Ranchi : झारखंड में पैसों की कमी से जल जीवन मिशन की 72 प्रतिशत योजनाएं अधूरी पायी गयीं. लाभुकों के सर्वेक्षण से इस बात की जानकारी मिली कि सिर्फ 19 से 40 प्रतिशत लोग ही इस योजना से संतुष्ट है. हर गांव को इस योजना में शामिल नहीं किया गया. ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया. विधानसभा के मॉनसूत्र में पेश जल जीवन मिशन की भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में इन तथ्यों का उल्लेख किया गया है.
ऑडिट के दौरान जल जीवन मिशन की स्थिति का आकलन करने के लिए छह जिलों को चुना गया था. इन जिलों में धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, हजारीबाग, खूंटी, कोडरमा और पश्चिम सिंहभूम का नाम शामिल है. ऑडिट के दौरान इन छह जिलों के पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडलों के कार्यपालक अभियंताओं के रिकार्ड की जांच की गयी. जन जीवन मिशन की उपलब्धि का आंकलन करने के लिए 12 प्रखंडों और 26 गांवों की योजनाओं को ऑडिट करने के बाद तैयार CAG की रिपोर्ट में इन तथ्यों का उल्लेख किया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकार ने पांच वर्षों के दौरान जल जीवन मिशन की 98,067 योजनाएं स्वीकृत की थी. इन योजनाओं की कुल लागत 24360.91 करोड़ रुपये आंकी गयी थी. लेकिन दिसंबर 2024 तक सिर्फ 27,294 योजनाएं ही पूरी की जा सकी थी. यानी पांच सालों के दौरान जल जीवन मिशन की सिर्फ 28 प्रतिशत योजनाएं ही पूरी हो सकी. बाकी 72 प्रतिशत योजनाएं दो साल से अधिक समय से अधूरी पायी गयीं.
50:50 के अनुपात पर चलने की इस योजना के लिए पांच वर्षों (2019-24) के दौरान केंद्रांश और राज्यांश के रूप में कुल 11690.09 करोड़ रुपये उपलब्ध था. इस राशि में बैंक से सूद के रूप में मिली 53.04 करोड़ सहित अन्य स्रोतों से मिली 76.87 करोड़ रुपये की रकम शामिल थी. सरकार ने योजना के लिए उबलब्ध कुल राशि में से सिर्फ 11468.63 करोड़ रुपये की खर्च किया.
रिपोर्ट के अनुसार, जल जीवन मिशन अगस्त 2019 में शुरू हुआ था. उस वक्त राज्य के ग्रामीण घरों की संख्या 52,27,214 थी. उस वक्त तक इसमें से सात प्रतिशत घरों को नल से पेयजल की सुविधा दी जा चुकी थी. बाद में ग्रामीण घरों की संख्या में वृद्धि हुई. इसके बाद 672,53,471 घरों को नल से पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया था. मार्च 2025 तक इसमें से 34.31,115 घरों को नल से पेयजल की सुविधा उपलब्ध करायी गयी थी. यानी लक्ष्य के मुकाबले 55 प्रतिशत घरों को नल से पेयजल योजना से जोड़ दिया गया था.
ऑडिट के दौरान योजना के लाभुकों के बीच योजना से संबंधित सर्वेक्षण किया गया. सर्वेक्षण के दौरान 19 से 40 प्रतिशत लाभुकों ने ही योजना से संतुष्ट होने की बात कही. इस तरह आधे से ज्यादा लाभुक योजना से असंतुष्ट पाये गये. जल जीवन मिशन के तहत निर्धारित नियमों के तहत जनगणना में दर्ज राजस्व ग्रामों को इस योजना में शामिल करना था. लेकिन राज्य सरकार ने 3339 राजस्व ग्रामों को योजना में शामिल नहीं किया.
ऑडिट के दौरान ठेकेदारों को अनुचित लाभ देने का मामला भी पाया गया. योजना के तहत 27.13 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ ठेकेदारों को देने का मामला प्रकाश में आया. चाईबासा प्रमंडल में जगन्नाथपुर जलापूर्ति योजना अप्रैल 2023 में शुरू की गयी थी. योजना की लागत 118.60 करोड़ रुपये थी. योजना को जुलाई 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित था. योजना के लिए बने नियम के तहत DI पाइप की आपूर्ति और उसे बिछाने के बाद ठेकेदार को 85 प्रतिशत राशि का भुगतान करना था. लेकिन इस मामले में ठेकेदार को 100 प्रतिशत का भुगतान कर दिया गया था.
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