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टेरर फंडिंग केस में यासीन मलिक को आज हो सकती है सजा, मृत्युदंड या उम्रकैद मिलने की संभावना

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NewDelhi : टेरर फंडिंग केस में दोषी करार दिये गये कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक को आज बुधवार को सजा मिलने की संभावना है. बता दें कि दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने उसे दोषी करार दिया है. जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक ने आतंकवाद के वित्त पोषण के एक मामले में सभी आरोप स्वीकार कर लिये थे, जिनमें गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत आरोप भी शामिल हैं. जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट यूएपीए के तहत प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है. इसे भी पढ़ें : मशहूर">https://lagatar.in/famous-author-robert-kiyosaki-warns-of-global-financial-crisis-advises-to-save-6-things/">मशहूर

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यासीन मलिक जम्मू कश्मीर में आतंकी गतिवधियों में संलिप्त था

टेरर फंडिंग जम्मू कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों और कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों पर पथराव करने, स्कूलों को जलाने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के कृत्य के लिए था. एनआईए के अनुसार जांच से यह साबित हुआ है कि यासीन मलिक जम्मू कश्मीर में आतंकी गतिवधियों में संलिप्त था. जान लें कि विशेष न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने 19 मई को मलिक को दोषी करार देते हुए एनआईए को उसकी वित्तीय स्थिति का आकलन करने को कहा था, ताकि उस पर लगाये जा सकने वाला जुर्माना निर्धारित किया जा सके. कोर्ट ने यासीन मलिक को अपनी संपत्ति के बारे में एफिडेविट देने को भी कहा था. जानकारी के अनुसार यासीन मलिक को अधिकतम सजा के तौर पर मृत्युदंड, जबकि न्यूनतम सजा  उम्र कैद सुनाई जा सकती है. इसे भी पढ़ें :  अमेरिका">https://lagatar.in/america-indiscriminate-firing-at-rob-elementary-school-18-children-and-3-teachers-killed/">अमेरिका

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यासीन मलिक ने कुबूला गुनाह

जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख मलिक ने अदालत में कहा था कि वह खुद के खिलाफ लगाये आरोपों का विरोध नहीं कर रहा है. इन आरोपों में यूएपीए की धारा 16 (आतंकवादी कृत्य), 17 (आतंकवादी कृत्यों के लिए धन जुटाना), 18 (आतंकवादी कृत्य की साजिश) और धारा 20 (आतंकवादी गिरोह या संगठन का सदस्य होना) तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक षडयंत्र) और 124-ए (राजद्रोह) शामिल हैं. अदालत ने पूर्व में, फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे, शब्बीर शाह, मसरत आलम, मोहम्मद युसूफ शाह, आफताब अहमद शाह, अल्ताफ अहमद शाह, नईम खान, मोहम्मद अकबर खांडे, राजा मेहराजुद्दीन कलवल, बशीर अहमद भट, जहूर अहमद शाह वटाली, शब्बीर अहमद शाह, अब्दुल राशिद शेख तथा नवल किशोर कपूर समेत कश्मीरी अलगाववादी नेताओं के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किये थे.

हाफिज सईद और  सैयद सलाहुद्दीन के खिलाफ भी आरोपपत्र  

लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद और हिज्बुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन के खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल किया गया, जिन्हें मामले में भगोड़ा अपराधी बताया गया है. यह मामला हाफिज सईद और हुर्रियत कांफ्रेंस के सदस्यों सहित अलगवावादी नेताओं की कथित साजिश से संबंधित है, जिन्होंने प्रतिबंधित आतंकी संगठन – हिजबुल मुजाहिदीन, दुख्तरान ए मिल्लत, लश्कर ए तैयबा और अन्य के सक्रिय सदस्यों के साथ हवाला सहित विभिन्न अवैध माध्यमों से देश-विदेश से धन जुटाने की साजिश रची थी. [wpse_comments_template]

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