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नेपाल में आई बाढ़ में 95 लोगों की गई जान, 100 से ज्यादा भारतीय लापता

भारत ने मेडिसिन  सहित 47.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी : रणधीर जायसवाल

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता

प्रधानमंत्री  मोदी ने कल नेपाल के प्रधानमंत्री से बात की थी. भारत नेपाल को हर मुमकिन सहायता देगा. विदेश मंत्रालय ने कहा, 288 भारतीय नागरिक अभी  भी संपर्क में नहीं हैं. 73 नागरिक वहां पर त्रिशूली 1 पावर प्रोजेक्ट में में काम कर रहे थे.

नेपाल त्रासदी पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने वहां राहत बचाव सामग्री भेजी है. कहा कि 2 विमानों में मानवीय सहायता नेपाल भेजी गयी है. पहली बार में 10 टन राहत सामग्री और दूसरी बार में 37.5 टन रिलीफ मैटेरियल भेजा गया है. इसमें 8 टन मेडिसिन  भी शामिल है.

उन्होंने कहा कि  प्रधानमंत्री  मोदी ने कल नेपाल के प्रधानमंत्री से बात की थी. भारत नेपाल को हर मुमकिन सहायता देगा. विदेश मंत्रालय ने कहा,  288 भारतीय नागरिक अभी  भी संपर्क में नहीं हैं. 73 नागरिक वहां पर त्रिशूली 1 पावर प्रोजेक्ट में में काम कर रहे थे.

विदेश मंत्रालय ने कहा कि  कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गये कई भारतीय अभी फंसे हैं, जो चीन की तरफ हैं. लगभग 200 भारतीय नागरिकों ने मदद मांगी है. कहा कि चीन में हमारा मिशन उनके रेस्क्यू पर स्थानीय प्रशासन के माध्यम से काम कर रहा है. ईशा फ़ाउंडेशन के लोग भी फंसे हुए हैं.'

रेस्क्यू टीमों ने 270 शव बरामद किये, 288 भारतीय पर्यटक अभी भी लापता

नेपाल में बाढ़ से मची तबाही

नेपाल के 127 स्थानीय पर्यटकों से भी संपर्क नही हो रहा है. पर्यटन बोर्ड के अनुसार अमेरिका के 65 पर्यटक,ऑस्ट्रेलिया के 35, ब्रिटेन के 33,  यूक्रेन के 53, मलेशिया के 51 और कनाडा के 25 पर्यटक लापता सूची में शामिल हैं.

नेपाल के प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि नेपाल और तिब्बत में कम से कम 800 विदेशियों समेत लगभग 1,500 लोग लापता हैं. अहम खबर यह है कि रेस्क्यू टीमों ने हेलीकॉप्टरों की सहायता से विभिन्न इलाकों में फंसे हजारों लोगों को जरूरी सामान पहुंचाये.स्थानीय पुलिस ने जानकारी दी है कि अब तक 270 शव बरामद किये गये हैं.


 
नेपाल के रसुवा जिले में 517 विदेशी पर्यटकों की कोई खोज खबर नहीं है  इनमें सर्वाधिक 288 पर्यटक भारत के हैं.  नेपाल के 127 स्थानीय पर्यटकों से भी संपर्क नही हो रहा है. पर्यटन बोर्ड के अनुसार  अमेरिका के 65 पर्यटक,ऑस्ट्रेलिया के 35, ब्रिटेन के 33,  यूक्रेन के 53, मलेशिया के 51 और कनाडा के 25 पर्यटक लापता सूची में शामिल हैं.

चीन के 100 नागरिक लापता, PLA वेस्टर्न थिएटर कमांड को भेजा गया

नेपाल में बाढ़ से तबाही मची

बीजिंग में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बताया कि लापता चीनी नागरिकों में पर्यटक, तीर्थयात्री सहित अन्य शामिल हैं.

तिब्बत में ग्लेशियर टूटने के कारण नेपाल में लैंडस्लाइड और बाढ़ से भारी तबाही मची है. खबर है कि चीन के 100 नागरिक इस भीषण त्रासदी में लापता हो गये हैं. चीन के विदेश मंत्रालय ने आज गुरुवार को इसकी पुष्टि की है.   

खबरों के अनुसार चीन नेपाल हादसे में रेस्क्यू ऑपरेशन में  जी-जान से लगा हुआ है. चीन ने  PLA वेस्टर्न थिएटर कमांड, आर्म्ड पुलिस और अन्य टीमों को भेजा  है.

बीजिंग में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बताया कि लापता चीनी नागरिकों में पर्यटक, तीर्थयात्री सहित अन्य शामिल हैं. कहा कि चीन नेपाल के साथ मिलकर खोज और बचाव अभियान पर लगातार नजर रखे हुए है.   

पूर्व DRDO चीफ सतीश रेड्डी सहित हैदराबाद के 31 कैलाश यात्री सुरक्षित

पूर्व DRDO चीफ सतीश रेड्डी

हैदराबाद के 31 कैलाश मानसरोवर यात्री नेपाल-तिब्बत सीमा पर आयी बाढ़ की चपेट में आने से बच गये.

हैदराबाद के 31 कैलाश मानसरोवर यात्री नेपाल-तिब्बत सीमा पर आयी बाढ़ की चपेट में आने से बच गये. उनका भाग्य अच्छा था कि वे घटना से कुछ घंटे पहले ही प्रभावित इलाके से निकल गये थे. सभी यात्री सुरक्षित बताये गये हैं. वे  तिब्बत के सागा में शरण लिये हुए हैं. पूर्व DRDO चेयरमैन डॉ. जी. सतीश रेड्डी भी समूह में शामिल हैं.

Opinion : नेपाल तो ट्रेलर है, भारत में दिख सकता है भयानक दृश्य

चीन सरकार द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाया जा रहा जांगमु बांध. (फाइल फोटो)

Girish Malviya

नेपाल में आई भयानक बाढ़ से भी कहीं ज्यादा तबाही भारत में मच सकती है लेकिन हमारे देश की सरकार सोई हुई है ! दरअसल, 2025 से ही चीन ने भारत-चीन सीमा पर दुनिया का सबसे विशालकाय जांगमु बांध बना शुरू कर दिया है. यह बांध हिमालय पर्वतमाला में एक विशाल घाटी पर बनाया जा रहा है जहां ब्रह्मपुत्र नदी एक विशाल यू-टर्न लेकर अरुणाचल प्रदेश और फिर बांग्लादेश में दाखिल होती है. इस मेगा प्रोजेक्ट का साइज दुनिया के किसी भी अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से कहीं ज्यादा बड़ा है जिसमें चीन का अपना थ्री गॉर्जेस बांध भी शामिल है, जिसे दुनिया में सबसे बड़ा माना जाता है.  यह डैम न सिर्फ एक जमीन की दरार के पास स्थित है, बल्कि इसकी निर्माण-स्थल की संरचना भी ढीली और कमजोर पकड़ वाली है.

देश के जाने माने रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी ने चीन के सबसे बड़े डैम को लेकर चेतावनी दी है कि दरार में हलचल या भूकंप से जलाशय के ढलानों में अस्थिरता बहुत आसानी से पैदा हो सकती है, जिससे पूरे डैम प्रोजेक्ट और आस-पास के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है. दरअसल, चीन के नए सुपर-डैम से जुड़े जोखिम बहुत ज्यादा हैं, क्योंकि इसे हिमालय के भूकंप की दृष्टि से सक्रिय इलाके में बनाया जा रहा है, जहां इंडियन और यूरेशियन प्लेटें आपस में टकराती हैं. इस इलाके में एशिया के कुछ सबसे शक्तिशाली भूकंप आए हैं, जिनमें 2025 का विनाशकारी म्यांमार भूकंप भी शामिल है.

ब्रह्म चेलानी कहते है- नदी के ऊपरी हिस्से में पानी का एक संभावित बम तैयार किया जा रहा हो, तो निचले हिस्से में खामोशी को कैसे सही ठहराया जा सकता है? 'चीन के सबसे बड़े डैम को लेकर चीन के ही वैज्ञानिक गंभीर भू-वैज्ञानिक खतरों की चेतावनी दे रहे हैं, फिर भी नई दिल्ली क्यों चुप है? अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भी हाल ही में चीन के इस मेगा डैम को भारत के लिए 'वाटर बम' बताया था. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ये प्रोजेक्ट सिर्फ पर्यावरणीय या जल सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि अस्तित्व के लिए भी खतरा है. उन्होंने कहा कि इस बांध से सैन्य खतरा पैदा होगा और यह सीमावर्ती जनजातियों के जीवन, भूमि और संसाधनों को बर्बाद कर सकता है. इस डैम से भारत के पूर्वोत्तर, खासकर असम के मैदानी इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों पर खतरा मंडरा रहा है

अगर चीन ये बांध बना लेता है और भगवान न करे कि किसी भी तरह से ये बांध टूट जाता है तो नेपाल में जो बाढ़ भयानक दृश्य आप अभी देख रहे है वो आपको ट्रेलर मात्र ही लगेगा. 

नेपाल में आई बाढ़ के बीच रांची के रामप्रसाद यादव लापता, परिजनों की बढ़ी चिंता

Lagatar Desk :  नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले 41 वर्षीय रामप्रसाद घोष लापता हो गए हैं. परिजनों के मुताबिक, रामप्रसाद नौकरी के सिलसिले में नेपाल के काठमांडू में रह रहे थे. बाढ़ के बाद से उनसे किसी तरह का संपर्क नहीं हो पा रहा है.

 

जानकारी के अनुसार, रामप्रसाद काठमांडू के अपर त्रिशूली बेसरा इलाके में एक निजी कंपनी में एडमिन के पद पर काम करते थे. वह करीब चार महीने पहले अप्रैल में नौकरी के सिलसिले में नेपाल गए थे. परिजनों के अनुसार,  रामप्रसाद से उनकी आखिरी बार 25 अगस्त की रात को बात हुई थी. इसके बाद नेपाल में बाढ़ और तबाही की खबरें सामने आने लगीं, जिसके बाद से उनका मोबाइल फोन बंद है और उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है. रामप्रसाद का परिवार रांची के कोकर इलाके में रहता है. अचानक उनसे संपर्क टूटने के बाद परिवार के लोग काफी परेशान हैं.

 

परिजन लगातार उनकी जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं और अपने स्तर से भी संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं. परिजनों को उम्मीद है कि रामप्रसाद सुरक्षित होंगे और जल्द ही उनका पता चल जाएगा. गौरतलब है कि तिब्बत में ग्लेशियर टूटने से नेपाल में बाढ़ आ गई. इस घटना में 160 से अधिक लोगों की मौत हो गई है. जबकि सैकड़ों लोग लापता हैं. ऐसे में रांची के रामप्रसाद घोष के लापता होने से परिवार वाले चिंतित हैं और उनकी सुरक्षित वापसी और ठोस जानकारी का इंतजार कर रहे हैं.

नेपाल में बाढ़ से अकल्पनीय  तबाही, वैज्ञानिकों ने चेताया,47 ग्लेशियर झीलें फटी तो क्या होगा?

International Desk :  नेपाल में आयी तबाही ने पूरे विश्व का ध्यान खींचा है. बाढ़ ने अकल्पनीय  तबाही मचाई है. इसका कारण तिब्बत में ग्लेशियर का फटना है. खबरों के अनुसार बाढ़ की चपेट में आकर अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुके है  सैकड़ों लोग लापता हैं. इनमें पर्यटक भी शामिल हैं,  घर, पुल से सहित भारी संख्य में  इमारतें जमीनदोज हो गयी हैं.

नेपाल मलबों के ढेर में बदल गया है. लेकिन नेपाल अभी भी बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि नेपाल की 47 ग्लेशियर झीलें टाइम बम में तब्दील हो चुकी हैं. सैलाब का खतरा बरकरार है. इन झीलों के फटने से अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे आ सकता है.  इससे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF )का खतरा है. नेपाल के पहाड़ी जिलों के गांव, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं इसकी चपेट में आ सकती हैं.  

नेपाल की प्रमुख नदियों के आसपास 47 ग्लेशियर झीलें बनी हुई हैं.  इन 47 झीलों में से 21 नेपाल में हैं और 25 झीलें तिब्बत में सीमा पार मौजूद हैं. ये खतरनाक ग्लेशियर झीलों के रूप में चिन्हित है. वैज्ञानिक चेतावनी दे चुके है. ये झीलें अगर फट गयीं तो नेपाल की नदी घाटियों में भारी तबाही मच जायगी है. यह आकलन इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) और नेपाल सरकार का है.

 

 

दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत 14 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, भूस्खलन, वज्रपात की चेतावनी

New Delhi :  दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत 14 राज्यों में आज भारी बारिश की संभावना जताई गयी है. मौसम विभाग (आईएमडी) ने आज 27 अगस्त के लिए 14 राज्यों में तेज हवा चलने का अलर्ट जारी किया है. 70-80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलेगी. कुछ राज्यों में ओले गिरेंगे. वज्रपात होगा.  मौसम विभाग ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश के साथ भूस्खलन के संकेत दिये हैं. आईएमडी के अनुसार उत्तर-पूर्वी असम सहित उत्तर-पश्चिमी मध्य प्रदेश में ऊपरी हवा का साइक्लोनिक सर्कुलेशन एक्टिव है.

नेपाल में बाढ़ ने मचाई तबाही

Lagatar Desk: नेपाल के भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या 95 हो गई और 100 से ज्यादा भारतीय लापता हैं. इनमें से ज्यादातर पर्यटक कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जा रहे थे. नेपाल सेना के मुताबिक प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए 15 हेलिकॉप्टर तैनात किए गए हैं.

Lagatar Desk: नेपाल के भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या 95 हो गई और 100 से ज्यादा भारतीय लापता हैं. इनमें से ज्यादातर पर्यटक कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जा रहे थे. नेपाल सेना के मुताबिक प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए 15 हेलिकॉप्टर तैनात किए गए हैं. 

घटना के बाद नेपाल पर्यटन बोर्ड, टूरिस्ट पुलिस, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां मिलकर बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं. नेपाल प्रशासन और ट्रैवल एजेंसियां लापता यात्रियों की डिटेल्स जुटाने और उनकी सही लोकेशन का पता लगाने में जुटी हैं.

 

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि रसुवा में आपदा की स्थिति भूकंप के साथ आए हिमस्खलन के कारण हुई थी और इसकी आगे पुष्टि की जा रही है. उन्होंने बताया कि सुबह करीब 8:40 बजे रसुवा में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ से रसुवा और नुवाकोट जिलों के कई इलाके प्रभावित हुए. उन्होंने कहा कि तिमुरे, स्याफरुबेसी, बेत्रावती, त्रिशूली बत्तर और देवीघाट समेत कई इलाक़ों में भारी नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि यह बाढ़ सुबह 8:37 बजे आए भूकंप के कारण हुई थी और भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के तटीय क्षेत्रों में अभी भी खतरा बना हुआ है.

 

नेपाल के रसुवा में टिमुरे और स्याफ्रूबेंसी सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में हैं. घर, बाजार, सड़कें, पुल और हाइड्रोपावर से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बुरी तरह प्रभावित हुआ है. बिजली सप्लाई भी प्रभावित हुई है. 

 

वहीं नुवाकोट के त्रिशूली बाजार के आसपास के करीब 60 घर बहने की सूचना है. दो मोटरेबल पुल भी बह गए हैं. त्रिशूली और देविघाट हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को नुकसान पहुंचा है और 25 मेगावाट के सोलर प्लांट के तीन ब्लॉक और एक सब-स्टेशन भी बह गए हैं.

 

पीएम नरेन्द्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा है कि नेपाल के पीएम बालेंद्र शाह से बात की और बाढ़ स हुई जान-माल की हानि पर संवेदना जताई. इस मुश्किल वक्त में भारत के लोग नेपाल में भाई-बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं. भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है. हमारी टीमें बचाव और राहत कार्यों के लिए मिलकर काम कर रही हैं.

 

इधर, सीएम योगी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ से हुई क्षति अत्यंत चिंताजनक है. भगवान पशुपतिनाथ से सभी के सकुशल होने की प्रार्थन है. इसके प्रभाव से उत्तर प्रदेश के जनपद महाराजगांज और कुशीनगर में गंडक व नारायणी नदियों के जलस्तर में वृद्धि और बाढ़ की संभावना के दृष्टिगत स्थानीय प्रशासन को पूर्ण सतर्कता बरतने और आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. 

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