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पुलिस और ईडी के बीच फिर नया विवाद शुरू

वर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों और रांची पुलिस के बीच जांच के नाम पर एक बार फिर से विवाद शुरू हो गया है. ईडी पेयजल घोटाले में बड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है. दूसरी तरफ रांची पुलिस, ईडी के अधिकारियों द्वारा घोटाले के अभियुक्त संतोष कुमार के साथ पूछताछ के दौरान मारपीट करने के आरोपों की जांच कर रही है. पुलिस की टीम दलबल के साथ 15 जनवरी को सुबह ईडी कार्यालय पहुंची. इससे दोनों एजेंसियों की बीच फिर नया विवाद शुरू होने की आशंका है.
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Ranchi :   प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों और पुलिस के बीच जांच के नाम पर एक बार फिर से विवाद शुरू हो गया है. ईडी पेयजल घोटाले में बड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है. दूसरी तरफ रांची पुलिस, ईडी के अधिकारियों द्वारा घोटाले के अभियुक्त संतोष कुमार के साथ पूछताछ के दौरान मारपीट करने के आरोपों की जांच कर रही है. पुलिस की टीम दलबल के साथ 15 जनवरी को सुबह ईडी कार्यालय पहुंची. इससे दोनों एजेंसियों की बीच फिर नया विवाद शुरू होने की आशंका है.

 

राज्य में ईडी और पुलिस के बीच विवाद और अपने-अपने अधिकारों को लेकर पहले से कानूनी जंग छिड़ी हुई है. इस विवाद की शुरूआत अवैध खनन की जांच के दौरान शुरू हुई थी. ईडी ने साहिबगंज टोल के टेंडर में गड़बड़ी के आरोपों में नेताओं को क्लिनचिट देने वाले पुलिस अधिकारियों को समन भेजना शुरू किया था. इस क्रम में पहले कुछ पुलिस अधिकारी ईडी के समन पर पूछताछ के लिए हाजिर हुए थे. बाद में ईडी द्वारा पुलिस अधिकारियों को समन जारी कर बुलाने की घटना को न्यायालय में चुनौती दी गयी. लेकिन न्यायालय के आदेश के आलोक में पुलिस अधिकारियों को ईडी द्वारा जारी किये गये समन के आलोक में पूछताछ के लिए हाजिर होना पड़ा. 

 

अवैध खनन की जांच के दौरान ही ईडी ने साहिबगंज के उपायुक्त आवास पर छापा मारा. इसके बाद सरकार ने ईडी को पत्र भेजकर अपनी नाराजगी जाहिर की. साथ ही एक SOP बनाया, जिसमें राज्य के किसी भी अधिकारी को केंद्रीय एजेंसियां जैसे ईडी, आयकर विभाग आदि द्वारा पूछताछ के लिए बुलाये जाने पर सक्षम पदाधिकारी से अनुमति लेने का प्रावधान किया गया. ईडी ने सरकार द्वारा जारी किये गये SOP को यह कहते हुए गलत करार दिया कि उसे संसद से पारित कानून के तहत अधिकार मिला है. राज्य सरकार इन अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती. 

 

ईडी और पुलिस के बीच दूसरी बार भूमि घोटाले की जांच के दौरान विवाद शुरू हुआ. यह विवाद अंचल अधिकारियों द्वारा एक वकील के माध्यम से ईडी को करीब छह करोड़ रुपये घूस देने के आरोपों के बाद शुरू हुआ. यह विवाद भी न्यायालय पहुंचा. ईडी की ओर से अपने ऊपर लगे सभी आरोपों और प्राथमिकी की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई. इस मामले में कई दौर की सुनवाई हो चुकी है. लेकिन न्यायालय ने ईडी की याचिका पर अब तक कोई फैसला नहीं सुनाया है. 

 


अब पेयजल घोटाले में मुख्य अभियुक्त द्वारा ईडी के खिलाफ दर्ज करायी गयी प्राथमिकी की जांच के दौरान एक बार फिर दोनों एजेंसियों के बीच नया विवाद शुरू होने की आशंका जतायी जा रही है.

 

 

 

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