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परिजनों के इंतजार में 79 लावारिस शव, हर माह बरामद होती हैं 20 से 25 लाशें

Ranchi : परिजनों के इंतजार में 79 लावारिस शव पड़े हुए है. ये सभी शव राज्य के अलग-अलग जिलों के हॉस्पिटल में पड़े हुए है. जिनके परिजन अबतक सामने नहीं आये है और न ही इनकी शिनाख्त हो पायी है. गौरतलब है कि राज्य के अलग अलग जिले में अज्ञात शव बरामद होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. हर माह लगभग 20 से 25 अज्ञात शव बरामद होते है. अज्ञात शव बरामद कर पुलिस पोस्टमार्टम के लिए भेजती है.अधिकांश अज्ञात लाशों का शिनाख्त न होने पाने के कारण मौत का कारण भी पुलिस के लिए रहस्य बना रहता है. पढ़ें - अग्निपथ">https://lagatar.in/youth-rjds-march-to-raj-bhavan-in-protest-against-agneepath-scheme-state-president-said-central-government-is-playing-with-the-future-of-youth/">अग्निपथ

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मुर्दाघर में पड़े रहते है शव

अज्ञात शव बरामद होने के 3 से 4 दिन तक पुलिस मृतक के परिजनों का इंतजार करती है. शिनाख्त नहीं होने पर पुलिस ही लावारिस लाश का अंतिम संस्कार करा देती है. मृतक के कपड़े मालखाने में जमा करा दिए जाते हैं. सालों तक पड़े रहने के बाद वे खुद ही नष्ट हो जाते हैं और जांच भी बंद हो जाती है. शव को आमतौर पर चादर में लपेटकर मुर्दाघर में लेकर जाते हैं. फिर उन्हें स्ट्रेचर पर कोल्ड स्टोरेज में रखा जाता है. इसे भी पढ़ें - मनी">https://lagatar.in/money-laundering-case-suspended-ias-pooja-and-cas-custody-increased-ca-requests-release-of-seized-vehicles/">मनी

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किस जिले में कितने बरामद हुए अज्ञात शव

झारखंड पुलिस के आंकड़े के मुताबिक दिसंबर 2021 से लेकर मार्च 2022 तक राज्य के अलग-अलग जिलों में कुल 79 अज्ञात शव बरामद हुए हैं. जिनमें रेल धनबाद में 16, रेल जमशेदपुर में 10, सरायकेला में 07, दुमका में 01, जमशेदपुर में 12, कोडरमा में 02, रांची में 03, धनबाद में 07, गिरिडीह में 04, दुमका में 01, साहिबगंज में 01, चाईबासा में 04, बोकारो में 02, खूंटी में 03, गुमला में 04, गढ़वा में 01 और देवघर में 01 अज्ञात शव बरामद हुए हैं. इसे भी पढ़ें - देवघर">https://lagatar.in/locals-angry-with-beautification-of-pond-in-rampur-mohalla-of-deoghar/">देवघर

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कम ही शव की हो पाती पहचान

लावारिश शव की शिनाख्त इसलिए भी कम हो पाती हैं क्योंकि इन वारदात का पर्दाफाश करने के लिए आवाज कोई नहीं उठाता है. अपराधी पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए हत्या के बाद शिनाख्त छिपाने के लिए चेहरा बिगाड़ने के साथ ही, शव जला देता है. वहीं, कई मामलों में सिरकटी ललाश भी पुलिस के लिए सिरदर्द बन जाती है.मीडिया भी एक बार खबर देकर लावारिस शव को भूल जाता है. शिनाख्त न होने के चलते पुलिस उक्त मामले की फाइल भी बंद कर देती है. इसे भी पढ़ें - क्लर्क">https://lagatar.in/the-journey-from-clerk-to-presidential-candidate-was-not-easy-draupadi-murmu-has-lost-her-husband-and-two-sons/">क्लर्क

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