NewDelhi : भाजपा तानाशाही से राज चला रही है. उसने संविधान की धज्जियां उड़ा रखी हैं. अगर BJP को रबर स्टैंप राष्ट्रपति मिला तो वह बेलगाम हो जायेगी. सभी राजनीतिक दलों को यह बात गंभीरता से सोचनी होगी, नहीं तो देश गहरे संकट में पड़ जायेगा. फिर इससे उबरना मुश्किल होगा. यह बात राष्ट्रपति चुनाव में संयुक्त विपक्ष की तरफ से उम्मीदवार बनाये गये यशवंत सिन्हा ने कही. यशवंत सिन्हा ने कहा कि वे विपक्ष के सभी दलों से संपर्क साध रहे हैं. कहा कि वे बिहार के CM नीतीश कुमार से भी समर्थन के लिए मिलेंगे. बता दें कि नीतीश ने एनडीए की उम्मीदवार द्रोपदी मुर्मू का समर्थन करने की घोषणा कर दी है.
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शिंदे गुट की शिवसेना पर कब्जा करने की कवायद, 34 विधायकों के हस्ताक्षर वाला पत्र गवर्नर को भेजा, और सात विधायक गुवाहाटी पहुंचे BJD के लिए द्रौपदी का समर्थन करना विवशता है
यशवंत ने कहा कि BJD के लिए द्रौपदी का समर्थन करना विवशता है, क्योंकि उनका राज्य(ओड़िशा) आदिवासी बहुल्य इलाका है. अगर नवीन पटनायक राजग उम्मीदवार का विरोध करते हैं तो इससे उन्हें सियासी नुकसान हो सकता है. इस क्रम में यशवंत ने कहा कि बीजेपी के पास भी जीतने लायक नंबर नहीं हैं. चुनाव दिलचस्प होगा. यशवंत के अनुसार वे अपनी तरफ से जीतने के लिए भरसक कोशिश करेंगे
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की न्यूज डायरी।।23 June।। मांडर में वोटिंग आज।। उद्धव ने छोड़ा सीएम हाउस।। NDA के दांव से असमंजस में JMM।।थानेदार है या रंगदार।। अफगानिस्तान में भूकंप से तबाही।।विधायक के घर पर चला बुलडोजर।। समेत कई खबरें और वीडियो।। वे जिस बीजेपी में थे वहां अटल बिहारी वाजपेयी जी के सिद्धांत थे
भाजपा छोड़ने की वजह के बारे में कहा कि यशवंत ने कहा कि वे बीजेपी में थे. लेकिन आज नहीं हैं. इसका उन्हें मलाल भी नहीं है, क्योंकि वे जिस बीजेपी में थे वहां अटल बिहारी वाजपेयी जी के सिद्धांत थे. वो सबसे बड़े नेता था. लोगों की सुनते थे. उसके बाद ही कोई फैसला करते थे. कहा कि आज की बीजेपी में यह सब दूर दूर तक नजर नहीं आता. भाजपा में सिद्धांत हवा हो चुके हैं. जब वे बीजेपी से बाहर आये तो उन्हें कोई मलाल नहीं था. यशवंत ने कहा कि वे देख चुके थे कि ये लोग देश के साथ नहीं हैं. यशवंत के अनुसार राष्ट्रपति का चुनाव बेहद दिलचस्प होने जा रहा है. कहा कि वे पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के आभारी हैं कि उनको टीएमसी के टिकट पर राज्यसभा भेजा. राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुने जाने पर कहा कि फारूख और गोपाल कृण गांधी के नाम का प्रस्ताव पहली बैठक में किया गया था. उनका नाम दूसरी बैठक में उठा. अब उनकी जिम्मेदारी है कि वे गंभीरता से चुनाव लड़ें और वे लड़ेंगे. [wpse_comments_template]
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