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भागलपुर में 9217 मिलियन टन कोयला भंडार, बिहार सरकार ने तेज की ई-नीलामी की तैयारी

भागलपुर जिले के कहलगांव और पीरपैंती क्षेत्र में स्थित छह बड़े कोल ब्लॉकों की ई-नीलामी को लेकर बिहार सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. इन कोल ब्लॉकों में लगभग 9,217.27 मिलियन टन कोयले का विशाल भंडार होने का अनुमान है.
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Bhagalpur: भागलपुर जिले के कहलगांव और पीरपैंती क्षेत्र में स्थित छह बड़े कोल ब्लॉकों की ई-नीलामी को लेकर बिहार सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. इन कोल ब्लॉकों में लगभग 9,217.27 मिलियन टन कोयले का विशाल भंडार होने का अनुमान है. राज्य सरकार का मानना है कि इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन से बिहार की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी और हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे.

 


इस संबंध में बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए नीलामी प्रक्रिया को सफल बनाने पर विशेष जोर दिया है. खान एवं भूतत्व विभाग के अधिकारियों ने सरकार को कोयला भंडार, उसकी गुणवत्ता और व्यावसायिक संभावनाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई है.

 


जानकारी के अनुसार, सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (CMPDI), रांची द्वारा सर्वेक्षण और अन्वेषण किए गए छह कोल ब्लॉकों में मिर्जागांव उत्तर, मिर्जागांव दक्षिण, राजगांव उत्तर, राजगांव दक्षिण, मंदार पर्वत तथा लक्ष्मीपुर उत्तर कोल ब्लॉक शामिल हैं. इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर कोयले की उपलब्धता की पुष्टि हो चुकी है.

 


तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश कोल ब्लॉक जी-12 श्रेणी के हैं, जबकि लक्ष्मीपुर उत्तर कोल ब्लॉक जी-11 श्रेणी में आता है. यहां उपलब्ध कोयला ताप विद्युत संयंत्रों और बिजली उत्पादन इकाइयों के लिए उपयोगी माना जा रहा है.
अधिकारियों के मुताबिक, छह में से एक कोल ब्लॉक कहलगांव क्षेत्र में स्थित है, जबकि शेष पांच पीरपैंती इलाके में हैं. केंद्र सरकार का कोयला मंत्रालय कोल माइंस (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 तथा एमएमडीआर अधिनियम, 1957 के तहत इन ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया पूरी करेगा.

 


उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में भी इन कोल ब्लॉकों की ई-नीलामी का प्रयास किया गया था, लेकिन किसी कंपनी द्वारा रुचि नहीं दिखाए जाने के कारण प्रक्रिया सफल नहीं हो सकी थी. इस बार राज्य और केंद्र सरकार मिलकर बड़े निवेशकों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को आकर्षित करने की रणनीति पर काम कर रही हैं.

 


सरकार का प्रयास है कि बिहार के ताप विद्युत संयंत्रों और प्रमुख खनन कंपनियों को नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाए. इसके लिए अन्य राज्यों की बड़ी कंपनियों से भी संपर्क स्थापित किया जा रहा है.
परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि कोयले का विशाल भंडार जमीन से मात्र 90 मीटर की गहराई पर स्थित है. इससे खनन कार्य अपेक्षाकृत आसान और कम लागत वाला होने की संभावना है.

 


बताया जाता है कि 20 मार्च 2018 को केंद्रीय सर्वेक्षण टीम ने क्षेत्र के 48 गांवों में कोयले की प्रचुर उपलब्धता की पुष्टि की थी. इसके बाद लगातार भूगर्भीय और तकनीकी अध्ययन किए गए, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अब नीलामी प्रक्रिया को गति दी जा रही है.

 

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