पिछले चार-पांच दिनों के भीतर सिर्फ दिल्ली के जंतर-मंतर पर ही नहीं, देश के कई राज्यों में छात्रों का आंदोलन चल रहा है. झारखंड के रांची में, बिहार के पटना में, उत्तर प्रदेश के बनारस में, महाराष्ट्र के मुंबई में, केरल में, मध्य प्रदेश के इंदौर में, उत्तराखंड के देहरादून में, गुजरात के अहमदाबाद में और तेलंगना के हैदराबाद में. ये वही छात्र हैं, जिन्हें कॉकरोच कहा गया. वही कॉकरोच जिनका आंदोलन सोशल मीडिया से शुरु हुआ और सड़क पर आ गया है. वह देश के अलग-अलग हिस्सों में फैल रहा है.
पुलिस डंडे बरसा रही है, छात्र भागते नहीं रूक जाते हैं, वाटर कैनन से पानी की बौछाड़े-छात्र नहाने लगते हैं, आंसू गैस के गोले झेल रहे हैं, पुलिस पास आती है तो राष्ट्रीय गीत गाने लगते हैं. तिरंगा लहराने लगते हैं. इन छात्रों में गुस्सा है. वे थक चुके हैं. सिस्टम ने उन्हें थका दिया है. उनकी कोई सुन नहीं रहा. उन्हें कोई समझ नहीं रहा. कोई बात नहीं कर रहा.
उन्हें पता है फिर विज्ञापन जारी होगा. परीक्षा होगी. पेपर लीक होगा. राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगायेंगे. और फिर सबकुछ पहले जैसा होने लगेगा. राजनीतिक दल कैश ट्रांसफर कर वोट खरीद लेंगे. राजनेताओं का ऐश जारी रहेगा. असल में राजनेताओं ने इस देश के लोगों को गुलाम समझ रखा है. इस बात को युवा जान गए हैं.
इन छात्रों को, बेरोजगारों को, जिन्हें आप और आपका सिस्टम कॉकरोच समझता है, उनकी हैसियत को कम मत आंकिये. वह 38-40 करोड़ हैं. सब एक साथ सड़क पर आ गए तो सिस्टम चॉक हो जायेगा. अगर नाराजगी दूर नहीं हुई तो आपको सत्ता से उतार करके फेंक देंगे.
सत्ता में बैठे लोग क्या आप यह सब देख पा रहे हो. उनके गुस्से को समझ पा रहे हैं. वह अब सिर्फ बयानों से नहीं मानने वाले. क्या होगा फास्ट ट्रैक कोर्ट से. वह इसे बकवास मानते हैं. अब उन्हें गारंटी चाहिए. भरोसा चाहिए. उन्हें स्मार्ट सिटी नहीं चाहिए. हिन्दू-मुस्लिम नहीं चाहिए. उन्हें शिक्षा चाहिए. रोजगार चाहिए. विश्वास करने लायक कदम उठाने पड़ेंगे. नहीं तो ये आपको सत्ता से उतार फेकेंगे.
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