alt="जिप लॉक " width="215" height="269" /> जिप लॉक[/caption]
डॉक्टर रविश ने बताया कैसे निकाला
डॉक्टर रविश रंजन ने बताया कि एक साल के बच्चों में सामान्यतः एंडोस्कोपी द्वारा कोई भी बाह्य वस्तु को बाहर निकालना तकनीकी तौर पर बहुत ही चुनौती भरा होता है. इसमें काफी दक्षता और निपुणता की जरूरत होती है. क्योंकि इतने छोटे बच्चों में खाने की नली बहुत ही पतली होती है और कई बार स्कोप के द्वारा चैन की लॉक जैसी नुकीली चीज को निकालने के दौरान उसमें क्षति होने का खतरा रहता है. रात में 9-9:30 बजे के लगभग बच्ची को अनेस्थिसिया देने के बाद एंडोस्कोपी द्वारा उसके पेट से जिप लॉक को निकाला गया, जो की तकनीकी तौर पर बहुत ही चुनौतीपूर्ण था. लेकिन 10 से 15 मिनट में प्रोसीजर को कम्पलीट कर लिया गया, जिसके बाद बच्ची को होश आया तो वो आराम से खाना पीना खा रही थी और रोना बंद कर चुकी थी. इस प्रोसीजर में अनेस्थेसिस्ट डॉक्टर जयवंत , तकनीशियन संदीप, राकेश आदि लोगों का काफी सराहनीय योगदान रहा. डॉक्टर रविश ने बताया कि राज अस्पताल में पेट, आंत, लिवर एवं पैंक्रियास के इलाज के लिए अत्याधुनिक एंडोस्कोपी मशीन, उन्नत तकनीक, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उपलब्ध है. इसे भी पढ़ें : TPC">https://lagatar.in/police-encounter-with-tpc-regional-commander-assav-ganjhu-squad-militants-gathered-to-carry-out-major-incident/">TPCरिजनल कमांडर आक्रमण गंझू दस्ते के साथ पुलिस की मुठभेड़, बड़ी घटना को अंजाम देने जुटे थे उग्रवादी [wpse_comments_template]

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