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मनरेगा का पैसा पुरानी गाड़ियों के रखरखाव पर खर्च, मजदूरों को 321 करोड़ का भुगतान नहीं

रिपोर्ट में कहा गया कि राज्य में मनरेगा की स्थिति व उससे होने वाले लाभ और योजना के उद्देश्यों की पूर्ति का आकलन करने के लिए ऑडिट के दौरान छह जिलों को चुना गया था. वर्ष 2019-24 तक की अवधि में मनरेगा के तहत किये गये कार्यों के ऑडिट के लिए जिन जिलों को चुना गया, उसमें पूर्वी सिंहभूम, गढ़वा, गिरिडीह, गोड्डा, गुमला और  पाकुड़ का नाम शामिल है. इन जिलों के 12 प्रखंडों और 48 ग्राम पंचायतों के अलावा 480 योजनाओं के भौतिक सत्यापन के बाद कैग ने अपनी रिपोर्ट में इन तथ्यों का उल्लेख किया है.
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Ranchi :  मनरेगा में मजदूरी का पैसा पुरानी गाड़ियों के रखरखाव पर खर्च किया गया. पांच साल के दौरान अकुशल मजदूरों को 321 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया. मनरेगा की 49 प्रतिशत योजनाओं अधूरी पायी गयी. 27 प्रतिशत योजनाएं पूरी हुई और 24 प्रतिशत योजनाएं शुरू ही नहीं हुई. राज्य स्तर पर सिर्फ दो से चार प्रतिशत परिवारों ने ही 100 दिन का काम पूरा किया. विधानसभा के मॉनसून सत्र में मनरेगा से संबंधित भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में इन तथ्यों का उल्लेख किया गया है.

 

रिपोर्ट में कहा गया कि राज्य में मनरेगा की स्थिति व उससे होने वाले लाभ और योजना के उद्देश्यों की पूर्ति का आकलन करने के लिए ऑडिट के दौरान छह जिलों को चुना गया था. वर्ष 2019-24 तक की अवधि में मनरेगा के तहत किये गये कार्यों के ऑडिट के लिए जिन जिलों को चुना गया, उसमें पूर्वी सिंहभूम, गढ़वा, गिरिडीह, गोड्डा, गुमला और  पाकुड़ का नाम शामिल है. इन जिलों के 12 प्रखंडों और 48 ग्राम पंचायतों के अलावा 480 योजनाओं के भौतिक सत्यापन के बाद कैग ने अपनी रिपोर्ट में इन तथ्यों का उल्लेख किया है.

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के तीन जिलों में मनरेगा में मजदूरी का पैसा पुरानी गाड़ियों के रखरखाव पर खर्च किया गया. इन जिलों में गिरिडीह, गुमला और पाकुड़ का नाम शामिल है. वर्ष 2019-22 के बीच मनरेगा में मजदूरी मद के 32.62 लाख रुपये पुरानी गाड़ियों के टायर, बैटरी आदि बदलने पर खर्च कर दिया गया. मनरेगा अधिनियम में मजदूरी के पैसों को दूसरे काम में खर्च नहीं किया जा सकता है. वर्ष 2019-2024 तक मजदूरों को 321.84 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया था. 

 

बकाया मजदूरी का यह मामला अकुशल मजदूरों से संबंधित है. ऑडिट के दौरान पाया गया कि मार्च 2025 तक मजदूरों को इस राशि का भुगतान नहीं किया गया था. वर्ष 2019-24 तक की अवधि तक मनरेगा से जुड़े 1.02 करोड़ योजनाओं में से सिर्फ 27.96 लाख को ही पूरा किया जा सका था. यानी इस अवधि में मनरेगा की उपलब्धि सिर्फ 27 प्रतिशत थी. मार्च 2024 तक मनरेगा की योजनाओं पर 2633 करोड़ रुपये खर्च किये गये थे. फिर भी 50.21 लाख यानी 49 प्रतिशत योजनाएं अधूरी थी. 24 प्रतिशत योजनाओं को तो शुरू भी नहीं किया गया था.

 

मनरेगा में काम मांगने वालों को 100 दिनों का काम देने का नियम है. इस मुद्दे पर किये गये ऑडिट में यह पाया गया कि राज्य स्तर पर दो-चार प्रतिशत परिवारों ने ही 100 दिनों का काम पूरा किया है. नमूना जांच के लिए चुने गये छह जिलों में सिर्फ एक-दो प्रतिशत परिवारों ने ही 100 दिनों का काम पूरा किया है.

 

 

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