Jamtara: मानसून के दौरान वज्रपात की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन जामताड़ा जिले के अधिकांश विद्यालय आज भी तड़ित चालक (Lightning Arrester) जैसी बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था से वंचित हैं. जिले के लगभग 1030 विद्यालयों में से करीब 98 प्रतिशत विद्यालयों में तड़ित चालक नहीं लगा है, जिससे हजारों छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की सुरक्षा भगवान भरोसे है.
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सबसे गंभीर स्थिति यह है कि नारायणपुर, करमाटांड़, कुंडहित और नाला के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय भी इस जरूरी सुरक्षा व्यवस्था से वंचित हैं, जबकि इन विद्यालयों में सैकड़ों बच्चियां 24 घंटे रहती हैं.
नारायणपुर कस्तूरबा विद्यालय की वार्डन निधि कुमारी ने बताया कि विद्यालय में 500 छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन तड़ित चालक नहीं होने से हर बारिश और बिजली चमकने के दौरान भय का माहौल बना रहता है. उन्होंने बताया कि इस संबंध में विभाग को लिखित सूचना भी भेजी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.
करमाटांड़ कस्तूरबा विद्यालय की वार्डन अर्चना सिंह ने बताया कि विद्यालय में 340 छात्राएं अध्ययनरत हैं. करीब 15 दिन पहले वज्रपात से विद्यालय का ट्रांसफार्मर भी जल गया था. इसके बाद से बारिश शुरू होते ही बच्चियां डर जाती हैं, लेकिन अब तक तड़ित चालक लगाने की दिशा में कोई पहल नहीं हुई.
कुंडहित कस्तूरबा विद्यालय की वार्डन नीलम कुमारी ने बताया कि उनके विद्यालय में 495 छात्राएं हैं, लेकिन यहां भी तड़ित चालक नहीं लगा है. उन्होंने कहा कि हर बार बारिश और तेज गर्जना के समय छात्राओं और कर्मचारियों में भय का माहौल बन जाता है.
वहीं नाला कस्तूरबा बालिका आवासीय विद्यालय की वार्डन रीना रोजलिन ने बताया कि परिसर में केवल एक स्थान पर तड़ित चालक लगा है, जबकि पूरे विद्यालय भवन की सुरक्षा के लिए यह पर्याप्त नहीं है. उन्होंने भी अतिरिक्त तड़ित चालक लगाने की मांग की है.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि संबंधित विभाग के सहायक अभियंता को भी यह जानकारी नहीं है कि जिले के कितने विद्यालयों में तड़ित चालक लगा है और कितनों में नहीं. उन्होंने कहा कि दो-तीन दिनों के भीतर सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी.
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