Ranchi : झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय रांची के सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा जलवायु परिवर्तन और जल सुरक्षा: विकासशील देशों के लिए जोखिम निवारण रणनीतियां और कृत्रिम बुद्धिमत्ता समाधान विषय पर आयोजित सम्मेलन समाप्त हो गया.
सम्मेलन में देशभर से आए विद्वानों, शोधकर्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों की गरिमामयी उपस्थिति रही. सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जल संकट की गंभीर चुनौतियों पर मंथन करते हुए तकनीक-आधारित व्यावहारिक समाधान तलाशना था.
सम्मेलन के मुख्य व्याख्यान में एनआईटी राउरकेला के प्रो. खाटुआ ने जलवायु सहनशीलता, सतत जल प्रबंधन रणनीतियों और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक योजना, डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया और तकनीकी हस्तक्षेप जल संकट से निपटने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित ट्रिपल आईटी रांची के निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की समस्या नहीं, बल्कि वर्तमान की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है. हिमनदों का पिघलना, वैश्विक तापमान में वृद्धि, अनियमित वर्षा और भूजल संसाधनों का तेजी से ह्रास इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं.
उन्होंने जलवायु अध्ययन एवं जल संसाधन प्रबंधन में एआई और आधुनिक तकनीकों के एकीकरण पर विशेष बल दिया. उद्घाटन वक्तव्य डीन (शैक्षणिक) प्रो. मनोज कुमार ने प्रस्तुत किया.सम्मेलन की समन्वयक और आयोजन सचिव डॉ. प्रतिभा वरवड़े ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और विद्यार्थियों को एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करना था.
सम्मेलन के दौरान तीन तकनीकी सत्रों में कुल 35 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए. महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार सहित कई राज्यों के प्रतिष्ठित संस्थानों की सक्रिय भागीदारी रही.
सम्मेलन में आईसीएआर भूमि उपयोग योजना प्रभाग नागपुर, एनआईटी वारंगल, मगध विश्वविद्यालय बोधगया, एमपीयूएटी उदयपुर, बीआईटी मेसरा, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची, साईं नाथ विश्वविद्यालय रांची, एनयूएसआरएल रांची और झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों से महत्वपूर्ण शोध योगदान प्राप्त हुए. विचार-विमर्श मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार और सामुदायिक एवं पारिस्थितिकी तंत्र सहनशीलता जैसे तीन प्रमुख विषयों पर केंद्रित रहा.
सम्मेलन के दौरान उत्कृष्ट शोध कार्यों को प्रोत्साहित करने के लिए श्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार प्रदान किए गए. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव विषय में बीआईटी मेसरा के साहिल हेम्ब्रम, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार विषय में सीयूजे के डॉ. विभांशु कुमार और सामुदायिक एवं पारिस्थितिकी तंत्र सहनशीलता विषय में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची के डॉ. मिंटू जोब को सम्मानित किया गया.
सेल, रांची के मुख्य महाप्रबंधक निलेश सिन्हा ने उद्योग क्षेत्र में ऊर्जा और जल उपयोग के अनुकूलन और एआई आधारित समाधानों की भूमिका पर प्रकाश डाला. वहीं दूरसंचार विभाग के उप महानिदेशक पांडेय विजय भूषण प्रसाद ने स्वच्छ ऊर्जा, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी और प्रौद्योगिकी-सक्षम शमन रणनीतियों की आवश्यकता को रेखांकित किया.
कार्यक्रम का समापन डॉ. पी. के. पाढ़ी द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ. इस अवसर पर डॉ. बीरेंद्र भारती, प्रो. के. बी. पांडा, प्रो. सारंग मेधेकर, प्रो. आर. के. डे, प्रो. तपन बसंतिया, प्रो. देवव्रत सिंह, प्रो. सुभाष यादव, प्रो. जी. पी. सिंह, प्रो. श्रेया भट्टाचार्जी, प्रो. सुचेता सेन चौधरी, डॉ. अमरेंद्र कुमार, डॉ. सुदर्शन यादव सहित बड़ी संख्या में संकाय सदस्य, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे. सभी की सक्रिय सहभागिता से यह राष्ट्रीय सम्मेलन अत्यंत सफल रहा.
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