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तनाव भरे इस जीवन में शांति के लिए योगाभ्यास एक अचूक उपचार : निर्मला बहन

 
Ranchi : आज के बिखरे अशांत और दुखी मनुष्य को अपना खोया हुआ व्यक्तित्व पुनः प्राप्त करने के लिए एक नवचेतना की आवश्यकता है. विकारी स्वभाव के कारण मनुष्य का अंतर्मन अस्वस्थ और स्वभाव क्रूर हो गया है. इस मानसिक बीमारी के लिए योगाभ्यास एक अचूक और आवश्यक उपचार है. उक्त बातें राजयोग प्रवचनमाला के दौरान ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने ब्रह्माकुमारी संस्थान चौधरी बगान, हरमू रोड में कही. उन्होंने कहा कि `योग` नाम से आज कितने ही प्रकार की शारीरिक क्रियाएं प्रचलित है, परंतु शारीरिक क्रियाओं द्वारा मानसिक उपचार नहीं किया जा सकता. इसके बुद्धि में शुद्ध विचार डालकर अशुद्ध विचारों को बाहर निकालना जरूरी है. मानसिक दुर्बलताओं और अवगुणों के रूप में पाप मनुष्य के अन्दर मौजूद है. इनका दूर होना ही पाप का भस्म होना है. योग अपना प्रभाव इसी जन्म में दिखाता है. संस्कारों में शुद्धि और शक्ति इसी जन्म में प्राप्त होती और इस प्राप्ति के आधार पर ही भविष्य जगत सुखदायी बनता है. इस जन्म के संचित संस्कारों का ही प्रतिबिंब भविष्य जन्म है. अब परमात्मा प्रत्यक्ष संपर्क के बिना योग पथ पर आगे नहीं बढ़ा जा सकता. आत्मिक पुरुषार्थ केवल तभी संभव है, जबकि सदा जागती ज्योति परमात्मा के प्रकाश से आत्मा की बुझी बुझी सी ज्योति पुनः जाग जाय और व्यक्ति स्वयं को शरीर न समझ कर आत्मा समझने लग जाये. निर्मला बहन ने कहा कि पवित्रता ही सुख शांति की जननी है. हर कीमत पर इसकी रक्षा करना अपना सर्वप्रथम कर्तव्य समझें, तभी सुख-शांति मिलेगी. इसे भी पढ़ें : रांचीः">https://lagatar.in/ranchi-dgp-will-hold-a-meeting-on-monday-regarding-law-and-order-and-crime-control/">रांचीः

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