- सरकार ने बनाई है तीन सदस्य वाली कमेटी
- जुडिशल मजिस्ट्रेट रांची भी कर रही है जुडिशियल इंक्वारी
Ranchi : रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार में एक महिला कैदी के गर्भवती होने और यौन शोषण के आरोपों पर कोर्ट के स्वतः संज्ञान की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई. कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार से पीड़ित महिला की मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट मांगी है. वहीं, कोर्ट ने जुडिशियल कमिश्नर, रांची से मामले में जुडिशल मजिस्ट्रेट रांची द्वारा की गई जुडिशियल इंक्वारी की रिपोर्ट मांगी है. अगली सुनवाई 17 जून को होगी.
मामले में राज्य सरकार की ओर से जबाव दायर किया गया. मामले में कोर्ट ने DGP और IG प्रिजन के शपथ पत्र पर असंतोष जताया. कोर्ट ने कहा कि इनका जवाब सिर्फ मामले को टालने का प्रयास है. पीड़िता की मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है. अबतक मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट क्यों नहीं आया ? कोर्ट ने मौखिक कहा कि DGP इस मामले को IG प्रिजन का मामला बताते हुए अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते. जब यह मामला कोर्ट के संज्ञान में आया तो पीड़िता को तुरंत बेल दे दिया गया? हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ ने मामले की सुनवाई की.
दरअसल, पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि मामले की जांच को लेकर सरकार के गृह विभाग ने तीन सदस्य की कमेटी बनाई है जिसमें निदेशक प्रशासन मनोज कुमार, सहायक कारा निरीक्षक तुषार रंजन गुप्ता एवं प्रोवेशन पदाधिकारी कारा एवं सुधारात्मक सेवाएं निरीक्षण निरीक्षणालय चंद्रमोली सिंह शामिल है. वहीं, डालसा, रांची की जांच टीम के आलोक में जुडिशल मजिस्ट्रेट, रांची श्रुति सोरेन की ओर से जुडिशियल इंक्वायरी की जा रही है.
दरअसल, प्रतिपक्ष नेता बाबूलाल मरांडी एवं मीडिया में इस संबंध मामला आने के बाद झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) ने जांच टीम गठित की थी. टीम ने जेल जाकर जांच की और पीड़िता, जेल पीएलवी और जेल चिकित्सक के बयान दर्ज किए थे. जांच रिपोर्ट झालसा को भेज दी गई थी. वहीं, रांची जिला प्रशासन और जेल आईजी की ओर से भी अलग से जांच की थी.
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