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सोन नदी के पानी पर 25 साल पुराना विवाद खत्म, झारखंड-बिहार के बीच हुआ समझौता

Ranchi News: बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर करीब 25 साल से चला आ रहा विवाद अब खत्म हो गया है. सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए.
 
झारखंड-बिहार के बीच समझौता
  • इस साल जल विवादों पर चौथा बड़ा समझौता
  • अमित शाह ने बताया Team Bharat का उदाहरण
  • लाखों किसानों को मिलेगा सिंचाई का पानी
  • झारखंड के पलामू-गढ़वा को भी लाभ
  • हेमंत सोरेन और सम्राट चौधरी ने जताया आभार

Ranchi News: बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर करीब 25 साल से चला आ रहा विवाद अब खत्म हो गया है. सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए. इस दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी मौजूद रहे.

 

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कार्यक्रम में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल, बिहार के उपमुख्यमंत्री, केंद्रीय गृह सचिव और केंद्र तथा दोनों राज्यों के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे.

 

अमित शाह ने कहा कि यह समझौता पूर्वी भारत के लंबे समय से चले आ रहे एक बड़े जल विवाद का समाधान है. इससे बिहार और झारखंड के बड़े ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लाखों किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा. इसके साथ ही कई क्षेत्रों में लोगों को पीने का पानी भी उपलब्ध होगा.

 

समझौते के बाद बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना की बड़ी आबादी को सिंचाई और पेयजल के लिए पर्याप्त पानी मिलने की उम्मीद है.

 

झारखंड में पलामू, गढ़वा और आसपास के अन्य क्षेत्रों को इसका फायदा मिलेगा. इन इलाकों में सिंचाई के साथ पीने के पानी की जरूरत भी पूरी करने में मदद मिलेगी.

 

अमित शाह ने कहा कि सोन नदी जल बंटवारे पर हुआ यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Team Bharat की सोच और सहकारी संघवाद का अच्छा उदाहरण है. उन्होंने कहा कि सभी राज्य टीम इंडिया की भावना से मिलकर काम करें तो कोई भी समस्या ऐसी नहीं है, जिसका समाधान नहीं निकाला जा सकता.

 

उन्होंने कहा कि बिहार और झारखंड के बीच करीब 25 साल पुराने विवाद का समाधान बातचीत और सहकारी संघवाद की भावना से हुआ है. इससे दोनों राज्यों के बड़े भौगोलिक क्षेत्र, किसानों, ग्रामीण इलाकों और पेयजल से जुड़ी समस्याओं के समाधान का रास्ता साफ हुआ है.

 

अमित शाह ने कहा कि उनकी पहल पर अंतर्राज्यीय परिषद के जरिए अलग-अलग राज्यों के बीच लंबे समय से लंबित जल विवादों को सुलझाने की कोशिश की जा रही है. वर्ष 2026 में अब तक राज्यों के बीच चार बड़े समझौते हो चुके हैं.

 

7 जुलाई 2026 को अमित शाह की मौजूदगी में नर्मदा अवार्ड से जुड़े महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच लंबित भुगतान के मुद्दे पर समझौता हुआ था. इससे सरदार सरोवर परियोजना की लागत में राज्यों की हिस्सेदारी से जुड़े पुराने विवाद को खत्म करने की दिशा में कदम उठाया गया. इसमें लंबित राशि के अंतिम निपटारे के लिए वन-टाइम सेटलमेंट पर सहमति बनी.

 

29 जून 2026 को राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल परियोजना के निर्माण और कार्यान्वयन को लेकर समझौता हुआ था. इसके तहत जुलाई से अक्टूबर के बीच करीब 580 MCM पानी यमुना नहर से तीन भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए राजस्थान पहुंचाने की योजना है.

 

इससे राजस्थान को 1994 के समझौते के तहत मिले यमुना के पानी का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी. परियोजना से राजस्थान के सूखे और कम बारिश वाले इलाकों में पेयजल की आपूर्ति बेहतर होने और लाखों लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है.

 

16 जून 2026 को अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर कई राज्यों के बीच सहमति बनी थी. इसमें हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान शामिल हैं.

 

परियोजना के जल घटक की 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार सहायता के रूप में देगी, जबकि बाकी 10 प्रतिशत राशि छह राज्य मिलकर वहन करेंगे. बैठक में हिमाचल प्रदेश के बिजली घटक की लागत में हिस्सेदारी के बदले उसके हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान को देने पर भी सहमति बनी थी.

 

सोन नदी जल बंटवारे पर समझौते के लिए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के प्रति आभार जताया. उन्होंने इसे दोनों राज्यों के लिए महत्वपूर्ण समझौता बताया.

 

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