. यहां तक तो ठीक था, लेकिन उस चुनाव में उनका ऐसा हश्र होगा, किसी ने सोचा नहीं था. चुनाव में यमुना सिंह नीचे नौंवे स्थान पर रहे थे. बात 2009 के विधानसभा चुनाव की है. इस चुनाव में यमुना सिंह को भाजपा ने टिकट नहीं दिया था. भाजपा ने 30 वर्षीय युवा नेता हरिकृष्णा सिंह पर दांव खेला. इससे क्षुब्ध होकर यमुना सिंह ने मनिका विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा और कुल 1712 वोट ला कर नौंवे स्थान पर रहे. उस चुनाव में मनिका से कुल 23 प्रत्याशियों ने किस्मत आजमायी थी.

1969 में पहली बार विधायक चुने गये थे यमुना सिंह

यमुना सिंह पहली बार भारतीय जनसंघ के टिकट पर वर्ष 1969 में लातेहार विधानसभा सीट से विधायक चुने गये थे. उस समय मनिका विधानसभा सीट अस्तित्व में नहीं आया था. मनिका विधानसभा क्षेत्र के अस्तित्व में आने के बाद 1977 में विधानसभा चुनाव हुए. इस चुनाव में यमुना सिंह ने मनिका विधानसभा क्षेत्र से जनता पार्टी के टिकट से चुनाव लड़ा और विजयी हुए. इसके बाद यमुना सिंह साल 1980, 1985, 1990 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के टिकट से चुनाव लड़े और जीते. लेकिन 1995 में उनका विजय रथ थम गया. राजद के रामचंद्र सिंह ने यमुना सिंह को हरा दिया.

झारखंड के पहले वन एवं पर्यावरण मंत्री बने थे

साल 2000 के चुनाव में यमुना सिंह ने मनिका विधानसभा सीट से एक बार फिर कम बैक किया. झारखंड गठन के बाद यमुना सिंह प्रदेश के पहले वन एवं पर्यावरण मंत्री बने. इसके बाद से यमुना सिंह का ग्राफ नीचे गिरता चला गया. साल 2005 के विधानसभा चुनाव में राजद के रामचंद्र सिंह ने अपने निकटम प्रतिद्वंद्वी झामुमो के डा दीपक उरांव को 9883 वोटों से हरा दिया. भाजपा के यमुना सिंह 15680 वोट लाकर तीसरे स्थान पर रहे. यह वह दौर था जब यमुना सिंह अपनी बढ़ती उम्र व अन्य कारणों से संगठन से दूर होते चले गये. यही कारण है कि वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उनका टिकट काट कर हरिकृष्ण सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया. हरिकृष्ण सिंह निराश नहीं किया और चुनाव जीता. उन्होने अपने निकटम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के रामेश्वर उरांव को 1769 वोटों से हराया. निर्दलीय चुनाव लड़ रहे यमुना सिंह नौं वें स्थान पर खिसक गये. नौ सितंबर 2011 में यमुना सिंह का निधन हो गया. इसे भी पढ़ें - दीपिका">https://lagatar.in/deepika-wins-sixth-archery-world-cup-final-medal-with-silver-in-mexico/">दीपिका

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