Ranchi News: नामकुम अंचल कार्यालय से दाखिल-खारिज से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब होने के मामले में गिरफ्तार तत्कालीन अंचल निरीक्षक मनोज कुमार दीक्षित और तत्कालीन लिपिक दीपक कुमार को जेल भेजने से पहले ACB ने दोनों आरोपियों से पूछताछ की, पूछताछ के दौरान दस्तावेज गायब होने और फाइल की जिम्मेदारी को लेकर दोनों ने टालमटोल भरे जवाब दिए. ACB इन जवाबों से संतुष्ट नहीं हुई है. अब दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेने की तैयारी की जा रही है.
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने ACB को बताया कि जमीन से जुड़े सभी कागजात और संबंधित फाइल उन्होंने कर्मचारी महली को सौंप दी थी. दोनों का कहना था कि फाइल महली के पास थी और वहीं से गायब हुई. आरोपियों ने दस्तावेज गायब होने में अपनी भूमिका से इनकार किया. हालांकि फाइल किस तारीख को महली को दी गई, किसके सामने दी गई और उसके बाद फाइल की निगरानी किसके जिम्मे थी, जैसे सवालों पर दोनों स्पष्ट जवाब नहीं दे सके.
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इसी वजह से ACB उनकी पूछताछ से संतुष्ट नहीं हुई. दोनों को जेल भेजे जाने के बाद अब जांच एजेंसी उन्हें रिमांड पर लेकर फिर से पूछताछ करने की तैयारी में है. रिमांड के दौरान फाइल की पूरी कड़ी खंगाली जाएगी और आरोपियों से उनके पहले दिए गए जवाब के आधार पर दोबारा सवाल किए जाएंगे.
मामला नामकुम अंचल कार्यालय में दर्ज दाखिल-खारिज वाद संख्या 356R-27/2013-14 से जुड़ा है. दस्तावेज गायब होने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर ACB थाना रांची में कांड संख्या 18/2026 दर्ज किया गया था. प्राथमिकी 26 अगस्त 2026 को दर्ज हुई थी. जांच में तत्कालीन सीओ डॉ. श्वेता वर्मा, तत्कालीन सीआई मनोज कुमार दीक्षित और तत्कालीन लिपिक दीपक कुमार की भूमिका सामने आई.
1.22 एकड़ जमीन के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का आरोप
मामला धुर्वा थाना क्षेत्र के डुंडू गांव स्थित खाता नंबर 32 के प्लॉट नंबर 776, 820, 821 और 822 से जुड़ी करीब 1.22 एकड़ जमीन के रिकॉर्ड से भी जुड़ा है. आरोप है कि अंचल स्तर पर जमीन के रिकॉर्ड में हेरफेर कर प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के नाम जमाबंदी कायम कर दी गई. शिकायत में करीब दो एकड़ जमीन के म्यूटेशन और डिमांड खोले जाने को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं.
शिकायत के अनुसार, परिवादी की मां ने तीन अलग-अलग पंजीकृत विक्रय विलेखों के जरिए कुल 5.93 एकड़ जमीन खरीदी थी. इसका पंजीकरण संख्या 23R/1978-79 बताया गया है. मां की मृत्यु के बाद परिवार में बंटवारा हुआ और परिवादी ने खुद को जमीन का वैध उत्तराधिकारी बताया.
17 अगस्त 2016 को परिवादी को अंचल कार्यालय की ओर से दोहरी जमाबंदी को लेकर नोटिस मिला. इसके बाद अंचल कार्यालय पहुंचने पर उसे पता चला कि संबंधित जमीन के एक हिस्से पर प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के नाम से नई जमाबंदी कायम कर दी गई है.
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