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DVC हजारीबाग परियोजना का लेखा कार्यालय मैथन स्थानांतरित, विधायक ने जताई नाराजगी

Hazaribag : दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के हजारीबाग परियोजना स्थित लेखा कार्यालय को मैथन स्थानान्तरित कर दिया गया. इसके लिए सदर विधायक मनीष जायसवाल ने भारी नाराजगी जताई है. उन्होंने इस बाबत डीवीसी मुख्यालय कोलकाता के अध्यक्ष आर.एन.सिंह को एक पत्र लिखकर इस संबंध में पुनर्विचार करने का किया आग्रह किया है. पत्र में विधायक ने लिखा है कि डीवीसी के सभी ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि उनसे मिलने के लिए उनके कार्यालय में आए हुए थे. उन सभी ने उन्हें यह जानकारी दी कि दामोदर घाटी निगम की हजारीबाग परियोजना स्थित लेखा कार्यालय को मैथन स्थानांतरित कर दिया गया है. इसे भी पढ़ें–झारखंड">https://lagatar.in/women-workers-of-jharkhand-will-also-get-two-years-leave-to-take-care-of-children/">झारखंड

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हजारीबाग लेखा कार्यालय का ऐतिहासिक महत्व

इस संदर्भ में विभाग से जारी किए गए पत्रांक संख्या पी.एल.-आई.ई.मर्जर-704, दिनांक -6 सितंबर 2022 में जो निर्णय लिया गया है, यह बहुत ही हास्यास्पद प्रतीत होता है कि बिना अकाउंट और फाइनेंस के इतना बड़ा कार्य क्षेत्र वे लोग कैसे चलाएंगे. जहां भविष्य में सरकार को डीवीसी के कमांड एरिया में विद्युत सप्लाई के साथ-साथ उपभोक्ताओं से सीधे पैसे वसूलने की योजना आप बना रहे हैं, वैसे समय में बिना लेखा कार्यालय के यह कार्य कैसे फलीभूत होगा. आगे उन्होंने लिखा है कि हजारीबाग स्थित लेखा कार्यालय ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि यह कार्यालय दामोदर घाटी निगम का न केवल सबसे पहला स्थापित कार्यालय है, बल्कि भारत सरकार की ओर से डीवीसी की जब परिकल्पना की गई थी, तो सर्वप्रथम निदेशक भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास के कार्यालय की स्थापना हजारीबाग में ही की गई थी. इसी के साथ इस लेखा कार्यालय को भी स्थापित किया गया था, जो पिछले लगभग 78 वर्षों से लगातार कार्यरत है और निगम की सेवा कर रहा है.

लेखा कार्यालय के स्थानांतरण से होगी परेशानी

उन्होंने यह भी लिखा है कि इस लेखा कार्यालय का कार्य क्षेत्र झारखंड एवं पश्चिम बंगाल राज्य के लगभग 8 से 10 जिले तक यथा हजारीबाग, कोडरमा, बोकारो, रामगढ़, गिरिडीह, चतरा, जामताड़ा, देवघर, पुरुलिया एवं वर्धमान आदि तक फैला हुआ है. हजारीबाग स्थित लेखा कार्यालय के कार क्षेत्र के अंतर्गत यह सभी जिले आते हैं. इस लेखा कार्यालय की ओर से निगम के भूमि संरक्षण विभाग के अलावा जीओएमडी-5, टीएससी (पश्चिम क्षेत्र), टीएससी-4 (भू- अर्जन एवं पुनर्वास) कार्यालय आते हैं और इन सभी कार्यालयों का कार्य क्षेत्र का फैलाव उन जिलों के सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों तक है और हजारीबाग लेखा कार्यालय निगम के इन विभागों के कार्य क्षेत्र के मध्य में स्थापित है. पत्र में विधायक मनीष जायसवाल ने लिखा है कि इस कार्यालय के मैथन स्थापित होने से निगम को निश्चित ही न सिर्फ भारी आर्थिक क्षति होने की संभावना है, बल्कि आवर्ती आर्थिक खर्च भी बढ़ेगा और साथ ही साथ इससे यहां के स्थानीय पेंशनर भी प्रभावित होंगे. आगे उन्होंने लिखा है कि इन तथ्यों के अलावा सारी दुनिया और भारत सरकार भी अपने ऐतिहासिक धरोहरों पुराने कार्यालयों को बचाने का कार्य करती आई है. ऐसे में निगम की ओर से इस कार्यालय का मैथन विस्थापित किए जाने का विचार बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने डीवीसी के अध्यक्ष से आग्रह करते हुए कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों का दामोदर घाटी निगम के से आत्मिक लगाव रहा है और विशेषकर डीवीसी हजारीबाग परियोजना के प्रति सभी का भावनात्मक संबंध रहा है. इसे भी पढ़ें–जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-pds-dealer-sitting-on-dharna-in-front-of-dc-office-against-departmental-order/">जमशेदपुर

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फैसले को रद्द किया जाए- मनीष जायसवाल

उन्होंने कहा है कि हजारीबाग लेखा कार्यालय के हस्तांतरण के निर्णय को अविलंब रद्द किया जाए. विधायक ने इसकी प्रतिलिपि झारखंड ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव को भी प्रेषित किया है. इधर इस संबंध में विधायक मनीष जायसवाल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से भी इस मामले को सार्वजनिक करते हुए लिखा है कि मंशा स्पष्ट है कि यहां डीवीसी के ऑपरेशन को चरणबद्ध तरीके से झारखंड से हटाकर बंगाल के समीप करने का प्रयास किया जा रहा है. इसका खामियाजा भविष्य में झारखंड को भुगतना पड़ेगा. उन्होंने सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ट्वीट करते हुए अनुरोध किया है कि इस मामले पर संज्ञान लें और डीवीसी हजारीबाग लेखा कार्यालय के स्थानान्तरण के निर्णय को अविलंब रद्द किए जाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाई जाए ताकि भविष्य में इस फैसले का खामियाजा झारखंड की जनता को न भुगतना पड़े. [wpse_comments_template]

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