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पत्थर खदान से प्रभावित 300 आदिवासी परिवारों ने CM हाउस पहुंच सौंपा ज्ञापन

बगोदर थाना क्षेत्र अंतर्गत कालीचटन व बासवा टांड़ गांव के लगभग 300 आदिवासी परिवार पत्थर खदान के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं. रविवार को सामाजिक कार्यकर्ता रेणुका तिवारी और सीता स्वासी के नेतृत्व में पीड़ित परिवारों ने मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और खदान बंद करने की मांग की
 

Giridih : बगोदर थाना क्षेत्र अंतर्गत कालीचटन व बासवा टांड़ गांव के लगभग 300 आदिवासी परिवार पत्थर खदान के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं. रविवार को सामाजिक कार्यकर्ता रेणुका तिवारी और सीता स्वासी के नेतृत्व में पीड़ित परिवारों ने मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और खदान बंद करने की मांग की.ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खदान का विरोध करने पर पुलिस प्रशासन, खनन माफियाओं से मिलकर उन्हें डराता-धमकाता है और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है.

 

 

 

 

थाना प्रभारी पर डराने-धमकाने का आरोप


पीड़ितों ने बताया कि विरोध जताने पर थाना प्रभारी महिलाओं और पुरुषों को जबरन थाना ले जाकर धमकाते हैं. ग्रामीणों ने बगोदर के अनुमंडल पदाधिकारी और अंचल अधिकारी से कई बार शिकायत की,लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसी से आक्रोशित होकर उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश की, हालांकि मुलाकात संभव नहीं हो सकी. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वे मुख्यमंत्री आवास के सामने धरना प्रदर्शन करेंगे.

 

स्कूल और घर के पास चल रही है खदान


स्थानीय लोगों ने बताया कि पत्थर खदान गांव से मात्र 50 मीटर और स्कूल से 100 मीटर की दूरी पर स्थित है. पत्थर तोड़ने के दौरान घरों में कंपन होता है, दीवारों में दरारें आ गई हैं और लोग भय के कारण घर छोड़कर बाहर भागने को मजबूर हैं. बावजूद इसके 24 मई को प्रशासन ने पुलिस छावनी बनाकर खदान को दोबारा शुरू करवा दिया.

 

महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार


ग्रामीण महिलाओं ने आरोप लगाया कि विरोध के दौरान पुलिस उन्हें जबरन उठा ले जाती है और थाने में दुर्व्यवहार करती है. इससे महिलाओं में भय और असुरक्षा की भावना है.

 

प्राकृतिक सौंदर्य पर संकट


करीब 7 एकड़ क्षेत्र में फैली इस पत्थर खदान में भूरे और सफेद रंग के सुंदर पत्थर पाए जाते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र प्राकृतिक संपदा से भरपूर है, लेकिन खनन माफियाओं और प्रशासन की मिलीभगत से इसे नष्ट किया जा रहा है.

 

ग्रेनाइट और विस्फोटकों से फोड़े जा रहे हैं पत्थर


ग्रामीणों ने बताया कि खदान में ग्रेनाइट और बमों से पत्थर फोड़े जाते हैं, जिससे तेज आवाज होती है और पत्थर के टुकड़े घरों में आ गिरते हैं. धूल और ध्वनि प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है, और जल स्रोत भी प्रदूषित हो रहे हैं.

 

बच्चों पर मानसिक प्रभाव


ग्रामीणों के अनुसार, खनन कार्य किसी निश्चित समय पर नहीं होता, यह कभी भी, यहां तक कि रात में भी चलता है, जिससे पूरे गांव में भय का माहौल है. छोटे बच्चे मानसिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं और जीवन पूरी तरह अशांत हो गया है.

 

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग


पीड़ितों ने सरकार से खनन कार्य पर तत्काल रोक लगाने और दोषी प्रशासनिक अधिकारियों तथा खनन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.इस मौके पर संतोष मुर्मू, मनोज कुमार टुडु, रामु मांझी, जगदीश मांझी, कुंती देवी, मोहन मांझी, बालेश्वर मुर्मू, मुद्रिका देवी, सुंदरी देवी, छोटकी देवी सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित थे. 

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