Radhe Mohan
Ranchi : राजधानी रांची में किरायेदार सत्यापन को लेकर पुलिस के दावे और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर सामने आया है. LAGATAR की पड़ताल में सुखदेवनगर, कोतवाली, लालपुर, लोअर बाजार, डेलीमार्केट और जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र में एक भी ऐसा मकान मालिक नहीं मिला, जिसने अपने किरायेदार की जानकारी संबंधित थाने में जमा कराई हो. हमने थानों की पुलिस से भी संपर्क किया, लेकिन यही पता चला कि यह काम नहीं हो रहा है.
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यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि वर्ष 2024 में रांची से छह लोगों को आतंकी होने के आरोप में पकड़े जाने के बाद पुलिस ने पूरे शहर में सत्यापन अभियान शुरू किया था. तब सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिया गया था कि बीट पेट्रोलिंग के लिए अलग से जवान तैनात किए जाएं. मुहल्लावार किरायेदारों की सूची तैयार की जाए और हर घर में रहने वाले लोगों का पूरा ब्योरा जुटाकर थाने में सुरक्षित रखा जाए. इसकी निगरानी डीएसपी स्तर के अधिकारियों को सौंपी गई थी.
इसके साथ ही सभी मकान मालिकों को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि किरायेदार को घर देने से पहले उसका पुलिस सत्यापन कराएं. बिना सत्यापन किसी को किराये पर रखने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी.
कानूनी पहलू की बात करें तो अगर कोई मकान मालिक अपना किराएदार का दस्तावेज नजदीकी थाना में जमा नहीं करता है तो (BNS), 2023 की धारा 223 केतहत 6 महीने की जेल या 2500 रुपए जुर्माना या दोनों देना पड़ सकता है.
2024 से पहले सिठियो से आतंकी गिरफ्तारी और हिंदपीढ़ी के एक लॉज से विस्फोटक सामग्री मिलने के बाद भी किरायेदार और लॉज में रहने वालों के सत्यापन का विशेष अभियान चलाया गया था. लेकिन अभियान सिर्फ शुरु हुआ, बयानों में और अखबारों की खबरों में. जमीन पर कुछ काम नहीं हुआ.


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