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झारखंड में 68 फीसदी छोटे बच्चे एनीमिया के शिकार, IFA खुराक में तेजी के निर्देश

Ranchi: झारखंड में आयरन की कमी नहीं है. देश में टॉप तीन राज्य, जो आयरन की फेहरिस्त में हैं, झारखंड उसमें शुमार है. मगर फिर भी यहां 5 साल से कम उम्र के बच्चे एनीमिया के शिकार हैं. जो चिंता का विषय है.
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Ranchi: झारखंड में आयरन की कमी नहीं है. देश में टॉप तीन राज्य, जो आयरन की फेहरिस्त में हैं, झारखंड उसमें शुमार है. मगर फिर भी यहां 5 साल से कम उम्र के बच्चे एनीमिया के शिकार हैं. जो चिंता का विषय है. हालिया आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के करीब 68 प्रतिशत छोटे बच्चे एनीमिया से प्रभावित हैं, यानी उनके शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर तय मानक 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर से काफी कम है.

 

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (NFHS-5) के अनुसार, लगभग 34.3 प्रतिशत बच्चों का हीमोग्लोबिन स्तर 7 से 10 ग्राम प्रति डेसीलीटर के बीच है, जो स्वास्थ्य के लिए चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है. इस चुनौती से निपटने के लिए चलाए जा रहे “एनीमिया मुक्त भारत” अभियान की रफ्तार हालांकि अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है.

 

राज्य में आयरन और फोलिक एसिड (IFA) की खुराक देने की व्यवस्था कमजोर नजर आ रही है. दिसंबर 2025 तक पांच साल तक के केवल 66 प्रतिशत बच्चों को ही जरूरी सप्लीमेंट मिल सका. वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 की शुरुआत में यह आंकड़ा और कम, करीब 58 प्रतिशत था.

 

कुछ जिलों ने बेहतर काम किया है. प्रदर्शन के आधार पर धनबाद 91.1 प्रतिशत स्कोर के साथ पहले स्थान पर है, जहां 5 से 9 साल के लगभग 95 प्रतिशत बच्चों तक IFA पहुंचाया गया. जामताड़ा 83 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा. दुमका और सिमडेगा संयुक्त रूप से 82.5 प्रतिशत स्कोर के साथ तीसरे स्थान पर हैं. 


हजारीबाग ने भी 81.5 प्रतिशत उपलब्धि के साथ शीर्ष पांच जिलों में जगह बनाई है. इन जिलों में छह माह से पांच साल तक के बच्चों के बीच खुराक वितरण 64 से 77 प्रतिशत के बीच दर्ज किया गया.

 

वहीं कई जिलों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. गढ़वा सबसे निचले पायदान पर है, जहां ओवरऑल स्कोर 66.2 प्रतिशत है और 6 से 59 माह के केवल 39 प्रतिशत बच्चों तक ही खुराक पहुंच पाई है. राजधानी रांची भी 66.4 प्रतिशत स्कोर के साथ निचले जिलों में शामिल है. इसके अलावा साहिबगंज, कोडरमा और बोकारो में भी IFA सप्लीमेंटेशन की गति काफी धीमी है. इन क्षेत्रों में छोटे बच्चों और धात्री महिलाओं तक दवा वितरण लक्ष्य से काफी पीछे है.

 

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) झारखंड ने कड़ा रुख अपनाया है. सभी जिलों के सिविल सर्जनों को निर्देश जारी कर कार्यक्रम में सुधार लाने को कहा गया है. राज्य स्तर से स्कोर कार्ड के साथ पत्र भेजकर जिला और प्रखंड स्तर पर स्वास्थ्य, समाज कल्याण और शिक्षा विभाग के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर जोर दिया गया है.

 

विभाग ने साफ किया है कि अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और एनीमिया मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए IFA सप्लीमेंटेशन में तेजी लाना जरूरी है.

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